बीमा से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में हो रही देरी को लेकर शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बीमा भरोसा पोर्टल को लेकर जानकारी मांगी थी, और इस दौरान सामने आया कि पोर्टल पर लंबित शिकायतों में से आधे से ज्यादा शिकायतें आपस में जुड़ी हुई हैं, यानी एक जैसी वजहों से अटकी पड़ी हैं। यह जानकारी बीमा क्षेत्र में शिकायत निपटारे की रफ्तार पर सवाल खड़े करती है।
बीमा भरोसा पोर्टल क्या है
बीमा भरोसा पोर्टल भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, यानी इरडा की ओर से शुरू की गई एक ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था है। इसका मकसद यह है कि बीमा पॉलिसीधारकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसके निपटारे की स्थिति जानने के लिए एक ही जगह पर सुविधा मिल सके। कोई भी पॉलिसीधारक इस पोर्टल के जरिए अपनी बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत डाल सकता है, और अगर कंपनी के स्तर पर समाधान नहीं होता, तो मामला बीमा लोकपाल यानी ऑम्बड्समैन तक भी ले जाया जा सकता है।
शशि थरूर ने क्या लिखा
थरूर ने बताया कि उनका सवाल खासतौर पर बीमा भरोसा पोर्टल को लेकर जानकारी हासिल करने के लिए था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह चिंता की बात है कि पोर्टल पर लंबित शिकायतों में से आधे से ज्यादा शिकायतें आपस में जुड़ी हुई निकलीं, जो पूरी व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है। उन्होंने इस पोस्ट में इरडा के आधिकारिक हैंडल को भी टैग किया।
शिकायतों का अटका ढेर और सिस्टम पर सवाल
बीमा क्षेत्र में शिकायत निपटारे को लेकर यह मुद्दा नया नहीं है। खबरों के मुताबिक, बीमा भरोसा पोर्टल के आंकड़ों में कई खामियां पहले भी सामने आती रही हैं, और शिकायतों के निपटारे की रफ्तार धीमी रहने की बात लगातार उठती रही है। पॉलिसीधारकों के लिए बीमा भरोसा पोर्टल और लोकपाल व्यवस्था को शिकायत सुलझाने के प्रभावी जरिए के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में लंबित और आपस में जुड़ी शिकायतें इस व्यवस्था की क्षमता पर सवाल खड़े करती हैं। खासकर स्वास्थ्य बीमा के दावों को खारिज किए जाने से जुड़ी शिकायतें इस पोर्टल पर एक बड़ा हिस्सा बनाती रही हैं, और पॉलिसीधारकों को न्याय के लिए अक्सर लोकपाल या उपभोक्ता अदालत तक का रुख करना पड़ता है।
जनता की प्रतिक्रिया
शशि थरूर के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने उनके इस कदम की सराहना की और कहा कि बीमा शिकायतों के निपटारे में देरी का मुद्दा लंबे समय से उठाया जाना चाहिए था। वहीं कुछ यूजर्स ने इरडा की कार्यप्रणाली और बीमा कंपनियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए तेज कार्रवाई और सख्त निगरानी की मांग की। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आम पॉलिसीधारकों को समय पर न्याय कैसे मिले, जबकि कुछ ने पूरे मसले पर सरकार और नियामक से सीधा जवाब मांगा।

























