अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। पिछले दो दिनों के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया था, लेकिन अब खरीदार एक बार फिर हावी होते नजर आ रहे हैं। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव उछलकर 100.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो पिछले सत्र के बंद स्तर 99.47 डॉलर से 1.41 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष और तेल आपूर्ति में व्यवधान की गंभीर आशंकाएं इस तेजी को लगातार ईंधन दे रही हैं। इसके अलावा चार्ट पर बने तकनीकी ढांचे से भी तेजी के इस रुझान को मजबूत समर्थन मिल रहा है।
सऊदी अरब में ड्रोन हमला और मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट
ऊर्जा बाजार में जारी इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व से आ रही भू-राजनीतिक तनाव की खबरें हैं। हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब के ईस्टर्न प्रोविंस स्थित सऊदी अरामको के शयबाह तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में दो विदेशी नागरिकों की मृत्यु हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों पर इस तरह के प्रत्यक्ष हमलों ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति को लेकर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।
इसके साथ ही रणनीतिक मोर्चे पर भी स्थितियां नाजुक बनी हुई हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ एक संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य अभियान चलाने की योजनाएं तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोहराया है कि उनका देश किसी भी हमले का जवाब देने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत को एक और अवसर देने के लिए तैयार है। कूटनीति और सैन्य गतिरोध के इस अनिश्चित माहौल ने तेल कारोबारियों को सतर्क कर दिया है, जिससे कीमतों में उछाल बना हुआ है।
तकनीकी संकेतक और मूल्य स्तर का विश्लेषण
चार्ट विश्लेषण के दृष्टिकोण से कच्चे तेल की कीमतें 4-घंटे के चार्ट पर अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से काफी ऊपर बनी हुई हैं। हाल ही में 95.00 डॉलर के स्तर के पास से कीमतों में आई रिकवरी यह संकेत देती है कि यह पूर्व प्रतिरोध स्तर अब एक मजबूत समर्थन बिंदु में बदल चुका है। अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता को लेकर मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बावजूद अल्पकालिक तेजी का रुझान पूरी तरह बरकरार है।
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 60 के स्तर पर है, जो बाजार में सकारात्मक रुझान का संकेत देता है। इसके अतिरिक्त, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक 2.24 पर बना हुआ है, जो अपनी सिग्नल लाइन 1.62 से ऊपर है और 0.62 की बुलिश हिस्टोग्राम रीडिंग प्रस्तुत कर रहा है। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 93.02 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 83.24 डॉलर पर स्थित है, जो एक मजबूत लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड को दर्शाते हैं। यदि कीमतों में कोई गिरावट आती है तो 95.00 डॉलर और उसके बाद 100-पीरियड SMA के पास 92.76 डॉलर पर मजबूत टेक्निकल सपोर्ट मिलने की संभावना है। ऊपरी स्तरों पर पहला रेजिस्टेंस 101.62 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 102.37 डॉलर पर देखा जा रहा है।
WTI क्रूड ऑयल की मूलभूत विशेषताएं और वैश्विक भूमिका
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में से एक है। वैश्विक तेल बाजार में बेंचमार्क माने जाने वाले तीन मुख्य प्रकारों में WTI के अलावा ब्रेंट और दुबई क्रूड शामिल हैं। WTI को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसमें एपीआई ग्रेविटी कम होती है और सल्फर की मात्रा बेहद कम होती है, जिसके कारण इसे रिफाइन करना अपेक्षाकृत आसान और कम खर्चीला होता है।
यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका में उत्पादित किया जाता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से होता है। ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग को विश्व में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। वैश्विक वित्तीय मीडिया में WTI के भाव को तेल बाजार के स्वास्थ्य का प्रमुख मानक मानकर व्यापक रूप से कोट किया जाता है।
मांग-आपूर्ति के नियम, ओपेक निर्णय और अमेरिकी डॉलर का असर
अन्य संपत्तियों की तरह WTI क्रूड की कीमतें भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के सिद्धांतों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में मजबूती आने पर ईंधन की मांग बढ़ती है, जो कीमतों को ऊपर ले जाती है, जबकि आर्थिक सुस्ती मांग को घटा देती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों को तेजी से प्रभावित करते हैं।
पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) और रूस जैसे गैर-ओपेक सहयोगियों वाले संगठन ओपेक प्लस (OPEC+) के फैसले भी बाजार के लिए बेहद अहम होते हैं। 12 सदस्य देशों वाला ओपेक वर्ष में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में गिरावट आती है। इसके अतिरिक्त, चूंकि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर का भी सीधा असर पड़ता है। डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें दोनों बढ़ती हैं।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट: API और EIA के आंकड़े
अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट WTI की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है। इन्वेंट्री के आंकड़ों में बदलाव से बाजार में मांग और आपूर्ति के तात्कालिक संतुलन का पता चलता है। यदि साप्ताहिक आंकड़ों में कच्चे तेल के भंडार में कमी दिखाई देती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, इन्वेंट्री में वृद्धि आपूर्ति आधिक्य को दर्शाती है और कीमतों पर दबाव डालती है।
API अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी संस्था EIA अगले दिन यानी बुधवार को आंकड़े पेश करती है। ऐतिहासिक रूप से 75 प्रतिशत मौकों पर इन दोनों रिपोर्टों के परिणाम 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक-दूसरे से मेल खाते हैं। हालांकि, सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों की हलचल
कच्चे तेल में आई इस तेजी का प्रभाव वैश्विक मुद्रा, कमोडिटी और शेयर बाजारों पर भी देखा जा रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान अपने मासिक उच्च स्तर से फिसलकर 0.7000 के स्तर पर आ गया। मध्य पूर्व के तनाव ने जोखिम वाली संपत्तियों की मांग को प्रभावित किया है, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के अधिकारियों के सख्त बयानों से इसे निचले स्तरों पर समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) गिरकर 157.50 के स्तर के पास आ गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के चलते येन को मजबूती मिल रही है।
कीमती धातुओं के बाजार में, सोना गिरकर 4,100 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया और एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतों से मुद्रास्फीति बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की आशंकाओं ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो (ADA) 0.222 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है, जो अपने 50-दिवसीय EMA स्तर 0.228 डॉलर से नीचे बना हुआ है। अमेरिकी शेयर बाजार में डॉउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 52,800 के करीब बंद हुआ। एआई शेयर रैली के बीच डॉउ जोन्स की इस बढ़त में गोल्डमैन सेक्स (GS) और कैटरपिलर (CAT) के शेयरों का सबसे बड़ा योगदान रहा, जबकि स्पेसएक्स ने अपनी आय में 161 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।



















