नीट परीक्षा के बहुचर्चित पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में चल रहा छात्रों का आक्रोश बुधवार की सुबह बिहार की राजधानी पटना में एक हिंसक रूप ले चुका है। दिल्ली से लेकर पटना तक जारी इस राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच, आइसा के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए राज्य के सबसे बड़े सत्ता केंद्र का रुख किया। परीक्षा प्रणाली में हुई इस भारी धांधली के खिलाफ न्याय की मांग करते हुए, प्रदर्शनकारी छात्रों का विशाल हुजूम धीरे-धीरे बिहार लोक भवन की तरफ बढ़ने लगा। स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब यह उग्र भीड़ पुलिस के शुरुआती घेरे को तोड़कर सीधे मुख्यमंत्री आवास के बेहद करीब तक जा पहुंची, जिसने प्रशासन के होश उड़ा दिए और उन्हें तत्काल कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
मानसून सत्र के बीच विधानसभा में तालाबंदी
छात्रों का यह विशाल मार्च ऐसे समय में निकाला गया जब बिहार विधानसभा के अंदर मानसून सत्र की महत्वपूर्ण कार्यवाही चल रही थी। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा की ओर तेजी से बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को देखकर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। संभावित खतरे और किसी भी तरह की अनहोनी को टालने के लिए प्रशासन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तुरंत विधानसभा का मुख्य द्वार पूरी तरह से बंद कर दिया और उस पर ताला जड़ दिया। देखते ही देखते पूरा वीवीआईपी इलाका एक अभेद्य पुलिस छावनी में तब्दील हो गया, ताकि सदन के अंदर बैठे विधायकों और जारी कार्यवाही को बाहर सड़क पर हो रहे इस भारी हंगामे से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
बैरिकेडिंग टूटी और पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा परिसर की ओर लगातार बढ़ रहे छात्रों के सैलाब को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तर की मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। मुख्य गेट के ठीक बाहर भारी संख्या में पुलिस बल, विशेष महिला पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद, छात्रों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था और जल्द ही प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाबलों के बीच भारी धक्का-मुक्की और तीखी झड़प शुरू हो गई। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और छात्र पुलिस से उलझने लगे, तो भीड़ को तितर-बितर करने और पीछे धकेलने के लिए पुलिस को मजबूरन आंसू गैस के कई गोले दागने पड़े, जिससे मौके पर भारी अफरा-तफरी और भगदड़ का माहौल पैदा हो गया।
पथराव में पुलिसकर्मी और छात्र गंभीर रूप से घायल
आंसू गैस के गोलों और पुलिस की सख्ती के बाद प्रदर्शनकारियों का एक गुट और ज्यादा हिंसक हो गया। इस दौरान भीड़ की तरफ से पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की गई, जिसने हालात को और भी ज्यादा बिगाड़ दिया। पत्थरों की इस बारिश में कई पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें लहूलुहान हालत में देखा गया। वहीं दूसरी तरफ, पुलिस के साथ हुई इस भीषण झड़प, धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज के दौरान कई प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को भी काफी चोटें लगी हैं। घायलों की चीख-पुकार और लगातार हो रहे बवाल के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
बाहर संग्राम, अंदर जारी रही सदन की कार्यवाही
प्रदर्शनकारियों का मुख्य लक्ष्य किसी भी तरह मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना था, जिसे विफल करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को चरम पर पहुंचा दिया गया है। एक तरफ जहां विधानसभा के ठीक बाहर सुरक्षा एजेंसियां उग्र भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए भारी मशक्कत कर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ सदन के अंदर मानसून सत्र की कार्यवाही बिना किसी रुकावट के जारी रही। हालात की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के आसपास के पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है, और आला अधिकारी चप्पे-चप्पे पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि फिर से कोई हिंसा न भड़क सके।




















