एआई क्षेत्र के स्टार्टअप रिकर्सिव ने अपना पहला प्रमुख कोडिंग मॉडल फ्लिंट पेश किया है, जिसे मुख्य रूप से एक अन्य एआई सिस्टम द्वारा ही तैयार किया गया है। कंपनी के ऑटोमेटेड रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट सिस्टम यूरेका मशीन के जरिए विकसित यह मॉडल दिखाता है कि कैसे खुद में सुधार करने वाले सॉफ्टवेयर विकास की समयसीमा को काफी छोटा कर सकते हैं। इंसानी इंजीनियर्स की बड़ी टीमों पर निर्भर रहने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ही नए मॉडल के डिजाइन, ट्रेनिंग और ऑप्टिमाइजेशन का काम पूरा किया गया है।
यूरेका मशीन से एआई पाइपलाइन का ऑटोमेशन
फ्लिंट के निर्माण के पीछे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट (RSI) तकनीक का हाथ है, जिसमें मौजूदा एआई मॉडल अपने अगले वर्जन को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाता है। रिकर्सिव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक रिचर्ड सोचर के अनुसार फ्लिंट को बनाने और सुधारने का लगभग हर काम एआई द्वारा ही किया गया। यूरेका मशीन ने उन जटिल आर्किटेक्चरल और ऑपरेशनल कामों को संभाला, जिनके लिए आमतौर पर सैकड़ों मानव इंजीनियर्स की आवश्यकता होती है।
यूरेका मशीन ने बेस मॉडल को ट्रेन करने के नए तरीके, विशेष न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर और सिलिकॉन चिप्स की क्षमता का पूरा लाभ उठाने वाले कोड तैयार किए। कोडिंग दक्षता जांचने वाले स्टैंडर्ड बेंचमार्क पर फ्लिंट ने समान आकार और आर्किटेक्चर वाले अन्य मॉडलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। सॉफ्टवेयर द्वारा विकास चक्रों को खुद स्वचालित करने से वर्षों में पूरा होने वाला काम कुछ ही महीनों में संपन्न हो गया।
व्यावहारिक क्षमताएं और हार्डवेयर पर प्रदर्शन
फ्लिंट मॉडल में 40 बिलियन पैरामीटर दिए गए हैं, जो इसे ट्रिलियन पैरामीटर वाले विशालकाय सर्वर-आधारित मॉडलों की तुलना में मध्यम श्रेणी में रखता है। इसके बावजूद फ्लिंट को 48 GB RAM वाले मैक जैसे सिस्टम पर स्थानीय स्तर पर कुशलता से चलाया जा सकता है।
प्रोग्रामिंग कार्यों में अक्सर मध्यम आकार के मॉडल धीमी गति या लॉजिक त्रुटियों से प्रभावित होते हैं। हालांकि, फ्लिंट कोडिंग से जुड़े कार्यों को तेज गति और सटीकता से अंजाम देता है। यह मॉडल कमांड-लाइन टू-डू लिस्ट एप्लिकेशन तैयार करने, रिकर्सिव मशीन लर्निंग से जुड़े शोध पत्र जुटाने वाले वेब स्क्रैपर विकसित करने और जटिल तकनीकी विषयों को समझाने वाली वेबसाइटों का कोड लिखने में सक्षम है। कम हार्डवेयर संसाधनों में मजबूत कोडिंग क्षमता मिलना एआई तकनीक की सुलभता को दर्शाता है।
फंडिंग, मूल्यांकन और नेतृत्व
सेल्फ-इम्प्रूविंग सिस्टम के क्षेत्र में रिकर्सिव के दृष्टिकोण को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला है। स्टार्टअप ने $4.65 बिलियन के मूल्यांकन पर $650 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड में गूगल वेंचर्स, ग्रेक्रॉफ्ट, एनवीडिया और एएमडी वेंचर्स जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे हैं।
रिकर्सिव के नेतृत्व दल में उद्योग और अकादमिक जगत का अनुभव शामिल है। रिचर्ड सोचर रिकर्सिव की स्थापना से पहले सेल्सफोर्स के चीफ साइंटिस्ट रह चुके हैं। उनके सह-संस्थापक जेफ क्लूने यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में प्रोफेसर हैं, जिनका शोध लगातार सीखने वाले एआई सिस्टम पर केंद्रित है।
सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और नियम
रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट की बढ़ती रफ्तार ने वैज्ञानिक और नीतिगत हलकों में सुरक्षा से जुड़ी बहस को तेज कर दिया है। आलोचकों का मानना है कि यदि एआई अपने कोड और तर्क प्रणाली में खुद संशोधन करने लगे, तो वह मानव नियंत्रण से बाहर हो सकता है। इसी तरह के जोखिमों को लेकर सितंबर में एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता ने इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी थी कि अनियंत्रित सेल्फ-इम्प्रूवमेंट से कुछ वर्षों में गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।
इन जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी कांग्रेस में रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक प्रस्तावित किए गए हैं। दूसरी ओर, रिकर्सिव इन आशंकाओं को काल्पनिक मानती है। सोचर का कहना है कि फ्लिंट को ऐसी सुरक्षा सीमाओं में बनाया गया है जो इसे नियंत्रण से बाहर होने से रोकती हैं। भले ही यूरेका मशीन का अंतिम लक्ष्य पूर्ण रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट हासिल करना है, लेकिन इस प्रक्रिया पर इंसानी निगरानी बनी रहेगी ताकि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में इसे रोका जा सके।
रिसर्च और भविष्य की दिशा
खुद में सुधार करने वाले एआई सॉफ्टवेयर पर केवल रिकर्सिव ही काम नहीं कर रही है। माइक्रोसॉफ्ट, कारनेगी मेलन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के शोधकर्ताओं द्वारा जारी एक अध्ययन में दिखाया गया है कि कैसे एक एआई कोडिंग एजेंट अपने सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क और मॉडल वेट्स को संशोधित करके अपनी क्षमताओं में सुधार कर सकता है।
छोटे डेवलपर दलों के लिए रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट बड़ी टेक कंपनियों के अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर का मुकाबला करने का साधन बन रहा है। सोचर के अनुसार, इस तकनीक की मदद से सीमित संसाधनों वाली टीमें भी अपनी श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले एआई टूल बना सकती हैं।



















