पाटलिपुत्र स्टेशन पर 6 घंटे का बवाल: परीक्षार्थियों ने ट्रेनें रोकीं, आंसू गैस और हवाई फायरिंग भी बेअसरbihar
2 घंटे पहले· 0

पाटलिपुत्र स्टेशन पर 6 घंटे का बवाल: परीक्षार्थियों ने ट्रेनें रोकीं, आंसू गैस और हवाई फायरिंग भी बेअसर

बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा देने जा रहे छात्रों के भीड़ में ट्रेन न पकड़ पाने से पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन पर शनिवार रात से रविवार सुबह तक करीब छह घंटे हंगामा चला, जिसमें कई ट्रेनें रोकी गईं और तोड़फोड़ हुई।

बिहार की राजधानी पटना का पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक रणक्षेत्र बना रहा। परीक्षा देने जा रहे छात्रों ने यहां करीब 6 घंटे तक जमकर बवाल काटा, कई ट्रेनों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की। हालात इतने बिगड़े कि लंबे समय तक स्टेशन से कोई ट्रेन रवाना ही नहीं हो सकी। सुबह होते-होते स्थिति काबू में आई।

आखिर भड़का क्यों यह हंगामा

इस पूरे बवाल की जड़ बिहार में चल रही सिपाही भर्ती परीक्षा है। राज्य में मद्य निषेध सिपाही, कक्षपाल एवं चलंत दस्ता सिपाही के कुल 4128 पदों के लिए लिखित परीक्षा 14 जून से 17 जून के बीच आयोजित हो रही है। परीक्षा दो शिफ्ट में होती है — पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे और दूसरी दोपहर तीन बजे शुरू होती है। 14 जून की पहली शिफ्ट में जिन छात्रों को परीक्षा देनी थी, वे शनिवार रात रेलवे स्टेशन पहुंचे, मगर भारी भीड़ के चलते ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाए। जब चढ़ने का मौका नहीं मिला तो उन्होंने ट्रेन को आगे बढ़ने से रोक दिया और यहीं से हंगामे की शुरुआत हो गई।

घंटे-दर-घंटे: कैसे बिगड़ते गए हालात

शनिवार रात 11.28 बजे: सीमांचल एक्सप्रेस पाटलिपुत्र स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर पहुंची। आनंद विहार से चलने वाली इस ट्रेन के आने का तय समय 11.15 बजे और रवाना होने का समय 11.25 बजे है। यूपी के दिलदार नगर और बिहार के बक्सर तथा आरा में ही ट्रेन खचाखच भर चुकी थी। पाटलिपुत्र पहुंचने पर अंदर जाने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी। प्लेटफॉर्म पर खड़े छात्र चढ़ नहीं पाए और जो नहीं चढ़ सके उन्होंने ट्रेन रोक दी। ट्रेन रुकते ही अंदर बैठे छात्र भी ट्रैक पर उतर आए। छात्रों को साफ दिख रहा था कि अब उनकी परीक्षा छूटनी तय है, इसलिए उन्होंने ट्रेन को आगे नहीं जाने दिया। उनकी सोच यह थी कि अगर वे परीक्षा नहीं दे पाएंगे तो बाकी छात्र भी न दे सकें और परीक्षा रद्द हो जाए।

रात 12 बजे: स्पेशल ट्रेन (09151) मधुबनी स्पेशल प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर आई, जो सूरत से आई थी। इस ट्रेन से हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा के छात्र परीक्षा देने जा सकते थे। लेकिन सीमांचल को रोके बैठे छात्रों ने भांप लिया कि यह ट्रेन निकल गई तो कई परीक्षार्थी पहुंच जाएंगे, इसलिए वे प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर भी ट्रेन के आगे आ गए और इसे भी रोक दिया। इसी बीच सोनपुर स्टेशन की ओर से एक मालगाड़ी पाटलिपुत्र की तरफ आ रही थी, जिसे सिग्नल पार करते ही छात्रों ने आउटर पर ही रोक दिया।

रात 2.36 बजे: कई छात्र सीमांचल के लिए परीक्षा स्पेशल ट्रेन की मांग कर रहे थे। उनकी मांग पर अधिकारियों ने खास तौर पर छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन मंगवा ली। यह ट्रेन 2.36 बजे पहुंच गई, लेकिन मालगाड़ी के आउटर पर ही खड़े रहने के कारण यह प्लेटफॉर्म तक नहीं आ सकी और इसे प्लेटफॉर्म पर लाने में काफी वक्त लग गया। इस ट्रेन से अररिया, कटिहार और किशनगंज के छात्र जा सकते थे। रेलवे प्रशासन माइक के जरिए बार-बार भरोसा दिला रहा था कि परीक्षा से पहले ट्रेन पहुंचा दी जाएगी, मगर छात्र कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। इसी ट्रेन में छात्रों ने तोड़फोड़ भी की, जिसके चलते यह भी सुबह काफी देर से स्टेशन से रवाना हो पाई।

भीड़ काबू करने में जुटा प्रशासन

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हवाई फायरिंग तक की गई, लेकिन कुछ काम नहीं आया। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था पहले ही कर दी गई थी और उन्हें समय रहते पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया था, पर हंगामा कर रहे लोगों ने एक न सुनी।

अधिकारियों ने क्या कहा

पटना के डीएम डॉ. त्यागराजन ने बताया, "आधी रात के आस-पास, हमें जानकारी मिली कि कुछ लोग हंगामा कर रहे हैं। हमने उनसे बार-बार कहा कि वे हंगामा न करें और जो एग्जाम देना चाहते हैं, उनके साथ कोऑपरेट करें। लेकिन, कुछ असामाजिक तत्वों ने बार-बार इमरजेंसी चेन खींची और अलग-अलग मांगें रखीं, जैसे स्पेशल ट्रेनों की रिक्वेस्ट, जबकि दो स्पेशल ट्रेनें पहले से ही अवेलेबल थीं। उन्होंने उन स्टूडेंट्स को भी रोका जो जाना चाहते थे। इन दिक्कतों की वजह से, हमें हल्का फोर्स इस्तेमाल करना पड़ा। अब सिचुएशन पूरी तरह नॉर्मल है, और ट्रेनें निकल चुकी हैं। एग्जाम देने वालों के लिए बनी ट्रेनें पहले ही निकल चुकी हैं। ट्रेन ऑपरेशन भी नॉर्मल चल रहा है।"

वहीं आईजी रेलवे ने कहा कि परीक्षा देने वाले छात्रों की परेशानी सुलझाने के लिए भरपूर कोशिश की गई, लेकिन ऐसा लग रहा था कि इन लोगों का एकमात्र मकसद हंगामा करना और परीक्षा रद्द कराना था। वे किसी भी समाधान पर राजी नहीं हो रहे थे, जिससे दिक्कत और बढ़ गई।

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