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शुक्र अस्त 2026: 23 सितंबर से अस्त होंगे शुक्र देव, जानिए दांपत्य जीवन और सेहत पर क्या पड़ेगा असरराशिफल
18 सित॰ 2026, 3:06 pm (18 मिनट पहले)· 1

शुक्र अस्त 2026: 23 सितंबर से अस्त होंगे शुक्र देव, जानिए दांपत्य जीवन और सेहत पर क्या पड़ेगा असर

23 सितंबर 2026 से शुक्र ग्रह 37 दिनों के लिए अस्त होने जा रहे हैं, जिससे वैवाहिक जीवन, आपसी प्रेम संबंधों और सेहत पर असर पड़ सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनकी अवस्था में होने वाले बदलावों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी क्रम में वर्ष 2026 के सितंबर महीने के अंत में एक बड़ा ज्योतिषीय बदलाव होने जा रहा है, जब सुख, वैभव, प्रेम और दांपत्य जीवन के कारक माने जाने वाले शुक्र ग्रह अस्त हो जाएंगे। शुक्र का यह गोचर मुख्य रूप से आपसी संबंधों, वैवाहिक जीवन और भौतिक सुख-सुविधाओं को प्रभावित करने वाला माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस खगोलीय घटना की शुरुआत 23 सितंबर 2026 से होने जा रही है और यह स्थिति अक्टूबर के अंत तक बनी रहेगी। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शुक्र के अस्त होने की इस अवधि के दौरान दांपत्य जीवन के सुखों और प्रेम संबंधों में कुछ हद तक कमी या नीरसता देखने को मिल सकती है, हालांकि इसे पूरी तरह से नकारात्मक प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कालपुरुष की कुंडली में शुक्र का महत्व और प्रभाव

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शुक्र ग्रह को जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का नियंत्रक माना गया है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि कालपुरुष की कुंडली में शुक्र देव का संबंध मुख्य रूप से द्वितीय और सप्तम भाव से होता है। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, कुंडली का द्वितीय भाव व्यक्ति के परिवार, संचित धन, वाणी और घरेलू सुख-शांति का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली का सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी और दांपत्य जीवन के सभी सुखों का मुख्य कारक माना जाता है। जब इन दोनों महत्वपूर्ण भावों के स्वामी यानी शुक्र ग्रह अपनी सामान्य अवस्था से हटकर अस्त होते हैं, तो इन क्षेत्रों से जुड़े फलों में कुछ बदलाव या शिथिलता आना स्वाभाविक माना जाता है।

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यही कारण है कि ज्योतिष में जब भी शुक्र की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो पारिवारिक और वैवाहिक जीवन पर इसके पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक रूप से चर्चा की जाती है। इस अवधि में लोगों को अपने पारिवारिक और आर्थिक मामलों में थोड़ी अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता हो सकती है। बातचीत का तरीका और वाणी इस समय बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। द्वितीय भाव वाणी का भी होने के कारण, अस्त शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति की बोली में थोड़ी कड़वाहट आ सकती है, जिससे छोटे-छोटे विवाद बड़ा रूप ले सकते हैं। इसलिए संयम रखना और किसी भी बहस को बढ़ावा न देना ही इस अवधि में शांति बनाए रखने का एकमात्र उपाय है।

दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों पर अस्त शुक्र का असर

शुक्र को मुख्य रूप से प्रेम, रोमांस और आपसी आकर्षण का नैसर्गिक कारक माना जाता है। ऐसे में जब शुक्र अस्त अवस्था में प्रवेश करेंगे, तो इसका सीधा असर लोगों के निजी संबंधों और दांपत्य जीवन पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के अस्त होने के दौरान पति-पत्नी के बीच आपसी सहजता और तालमेल में कुछ कमी आ सकती है। वैवाहिक संबंधों में सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा खिंचाव या भावनात्मक दूरी महसूस हो सकती है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस 37 दिनों की अवधि में दांपत्य सुख से जुड़े मामलों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।

प्रेम संबंधों में भी इसका असर दिखाई दे सकता है, जहां पार्टनर के साथ पहले जैसी गर्मजोशी या भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल भी अर्थ नहीं है कि हर एक रिश्ता इस दौर में बिखर जाएगा या हर कपल को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान आपसी रिश्तों में समझदारी दिखाना, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना और खुले तौर पर संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके।

