बिहार में खरीफ सीजन के दौरान धान की रोपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि कुछ इलाकों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। हालांकि इस साल मानसून की कम बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्षा कम होने के कारण किसानों को अपनी फसलों की रोपाई से लेकर उन्हें बचाए रखने के लिए बार-बार सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में खेतों की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि पानी की कमी से मिट्टी सूखकर फटने लगी है और जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में फसल की उपज सुनिश्चित करने के लिए सही समय और सही तरीके से सिंचाई करना बेहद जरूरी हो गया है।
कम पानी के बीच 2 एकड़ में खेती कर रहे किसान का अनुभव
बिहार के जहानाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले घोसी प्रखंड स्थित कोल्हापर गांव के रहने वाले संजय कुमार पिछले 20 वर्षों से पारंपरिक खेती से जुड़े हुए हैं। वे धान की खेती के साथ-साथ सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। इस चालू खरीफ सीजन में उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर धान की बुआई की है। अपने लंबे कृषि अनुभव के आधार पर संजय कुमार बताते हैं कि इस बार जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे जमीन में नमी बहुत तेजी से समाप्त हो रही है। इस वजह से किसानों को खेत में बार-बार पटवन करना पड़ रहा है, ताकि धान के पौधे सूखे की चपेट में आकर नष्ट न हों।
खेत को लबालब भरने की गलती से हो सकता है भारी नुकसान
अक्सर जलस्तर घटने और बारिश न होने पर किसान घबराकर खेतों में आवश्यकता से अधिक पानी भर देते हैं। संजय कुमार चेतावनी देते हैं कि खेत को लबालब पानी से भर देना फसल के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक साबित होता है। जब खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहता है, तो धान के पौधों की जड़ें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। जड़ों की पकड़ ढीली होने के कारण जब हवा चलती है, तो धान की फसल खेतों में गिर जाती है। एक बार फसल गिर जाने पर धान के दाने खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
सिंचाई की सही विधि: 3 से 4 इंच पानी और 8 दिन का चक्र
धान के पौधों को गिरने से बचाने और उनकी बेहतर वृद्धि के लिए संजय कुमार ने सिंचाई का सटीक गणित साझा किया है। उनका कहना है कि सिंचाई के दौरान बेहद सावधानी रखनी चाहिए और खेत में पानी का स्तर हमेशा 3 से 4 इंच के बीच ही बनाए रखना चाहिए। इसके साथ ही, खेत में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय हर 8 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इस नियमित और सीमित पटवन प्रणाली से पौधों की जड़ों को लगातार जरूरी नमी मिलती रहती है, जिससे फसल का विकास सुचारू रूप से होता है और जड़ें भी मजबूत बनी रहती हैं।
बिना जानकारी खेती करने से बचें: संजय कुमार की सलाह
संजय कुमार का मानना है कि कृषि क्षेत्र में सही जानकारी और तकनीक का होना बेहद आवश्यक है। बहुत से लोग बिना पर्याप्त जानकारी के खेती-किसानी का काम शुरू कर देते हैं, जिससे उन्हें फसल प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संजय कुमार के अनुसार: "धान की फसल में सिंचाई के समय बहुत सावधानी बरतना होता है." उनका कहना है कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी पूरी समझ हासिल कर लेनी चाहिए। सही जानकारी होने से खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान आसानी से निकल आता है और किसानों की कुल आय में भी बढ़ोतरी होती है।



















