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सेना की स्कॉर्पियो के पीछे लगी गोल लाइट्स का राज, रात के अंधेरे में यही बचाती है काफिले को दुश्मन की नजर सेऑटो
31 जुल॰ 2026, 3:05 pm (46 दिन पहले)· 1

सेना की स्कॉर्पियो के पीछे लगी गोल लाइट्स का राज, रात के अंधेरे में यही बचाती है काफिले को दुश्मन की नजर से

भारतीय सेना की महिंद्रा स्कॉर्पियो के पीछे लगे चार गोल प्लग असल में ब्लैकआउट या कैट-आई लाइट्स हैं, जो रात में काफिले को दुश्मन की नजरों से छिपाकर सुरक्षित आगे बढ़ाने के काम आती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक इंस्टाग्राम रील ने भारतीय सेना की महिंद्रा स्कॉर्पियो गाड़ियों के पीछे लगे चार गोल प्लग जैसे हिस्सों को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है। रील में साफ दिखाया गया है कि सेना की स्कॉर्पियो के पिछले हिस्से पर चार छोटे गोल एक्सेसरीज लगी होती हैं, जिन्हें देखकर यूजर्स तरह तरह के अंदाजे लगाने लगे। किसी ने इन्हें गुप्त हथियार बताया तो किसी ने स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर या स्पेशल टॉर्च समझ लिया। असल जवाब इन सारे अनुमानों से कहीं ज्यादा दिलचस्प और व्यावहारिक है।

दरअसल ये हैं ब्लैकआउट लाइट्स

ये गोल हिस्से न तो कोई हथियार हैं और न ही कोई एडवांस गैजेट। इन्हें ब्लैकआउट लाइट्स या कॉन्वॉय लाइट्स कहा जाता है, और सैनिक भाषा में इन्हें कैट-आई लाइट्स के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय सेना अपनी गाड़ियों में इन लाइट्स को खासतौर पर रात के अंधेरे में चलने वाले काफिलों और टैक्टिकल ऑपरेशन के लिए लगवाती है। नाम से ही जाहिर है कि इनका मकसद रोशनी फैलाना नहीं, बल्कि गाड़ी की मौजूदगी को छिपाए रखना है।

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रात में हेडलाइट क्यों बुझा दी जाती हैं

जब सैन्य काफिला रात के समय किसी संवेदनशील इलाके से गुजरता है, तो गाड़ियों की सामान्य हेडलाइट्स और टेललाइट्स पूरी तरह बंद कर दी जाती हैं। इसके पीछे वजह सीधी है, दुश्मन को गाड़ियों की सही लोकेशन का अंदाजा न लग सके। ऐसे हालात में यही डिम और लो-इंटेंसिटी ब्लैकआउट लाइट्स काम आती हैं। पीछे चल रही गाड़ी का ड्राइवर इन धुंधली लाइट्स के सहारे ही आगे चल रही गाड़ी की दूरी और दिशा भांप लेता है, जबकि दूर खड़े किसी शख्स, ड्रोन या हवा में उड़ते एयरक्राफ्ट को ये रोशनी लगभग नजर ही नहीं आती। यही खूबी इन्हें बाकी लाइट्स से अलग और सैन्य नजरिए से बेहद अहम बनाती है।

आर्मी एडिशन स्कॉर्पियो में और क्या बदला होता है

महिंद्रा स्कॉर्पियो के सेना वाले वर्जन में ब्लैकआउट लाइट्स सिर्फ पीछे नहीं, बल्कि गाड़ी के आगे के हिस्से में भी लगाई जाती हैं। इसके अलावा भी इस गाड़ी में कई खास फेरबदल किए जाते हैं, जो इसे आम बाजार वाली स्कॉर्पियो से अलग बनाते हैं। इनमें सामान्य से ज्यादा ग्राउंड क्लियरेंस, मजबूत टो हुक, फोर बाय फोर सिस्टम और केबिन के भीतर नक्शा पढ़ने के लिए अलग से लगाया गया रीडिंग लैंप शामिल है। इतना ही नहीं, इन ब्लैकआउट लाइट्स को ऑन ऑफ करने के लिए डैशबोर्ड पर एक अलग रोटरी स्विच भी दिया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर ड्राइवर इन्हें तुरंत नियंत्रित कर सके।

यूजर्स के अलग अलग कयास

वायरल रील पर कमेंट सेक्शन में लोगों ने इन गोल हिस्सों को लेकर कई तरह की थ्योरी दीं। कुछ यूजर्स को यह सेंसर लगे, तो कुछ ने इसे गन माउंट तक बता दिया। लेकिन ऑफिशियल जानकारी और ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स की राय एक जैसी है, यह पूरी तरह से डिफेंसिव और स्टेल्थ फीचर है, जिसका इस्तेमाल दुश्मन की नजरों से बचते हुए काफिले को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है।

छोटा सा प्लग, बड़ी सैन्य रणनीति

आम नागरिक अक्सर सेना की गाड़ियों में लगे ऐसे छोटे छोटे लेकिन बेहद अहम फीचर्स पर ध्यान ही नहीं देते। यह वायरल रील दिखाती है कि एक मामूली सी दिखने वाली एक्सेसरी के पीछे भी पूरी सैन्य रणनीति और सालों का अनुभव छिपा हो सकता है। अगली बार सड़क पर कोई आर्मी स्कॉर्पियो दिखे और उसके पीछे ये गोल हिस्से नजर आएं, तो समझ जाइएगा कि रात के घने अंधेरे में भी भारतीय सेना कितनी सूझबूझ के साथ अपने काफिलों को सुरक्षित रखती है।

सवाल-जवाब

भारतीय सेना की स्कॉर्पियो के पीछे लगे गोल प्लग असल में क्या हैं?
ये ब्लैकआउट लाइट्स हैं, जिन्हें कॉन्वॉय लाइट्स या कैट-आई लाइट्स भी कहा जाता है।
इन लाइट्स का इस्तेमाल कब किया जाता है?
रात के समय चलने वाले सैन्य काफिलों और टैक्टिकल ऑपरेशन के दौरान, जब सामान्य हेडलाइट्स और टेललाइट्स बंद रखी जाती हैं।
रात में हेडलाइट्स बंद क्यों की जाती हैं?
ताकि दुश्मन को गाड़ियों की सही लोकेशन का अंदाजा न लग सके।
क्या ये लाइट्स दूर से या ड्रोन से दिखाई देती हैं?
नहीं, ये इतनी डिम और लो-इंटेंसिटी होती हैं कि दूर से, ऊपर से या ड्रोन और एयरक्राफ्ट से लगभग नजर नहीं आतीं।
आर्मी एडिशन स्कॉर्पियो में और क्या खास बदलाव होते हैं?
इसमें ज्यादा ग्राउंड क्लियरेंस, मजबूत टो हुक, फोर बाय फोर सिस्टम और मैप पढ़ने के लिए खास रीडिंग लैंप जैसे बदलाव होते हैं।
ब्लैकआउट लाइट्स को कंट्रोल कैसे किया जाता है?
डैशबोर्ड पर लगे एक अलग रोटरी स्विच से इन्हें ऑन या ऑफ किया जाता है।
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