बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। जन सुराज के प्रमुख और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने राज्य में होने वाले विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। रविवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए जन सुराज ने 8 में से 6 सीटों के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगा दी है। हालांकि, सबसे चर्चित पटना स्नातक सीट को लेकर पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
घोषित प्रत्याशियों की सूची और क्षेत्रीय समीकरण
जन सुराज द्वारा जारी की गई पहली सूची में शिक्षक और स्नातक दोनों श्रेणियों की सीटों पर उम्मीदवार तय किए गए हैं। पार्टी ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आफ़ाक अहमद पर भरोसा जताया है, जबकि कोशी स्नातक सीट से रजनीश रंजन को चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसी तरह पटना शिक्षक सीट के लिए दिव्य ज्योति के नाम की घोषणा की गई है। मिथिलांचल के क्षेत्र में दरभंगा शिक्षक सीट से सुरेश प्रसाद राय और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रविंद्र कुमार यादव को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। इन छह नामों के चयन से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
पटना स्नातक सीट पर बना गहरा सस्पेंस
बिहार विधान परिषद की जिन 8 सीटों पर नवंबर में मतदान होना संभावित है, उनमें पटना स्नातक सीट सबसे अधिक चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। इस सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार का फिर से मैदान में उतरना तय माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने खुले तौर पर घोषणा कर दी है कि वे नीरज कुमार का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करेंगे। इसके उलट अनंत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर डॉ. अनुज सिंह को अपना आशीर्वाद और खुला समर्थन देने का ऐलान किया है। डॉ. अनुज सिंह लंबे समय से पटना स्नातक क्षेत्र के युवाओं और शिक्षित वर्ग के बीच सक्रिय रहे हैं और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।
नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच तीखा वाकयुद्ध
अनंत सिंह के इस कदम के बाद जनता दल (यूनाइटेड) के खेमे में हलचल बढ़ गई है। नीरज कुमार और अनंत सिंह के समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और राजनीतिक हिसाब-किताब चुकता करने के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव के दौरान भी नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर के खिलाफ कई आरोप लगाए थे और उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने थाने तक पहुंचे थे। हालांकि उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार हुई थी और प्रशांत किशोर विजयी रहे थे। अब पटना स्नातक सीट पर एनडीए के दो प्रभावशाली चेहरों के बीच की यह आपसी जंग जन सुराज के लिए एक बड़ा राजनीतिक अवसर बनती दिख रही है।
प्रशांत किशोर का संतुलित रुख
जब मीडिया प्रतिनिधियों ने प्रशांत किशोर से डॉ. अनुज सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने और अनंत सिंह के समर्थन को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में पार्टी का नजरिया साझा किया। उन्होंने दो टूक कहा कि अनंत सिंह किसे समर्थन देते हैं या क्या बयान देते हैं, यह जन सुराज का विषय नहीं है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और उम्मीदवार का चयन उसी के आधार पर होता है। उनका कहना था कि जन सुराज की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या बाहुबली के प्रभाव से नहीं, बल्कि बिहार के शिक्षित युवाओं, स्नातकों और शिक्षकों के अधिकारों के लिए है।
एनडीए के अंदरूनी मतभेद और जन सुराज की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू और बीजेपी गठबंधन के भीतर जारी इस अंतर्कलह का सीधा लाभ जन सुराज उठाने की तैयारी में है। लंबे समय से पद पर बने रहने के कारण नीरज कुमार को लेकर स्नातकों के एक वर्ग में सत्ता विरोधी भावना भी देखी जा रही है। दूसरी ओर अनंत सिंह के विरोध से एनडीए के पारंपरिक कैडर और समर्थकों में बिखराव का खतरा उत्पन्न हो गया है। यदि जन सुराज आगे चलकर डॉ. अनुज सिंह को अपना प्रत्याशी बनाती है, तो एनडीए के असंतुष्ट वोटों का सीधा झुकाव जन सुराज की ओर हो सकता है, जिससे पटना स्नातक सीट पर बेहद कड़ा और त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।



