शारीरिक स्वास्थ्य और आकर्षण पर पड़ने वाला प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह का संबंध केवल मानसिक या भावनात्मक जुड़ाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें शारीरिक आकर्षण, सौंदर्य, दांपत्य सुख और मानव शरीर में प्रजनन क्षमता का भी कारक माना गया है। जब शुक्र का तेज कम होता है या वे अस्त होते हैं, तो इन भौतिक और शारीरिक पक्षों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शुक्र के अस्त होने की इस विशेष अवधि में लोगों को कुछ शारीरिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से हार्मोनल संतुलन से जुड़ी परेशानियां इस दौरान सामने आ सकती हैं। इसके अलावा, लोगों के भीतर शारीरिक ऊर्जा और आपसी आकर्षण में भी अस्थाई रूप से कुछ कमी महसूस हो सकती है।

सौंदर्य और आकर्षण के कारक होने के कारण, इस दौरान त्वचा से संबंधित समस्याओं या फिर आत्मविश्वास में थोड़ी कमी का अनुभव भी हो सकता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी दिक्कतों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। नियमित योग, प्राणायाम और संतुलित खान-पान के जरिए इस गोचरीय प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए इस दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना और जीवनशैली को संतुलित बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।

शुक्र अस्त और उदय की महत्वपूर्ण तिथियां

इस ज्योतिषीय घटनाक्रम के समय और अवधि की बात करें तो गणनाओं के अनुसार शुक्र ग्रह 23 सितंबर 2026 से अपनी अस्त अवस्था में चले जाएंगे। इसके बाद वह लगभग 37 दिनों तक इसी स्थिति में रहने वाले हैं। इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को शुक्र का दोबारा उदय होगा, जिसके बाद उनकी सामान्य शक्तियां और शुभ प्रभाव फिर से बहाल हो जाएंगे। इस 37 दिनों की पूरी अवधि को ज्योतिष की दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जा रहा है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो विवाह या प्रेम संबंधों में किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। शुभ कार्यों जैसे मुंडन, गृह प्रवेश या विवाह आदि के संदर्भ में भी शुक्र के अस्त होने की अवधि को टालने योग्य माना जाता है क्योंकि शुक्र के अस्त रहने के दौरान इन शुभ कार्यों के लिए आवश्यक मांगलिक ऊर्जा में कमी आ जाती है। 30 अक्टूबर 2026 को जब शुक्र का उदय होगा, तभी से पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। तब तक धैर्य बनाए रखना और रिश्तों में विश्वास को मजबूत करना ही सबसे उत्तम मार्ग है।

हालांकि, ज्योतिषविदों का यह भी मानना है कि शुक्र के अस्त होने का फल सभी मनुष्यों के लिए एक समान रूप से नकारात्मक या सकारात्मक नहीं होता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन पर इसका वास्तविक असर उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में शुक्र की स्थिति, उसकी महादशा, अंतर्दशा और अन्य ग्रहों के साथ उसके गोचरीय संबंधों पर निर्भर करता है। यदि किसी की कुंडली में शुक्र अत्यंत मजबूत स्थिति में हैं, तो उनके लिए यह समय बिना किसी बड़े व्यवधान के आसानी से बीत सकता है।

सवाल-जवाब

शुक्र कब अस्त होने जा रहे हैं?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्र ग्रह 23 सितंबर 2026 से अस्त होने जा रहे हैं।
शुक्र कितने दिनों तक अस्त रहेंगे?
शुक्र लगभग 37 दिनों तक अस्त रहेंगे और 30 अक्टूबर 2026 को दोबारा उदय होंगे।
शुक्र के अस्त होने का संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
इस अवधि के दौरान दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में सहजता की कमी आ सकती है और भावनात्मक जुड़ाव में कुछ कमी महसूस हो सकती है।
इस गोचर काल में किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
इस दौरान लोगों को मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन या शारीरिक ऊर्जा में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
क्या शुक्र अस्त होने का असर सभी लोगों पर एक जैसा होता है?
नहीं, इसका प्रभाव सभी के लिए एक जैसा नहीं होता। यह व्यक्ति की अपनी जन्मकुंडली में शुक्र की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है।
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