छत्तीसगढ़ में बीएच सीरीज यानी भारत सीरीज नंबर वाली गाड़ियों को बेचना अब पहले जितना मुश्किल नहीं रहेगा। राज्य की बीजेपी सरकार इस नंबर सीरीज से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है, जिससे आम लोग भी ऐसी पुरानी गाड़ियां खरीद सकेंगे जो अभी तक सिर्फ चुनिंदा लोगों के नाम पर ही ट्रांसफर हो पाती थीं।
आखिर दिक्कत क्या थी?
बीएच सीरीज नंबर हर किसी को नहीं मिलता। यह सिर्फ उन्हीं लोगों को जारी किया जाता है जिनकी नौकरी ऐसे दफ्तरों या संस्थानों में है, जिनकी शाखाएं कम से कम 4 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद हैं। दिक्कत तब शुरू होती है जब बीएच नंबर वाली गाड़ी का मालिक उसे बेचना चाहता है। चूंकि हर खरीदार इस नंबर सीरीज के लिए पात्र नहीं होता, इसलिए ऐसी गाड़ियों को खरीदार मिलना मुश्किल हो जाता था। नतीजा यह होता कि गाड़ी का मालिकाना हक कागजों पर बदल ही नहीं पाता था और लोग सिर्फ आपसी समझौते व एग्रीमेंट के सहारे गाड़ी आगे बेचते रहते थे, बिना नाम ट्रांसफर के।
नए नियम में क्या राहत मिलेगी?
छत्तीसगढ़ में लगातार आ रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने तय किया है कि नियमों में ढील दी जाए। नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम ग्राहक भी बीएच सीरीज की पुरानी गाड़ी खरीद सकेंगे। हालांकि इसके लिए एक शर्त रहेगी, खरीदार को गाड़ी पर बकाया टैक्स खुद अपनी जेब से जमा कराना होगा। साथ ही ऐसे खरीदारों को बीएच नंबर की जगह सीजी सीरीज यानी छत्तीसगढ़ सीरीज का नंबर अलॉट किया जाएगा। इन नए नियमों की अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।
राज्य के कई जिलों में सालों से अटकी हैं गाड़ियां
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में स्थिति यह है कि बीएच सीरीज की गाड़ियों की ऑनरशिप कई साल से बदली ही नहीं है। नाम ट्रांसफर न हो पाने की वजह से ये गाड़ियां आधिकारिक रूप से बिक नहीं पा रहीं और खरीद-बिक्री सिर्फ आपसी समझौतों के दम पर चल रही है। परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा और बस्तर संभाग से पिछले 2 साल में बीएच सीरीज की किसी भी गाड़ी के ट्रांसफर के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या कितनी गंभीर हो चुकी थी और नियमों में बदलाव की जरूरत कितनी अहम थी।
निजी कंपनी के कर्मचारियों के लिए भी थी शर्त
निजी कंपनियों में काम करने वाले जिन कर्मचारियों को बीएच सीरीज का नंबर चाहिए होता है, उन्हें कंपनी की ओर से एक प्रमाणपत्र यानी फॉर्म-60 देना पड़ता है। यही वजह है कि आम खरीदार अब तक बीएच सीरीज का लाभ नहीं उठा पा रहे थे, क्योंकि यह पात्रता सिर्फ खास तरह की नौकरी करने वालों तक सीमित थी।
बीएच सीरीज के फायदे भी कम नहीं
जिन लोगों को यह नंबर मिलता है, उनके लिए इसके कई फायदे भी हैं। इसमें रोड टैक्स एक साथ नहीं देना पड़ता, बल्कि इसे 2-2 साल की किस्तों में जमा किया जा सकता है। अगर वाहन मालिक का तबादला किसी दूसरे राज्य में हो जाए तो उसे वहां दोबारा वाहन रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में एनओसी लेने का झंझट भी काफी हद तक कम हो जाता है।










