उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल मथुरा के वृंदावन में स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। इस भव्य मंदिर में हर रोज लाखों भक्त अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा और दान अर्पित करते हैं। लेकिन इसी भीड़ में पंजाब का रहने वाला एक ऐसा अनोखा भक्त भी शामिल है, जिसने भगवान को ही अपना बिजनेस पार्टनर (व्यापारिक साझेदार) बना लिया है। यह श्रद्धालु किसी अन्य इंसान पर भरोसा करने के बजाय सीधे ठाकुर बांके बिहारी जी के साथ ही अपना कारोबार चलाता है। हर साल वह अपने व्यापार में होने वाले मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा पूरी ईमानदारी के साथ वृंदावन आकर मंदिर में अर्पित कर देता है।
इंसानों के बजाय ठाकुर जी को बनाया अपना साझेदार
इस अनोखे गठबंधन के पीछे गहरी आस्था और विश्वास की एक दिलचस्प कहानी छिपी हुई है। मंदिर के सेवायत पुजारी पहलाद बल्लभ गोस्वामी ने इस श्रद्धालु के बारे में बेहद रोचक जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि इस भक्त को दुनिया के किसी भी अन्य व्यक्ति या बिजनेस पार्टनर पर विश्वास नहीं था। लगातार मिल रहे धोखे या अविश्वास के माहौल के बीच उसने सीधे ठाकुर जी के चरणों में अपनी अरदास लगाई। उसने भगवान को ही अपने व्यवसाय में हिस्सेदार बनाने का संकल्प लिया। इसके बाद जैसे-जैसे समय बीतता गया, उस श्रद्धालु के सभी बिगड़े काम अपने आप बनते चले गए। उसका कारोबार लगातार तरक्की की राह पर बढ़ता गया और मुनाफे में भारी बढ़ोतरी होने लगी। जैसे-जैसे व्यापार में लाभ बढ़ता गया, वैसे-वैसे वह पूरी सच्चाई से अपने मुनाफे का एक तय हिस्सा भगवान बांके बिहारी को समर्पित करने लगा।
ढाई करोड़ रुपये का दान और हर साल दस फीसदी की बढ़ोतरी
यह श्रद्धालु हर साल अपने वादे के मुताबिक वृंदावन पहुंचता है और अपने आराध्य देव को उनके हिस्से का मुनाफा सौंप देता है। पुजारी पहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, पिछले साल इस श्रद्धालु ने बांके बिहारी जी को अपने बिजनेस के मुनाफे के हिस्से के रूप में लगभग 2.50 करोड़ (ढाई करोड़) रुपये की भारी-भरकम राशि भेंट की थी। इस साझेदारी की एक और बेहद खास बात यह है कि वह हर साल इस हिस्सेदारी में 10% (दस प्रतिशत) की बढ़ोतरी करता है। यानी हर बीतते साल के साथ भगवान का हिस्सा दस फीसदी बढ़ा दिया जाता है। इस तरह वह न केवल अपने व्यापारिक मुनाफे की गणना पूरी ईमानदारी से करता है, बल्कि भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता भी हर वर्ष बढ़ाकर प्रकट करता है।
सेवा, भोग-प्रसाद और पुजारी को भी बराबर सम्मान
अपनी वृंदावन यात्रा के दौरान यह श्रद्धालु मंदिर में विशेष सेवा का आयोजन भी करता है। जिस दिन वह वृंदावन के पावन धाम में उपस्थित रहता है, उस पूरे दिन की मंदिर की सेवा का पूरा खर्च उसी के द्वारा उठाया जाता है। ठाकुर बांके बिहारी जी के लिए तैयार होने वाला विशेष भोग, श्रद्धालुओं में बांटा जाने वाला प्रसाद और भगवान के लिए नए वस्त्रों की पूरी व्यवस्था वही करता है। इसके अलावा, वह जितनी राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित करता है, उतनी ही राशि वह बांके बिहारी जी की सेवा और पूजा-अर्चना करने वाले गोस्वामी (पुजारी) को भी आदरपूर्वक भेंट करता है। पुजारी पहलाद बल्लभ गोस्वामी का कहना है कि जो भी भक्त स्वयं बांके बिहारी जी को अपना बिजनेस पार्टनर बना लेता है और उनके साथ पूरी सच्चाई से व्यापार करता है, उसका इस दुनिया में कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसकी प्रगति और सुरक्षा स्वयं भगवान सुनिश्चित करते हैं।

















