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डीजल को टक्कर: 20 रुपये के ईंधन से दौड़ेंगे बस-ट्रक, नितिन गडकरी ने साझा की नई योजनाऑटो
11 जुल॰ 2026, 2:10 am (45 दिन पहले)· 5

डीजल को टक्कर: 20 रुपये के ईंधन से दौड़ेंगे बस-ट्रक, नितिन गडकरी ने साझा की नई योजना

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने डीजल के सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में मेथेनॉल को बढ़ावा देने की योजना साझा की है। यह ईंधन परिवहन क्षेत्र में खर्च को काफी कम कर सकता है और प्रदूषण में भी भारी कटौती लाएगा।

भारत अब डीजल और पेट्रोल पर अपनी निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में परिवहन क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी विकल्प के तौर पर मेथेनॉल का सुझाव दिया है। इस ईंधन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी किफ़ायती कीमत है, जो लगभग 20 से 22 रुपये प्रति लीटर पड़ती है। देश के कई राज्यों में डीजल की मौजूदा कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार है, ऐसे में मेथेनॉल का इस्तेमाल परिवहन लागत को नाटकीय रूप से कम कर सकता है।

मेथेनॉल की उत्पादन क्षमता और भविष्य

नितिन गडकरी के अनुसार, देश के भीतर ही मेथेनॉल के उत्पादन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में असम पेट्रो-केमिकल्स प्रतिदिन करीब 700 टन मेथेनॉल का निर्माण कर रही है। यदि बड़े पैमाने पर इस ईंधन को अपनाया जाता है, तो ट्रक और बस ऑपरेटरों को सबसे अधिक लाभ होगा। यह ईंधन न केवल ट्रकों और बसों के लिए उपयुक्त है, बल्कि इसे जहाजों और भारी औद्योगिक मशीनों में भी ऊर्जा का एक मुख्य स्रोत बनाया जा सकता है।

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सफल परीक्षण और तकनीक

मेथेनॉल को लेकर किए जा रहे दावे केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि इसका जमीनी स्तर पर सफल परीक्षण भी किया गया है। कर्नाटक में बसों को 15 फीसदी मेथेनॉल-डीजल मिश्रण के साथ लगातार तीन महीने तक सफलतापूर्वक संचालित किया गया। इन परीक्षणों के दौरान इंजनों में कोई भी तकनीकी खराबी देखने को नहीं मिली और वाहनों की कार्यक्षमता भी पूरी तरह संतोषजनक रही। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए Ashok Leyland जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने अब 100 फीसदी मेथेनॉल पर चलने वाले इंजन भी विकसित कर लिए हैं।

इथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल का प्रभाव

नितिन गडकरी ने आगे बताया कि मेथेनॉल के अलावा अन्य विकल्प भी कतार में हैं। आइसो-ब्यूटानॉल, जो इथेनॉल से तैयार किया जाता है, डीजल के एक सशक्त विकल्प के रूप में उभर रहा है। किर्लोस्कर ग्रुप ने पहले ही ऐसे जनरेटर सेट तैयार कर लिए हैं जो पूरी तरह से इथेनॉल या आइसो-ब्यूटानॉल पर काम करते हैं। इन तकनीकों का उपयोग भविष्य में कृषि क्षेत्र के ट्रैक्टरों, हार्वेस्टर मशीनों और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी में किया जा सकेगा।

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लाभ

सरकार की योजना पूर्वोत्तर राज्यों में बांस रिफाइनरियों के माध्यम से मेथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने की है। इस पहल के तीन बड़े दूरगामी परिणाम होंगे। सबसे पहले, यह किसानों के लिए बांस और अन्य कृषि उत्पादों से कमाई का नया जरिया बनेगा। दूसरा, इससे भारत के भारी-भरकम फॉसिल फ्यूल आयात बिल में बड़ी कमी आएगी। तीसरा, मेथेनॉल, इथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल जैसे ईंधन पर्यावरण के लिए डीजल से काफी बेहतर हैं क्योंकि इनसे प्रदूषण बहुत कम होता है। सरकार का लक्ष्य सड़क के साथ-साथ जल परिवहन को भी इन स्वच्छ ईंधनों से जोड़ना है, जिससे देश को ऊर्जा सुरक्षा और क्लीनर एनर्जी का दोहरा लाभ मिल सके।

सवाल-जवाब

मेथेनॉल की कीमत क्या है?
मेथेनॉल की कीमत लगभग 20 से 22 रुपये प्रति लीटर है।
मेथेनॉल का उपयोग किन वाहनों में किया जा सकता है?
इसका उपयोग बसों, ट्रकों, ट्रैक्टरों, जहाजों और भारी निर्माण मशीनों में किया जा सकता है।
क्या मेथेनॉल के इंजन का परीक्षण सफल रहा है?
हाँ, कर्नाटक में 15 प्रतिशत मेथेनॉल-डीजल मिश्रण के साथ बसों का तीन महीने का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है।
कौन सी कंपनी 100% मेथेनॉल इंजन बना रही है?
Ashok Leyland ने 100 प्रतिशत मेथेनॉल पर चलने वाले इंजन तैयार कर लिए हैं।
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