लोक आस्था के महापर्व छठ की बात हो और संगीत का जिक्र न आए, ऐसा हो नहीं सकता है। इस पावन अवसर पर गूंजने वाले पारंपरिक गीतों में गायिका शारदा सिन्हा का गाया हुआ लोकप्रिय गीत पहिले पहिल छठी मैया हर किसी की जुबान पर रहता है। भोजपुरी संस्कृति और बिहार के लोगों की अटूट भावनाएं इस गीत से गहराई से जुड़ी हुई हैं। इसके बिना छठ महोत्सव का उल्लास अधूरा सा प्रतीत होता है। हाल ही में यह धुन मनोरंजन जगत में एक बार फिर तब चर्चा का केंद्र बन गई जब इसे आगामी सिनेमाई प्रोजेक्ट में स्थान मिला।
फिल्म द वन और छठ गीत का खास कनेक्शन
अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म द वन इन दिनों काफी सुर्खियों में बनी हुई है। इस मूवी की पटकथा और कथानक का सीधा संबंध छठ गीतों तथा वन देवी मंदिर की पृष्ठभूमि से जोड़ा गया है। इसी सिलसिले में फिल्म निर्माताओं ने इस प्रसिद्ध लोकगीत को अपनी कहानी का हिस्सा बनाया है। जब पर्दे पर इस गाने की गूंज सुनाई देती है, तो दर्शक भावुक हो जाते हैं। फिल्म में इस गीत को शामिल करने के पीछे दिवंगत लोकगायिका को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी मुख्य उद्देश्य रहा है।
गीत के विभिन्न मुखड़ों का भावार्थ और अर्थ
इस लोकप्रिय रचना के हर एक बोल में व्रत रखने वाली माताओं और बहनों की सच्ची भावनाएं झलकती हैं। गीत के पहले हिस्से का भाव यह है कि हे छठी मईया, आज मैंने पूरी निष्ठा के साथ यह उपवास पहली बार शुरू किया है। इस दौरान अनजाने में मुझसे पूजा-पाठ में कोई भूल या गलती हो गई हो तो उसे अपनी क्षमा का पात्र समझें। इसके अगले चरण में यह प्रार्थना की जाती है कि हे मैया, आपने मेरी गोद में जो संतान दी है उसे अपनी ममता और दुलार से सींचें। पति का स्नेह हमेशा बना रहे और घर-परिवार में सुख-शांति व समृद्धि का स्थायी वास रहे।
नदी घाट की सजावट और कुल परिवार की उन्नति
इस सुंदर रचना के आगे के अंश में नदी के खूबसूरत घाट का सजीव वर्णन किया गया है। जलस्त्रोत के तट पर नारियल और केले के झुंडों से घाट को बेहद करीने से सजाया जाता है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि हे छठी मईया, हमारी अरज सुनें और हमारे कुल व परिवार को लगातार आगे बढ़ाएं। इसके अलावा यह भी भाव व्यक्त किया जाता है कि हे मैया, आपकी अपार कृपा और भक्ति के प्रभाव से ही हमने इस घाट को इतने मनमोहक ढंग से संवारा है। हमारा यह अर्घ्य स्वीकार करें और हमें अपनी आशीर्वाद रूपी असीम अनुकंपा प्रदान करें।
महान गायिका शारदा सिन्हा और उनकी यादें
इस अमर गीत को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाली लीजेंड्री और दिवंगत गायिका शारदा सिन्हा थीं, जिनका लोक संगीत जगत में अद्वितीय योगदान रहा है। उन्होंने वर्ष 2016 में इस गीत को रिकॉर्ड किया था जो आज हर घर की पहचान बन चुका है। फिल्म द वन में इस प्रसिद्ध ट्रैक को रखकर उस महान कलाकार को याद किया गया है। आज के समय में हिंदी पट्टी के दर्शकों के बीच भी यह गीत काफी पसंद किया जाने लगा है, जिससे भोजपुरी संगीत का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।



















