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चार राज्यों का सफर आधा करने आ रहा अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे, दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीदभारत
18 सित॰ 2026, 2:37 pm (24 मिनट पहले)· 2

चार राज्यों का सफर आधा करने आ रहा अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे, दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद

लगभग 1316 किलोमीटर लंबा अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पंजाब और गुजरात के बीच के सफर को 26 घंटे से घटाकर सिर्फ 13 घंटे कर देगा। करीब 80,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह छह लेन की परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू हो सकती है।

भारत में बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को एक नई दिशा मिल रही है। देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए अत्याधुनिक सड़कों और राजमार्गों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे न केवल आम लोगों का सफर आसान हो रहा है बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिल रही है। इसी कड़ी में एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम चल रहा है, जिसका नाम अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे है। लगभग 1316 किलोमीटर लंबा यह विशाल एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर भारत से पश्चिमी भारत के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा। वर्तमान में अमृतसर से जामनगर की यात्रा तय करने में लोगों को लगभग 26 घंटे का लंबा समय लग जाता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद यह सफर आधा रह जाएगा। यानी अब पंजाब से गुजरात की लंबी दूरी को सिर्फ 13 घंटे के भीतर पूरा किया जा सकेगा। यह आर्थिक गलियारा देश के चार महत्वपूर्ण राज्यों को आपस में जोड़ने का काम करेगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

दूरी और समय में भारी कटौती: पुराना बनाम नया मार्ग

पुराने और पारंपरिक रास्तों की बात करें तो वर्तमान में अमृतसर से जामनगर के बीच की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 1430 किलोमीटर है। इस पुराने रूट पर यातायात का भारी दबाव रहता है और कई हिस्सों में केवल दो लेन की सड़कें होने के कारण वाहनों की गति काफी धीमी हो जाती है। भारी वाहनों की भीड़ और सड़कों की चौड़ाई कम होने के चलते इस सफर में अक्सर 26 घंटे या उससे भी अधिक का समय लग जाता है। इसके विपरीत, निर्माणाधीन अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का मार्ग काफी सीधा और सुगम है, जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर केवल 1316 किलोमीटर रह जाएगी। छह लेन वाले इस शानदार ग्रीनफील्ड आर्थिक गलियारे का निर्माण बेहद आधुनिक तकनीक से किया जा रहा है। इस मार्ग पर चलने वाले वाहनों को बेहतर कनेक्टिविटी और बिना किसी बाधा के चलने का अवसर मिलेगा, जिससे यात्रा का कुल समय घटकर लगभग 13 घंटे रह जाने का अनुमान है। यह कॉरिडोर पंजाब के कपूरथला जिले के टिब्बा गांव से शुरू होगा और गुजरात के जामनगर में स्थित रिफाइनरी परिसर तक जाएगा।

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चार राज्यों के इन प्रमुख शहरों को मिलेगा सीधा लाभ

यह 1316 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से चार राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के कई बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे आपस में जोड़ेगा। पंजाब में यह कॉरिडोर अमृतसर, कपूरथला, मोगा, फरीदकोट और भठिंडा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुजरेगा, जिससे इन क्षेत्रों के किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा होगा। हरियाणा में इस मार्ग का लाभ मंडी डबवाली और चौटाला क्षेत्र को मिलने वाला है, जिससे इन कृषि प्रधान क्षेत्रों को नए बाजार मिलेंगे। राजस्थान में यह एक्सप्रेसवे हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जालोर जैसे बड़े जिलों और रेगिस्तानी इलाकों को कवर करेगा, जिससे राज्य के भीतर और बाहर कनेक्टिविटी काफी मजबूत होगी। गुजरात में प्रवेश करने के बाद यह कॉरिडोर संतलपुर, राधनपुर, सामख्याली, मालिया और अंत में जामनगर तक पहुंचेगा। इस तरह यह एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों, औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच एक सीधा और तीव्र संपर्क मार्ग तैयार कर रहा है।

राजस्थान में बिछा सबसे बड़ा नेटवर्क और काम की मौजूदा स्थिति

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा राजस्थान राज्य से होकर गुजर रहा है। अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का लगभग 637 किलोमीटर लंबा हिस्सा अकेले राजस्थान में आता है, जो इसके कुल मार्ग का लगभग आधा है। राजस्थान में इस परियोजना पर काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ा है और ताजा जानकारी के अनुसार, हनुमानगढ़ से लेकर जालोर तक के हिस्से को पूरी तरह से यातायात के लिए खोल दिया गया है। इससे राजस्थान के भीतर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों को अभी से काफी सुविधा मिलने लगी है। फिलहाल पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट का लगभग 85 से 90 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। शेष भागों में तेजी से काम चलाया जा रहा है ताकि परियोजना को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे के उन हिस्सों में जहां अभी काम अधूरा है, वहां फिनिशिंग और पैचवर्क का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। विशेष रूप से पंजाब और गुजरात के बचे हुए हिस्सों में ठेकेदारों और इंजीनियरों की टीमें दिन-रात काम में जुटी हुई हैं। इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से जनता के लिए खोलने की आधिकारिक समयसीमा दिसंबर 2026 तय की गई है। हालांकि, कॉरिडोर का पूरी तरह चालू होना मौसम की स्थितियों, सामग्री की उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली स्वीकृतियों की प्रगति पर निर्भर करेगा। एक बार जब यह पूरा कॉरिडोर चालू हो जाएगा, तो उत्तर और पश्चिम भारत के बीच सड़क परिवहन का एक बिल्कुल नया और बेहद आधुनिक विकल्प देशवासियों के सामने होगा, जिससे यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

व्यापार और माल ढुलाई को मिलेगी नई रफ्तार

इस मेगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का सबसे अधिक लाभ देश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। भारतमाला परियोजना के तहत लगभग 80,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहा यह छह लेन का एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों की सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि यह देश के व्यापारिक परिदृश्य को बदलने वाला साबित होगा। पंजाब का मजबूत कृषि क्षेत्र इस मार्ग के जरिए गुजरात के व्यस्त बंदरगाहों और बड़े औद्योगिक केंद्रों से बेहद कम समय में जुड़ जाएगा। इससे पंजाब के अनाज, फल और सब्जियों को बहुत तेजी से पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, हरियाणा और राजस्थान के औद्योगिक व कृषि क्षेत्रों को भी इस गलियारे से सीधी और सुगम सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे माल ढुलाई में लगने वाला समय और ईंधन की खपत दोनों में भारी कमी आएगी, जो देश के आर्थिक विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद करेगी।

सवाल-जवाब

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 1316 किलोमीटर है।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से पंजाब और गुजरात के बीच यात्रा समय में कितनी कमी आएगी?
दोनों राज्यों के बीच लगने वाला यात्रा समय घटकर लगभग आधा रह जाएगा, जो करीब 26 घंटे से कम होकर केवल 13 घंटे हो जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे किन चार राज्यों को जोड़ेगा?
यह सीधे तौर पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को आपस में जोड़ेगा।
इस विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना की अनुमानित लागत क्या है?
इस एक्सप्रेसवे परियोजना का निर्माण लगभग 80,000 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।
पूरे एक्सप्रेसवे को चालू करने का लक्ष्य कब तक रखा गया है?
पूरे अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे को दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से चालू करने की तैयारी है।
इस कॉरिडोर का सबसे लंबा हिस्सा किस राज्य में स्थित है?
इस कॉरिडोर का सबसे लंबा हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 637 किलोमीटर है।
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