बिहार की राजधानी पटना के हृदय स्थल में स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय पूरे राज्य की राजनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस सीट पर चुनावी सरगर्मी इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि नई नवेली जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद यहां से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। हालांकि, अपनी सटीक और अचूक चुनावी रणनीतियों के लिए पूरे देश में मशहूर प्रशांत किशोर अब मतदान की तारीख से काफी पहले ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाने लगे हैं। उनके इस बदले हुए राजनीतिक रुख ने बिहार के सियासी हलकों में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांकीपुर में भारतीय जनता पार्टी का तीन दशक का दबदबा
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को हमेशा से ही भारतीय जनता पार्टी का एक सबसे सुरक्षित और अभेद्य किला माना जाता रहा है। पिछले इकतीस सालों के लंबे चुनावी इतिहास को देखें, तो इस सीट पर लगातार भारतीय जनता पार्टी का ही एकछत्र कब्जा रहा है। इस दौरान पहले कद्दावर नेता नवीन किशोर सिन्हा और उनके निधन के बाद उनके बेटे नितिन नवीन ने लगातार इस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया है। यह महत्वपूर्ण उपचुनाव इसलिए आयोजित किया जा रहा है क्योंकि बांकीपुर के निवर्तमान विधायक नितिन नवीन को हाल ही में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस बड़ी जिम्मेदारी के मिलने के बाद उन्होंने इस सीट से अपना इस्तीफा दे दिया था। चुनावी आंकड़ों की बात करें तो साल 2025 में हुए पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन ने इस सीट पर एक बेहद शानदार जीत दर्ज की थी। उस कड़े मुकाबले में उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी और राष्ट्रीय जनता दल की महिला उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 51,936 वोटों के एक बहुत बड़े और एकतरफा अंतर से करारी शिकस्त दी थी। अब इस मौजूदा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी 31 साल पुरानी जीत की लय को बरकरार रखने के इरादे से नीरज कुमार सिन्हा को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी खेमे से राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर से अपनी पुरानी और अनुभवी प्रत्याशी रेखा गुप्ता पर ही अपना पूरा भरोसा जताया है।
जनसुराज और प्रशांत किशोर की राजनीतिक साख का सवाल
इस बार बांकीपुर का यह बड़ा चुनावी दंगल केवल मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बीच का सीधा मुकाबला नहीं रह गया है। इस प्रतिष्ठित लड़ाई में जनसुराज पार्टी ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ सीधे तौर पर एंट्री मार ली है। गौरतलब है कि साल 2025 के पिछले विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी ने पूरे बिहार में बड़े-बड़े राजनीतिक बदलाव लाने के दावे किए थे, लेकिन चुनाव परिणामों में उसे एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई थी। अब अपनी पार्टी की गिरती हुई राजनीतिक साख को बचाने और सदन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के उद्देश्य से जनसुराज ने इस बेहद अहम उपचुनाव में किसी और को नहीं, बल्कि खुद अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को ही सीधा उम्मीदवार बना दिया है। चूंकि प्रशांत किशोर खुद इस बार सीधे तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए उनकी पार्टी जनसुराज ने अपने प्रचार अभियान में अपनी पूरी की पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जनसुराज का यह पूरा अभियान जमीनी स्तर के प्रचार से कहीं ज्यादा इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी सुर्खियां बटोरने में लगा हुआ है, ठीक वैसे ही जैसे इस पार्टी ने 2025 के मुख्य विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी रणनीति अपनाई थी।
विपक्षी नेताओं की राह पर चले चुनावी रणनीतिकार
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में अपना चुनाव प्रचार काफी पहले ही शुरू कर दिया था। पिछले लगभग डेढ़ से दो महीने से वह लगातार इस इलाके की सड़कों और मोहल्लों में पूरी तरह से सक्रिय हैं। उन्होंने अपना यह सघन जनसंपर्क अभियान उस समय बहुत तेज कर दिया था, जब किसी अन्य प्रमुख राजनीतिक दल ने इस उपचुनाव के लिए अपनी जमीनी तैयारियां भी ठीक से शुरू नहीं की थीं। लेकिन पटना के राजनीतिक जानकारों का यह भी साफ तौर पर मानना है कि जैसे ही भारतीय जनता पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा के नाम पर मुहर लगाई और राष्ट्रीय जनता दल ने आधिकारिक तौर पर रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित किया, वैसे ही प्रशांत किशोर के आक्रामक प्रचार अभियान की रफ़्तार अचानक से कुछ धीमी पड़ती हुई नजर आने लगी है। इसके साथ ही एक बड़ा बदलाव यह भी आया है कि उनकी जनसभाओं में अब उनके भाषण का मूल विषय और लहजा पूरी तरह से बदल गया है। अपनी चुनावी रैलियों में वह अब मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ही तरह देश की चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह जताने लगे हैं। चुनाव प्रचार तंत्र और वोटिंग गणित के इतने बड़े, सफल और अनुभवी रणनीतिकार का वोटिंग से पहले ही वोट चोरी और मशीनों में गड़बड़ी की बातें करना आम जनता और विश्लेषकों दोनों को हैरान कर रहा है।
मंच से ईवीएम पर सीधा निशाना और वोटरों से अपील
बांकीपुर के अलग-अलग इलाकों में लगातार अपनी चुनावी जनसभाओं को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर वहां के मतदाताओं को वोट चोरी की आशंकाओं को लेकर खुलेआम आगाह कर रहे हैं। उनका यह स्पष्ट रूप से कहना है कि आज के राजनीतिक माहौल में सिर्फ पोलिंग बूथ पर जाकर अपना वोट डाल देना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि अपने डाले गए वोटों की कड़ी रक्षा करना भी उतना ही जरूरी हो गया है। प्रशांत किशोर ने एक विशाल जनसभा में सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा, "खाली वोट देने से नहीं होगा। आजकल ईवीएम का भी खेला है। वोट चोरी का भी खेला है।" वह आम जनता को समझाते हुए कह रहे हैं कि कई बार मतदाता अपना वोट किसी एक निश्चित उम्मीदवार को देते हैं, लेकिन सिस्टम की गड़बड़ी के कारण वह वोट असल में किसी और के खाते में ही चला जाता है। प्रशांत किशोर ने यह अनुमान भी जताया है कि इस आगामी उपचुनाव में भी विरोधी दल कम से कम पंद्रह हजार वोटों की हेराफेरी करने की साजिश रच सकते हैं। अपने समर्थकों की चिंताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोग अक्सर उन्हें अपना पूर्ण समर्थन देने का पक्का वादा तो करते हैं, लेकिन साथ ही उनसे मतदान के दिन ईवीएम की कड़ी निगरानी करने को भी कहते हैं। इस पर प्रशांत किशोर ने देश के चुनाव आयोग पर भी परोक्ष रूप से सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि मशीन उनके निजी हाथों में नहीं है, बल्कि वह पूरी तरह से चुनाव आयोग के कड़े नियंत्रण में होती है। इसी अहम बात को अपना मुख्य आधार बनाते हुए वह बांकीपुर की जनता से यह भावुक अपील कर रहे हैं कि वे उन्हें चुनाव में कम से कम पचास हजार वोटों के एक बहुत बड़े अंतर से जिताएं। उनका यह तर्क है कि अगर जीत का अंतर इतना विशाल होगा, तो चुनाव के दिन अगर ईवीएम में किसी भी तरह की कोई बड़ी गड़बड़ी या गुप्त खेल होता भी है, तो भी उनके विरोधी उन्हें किसी भी कीमत पर हरा नहीं पाएंगे और जीत अंततः जनसुराज की ही होगी।




















