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बीमा भरोसा पोर्टल की आधी शिकायतें अटकीं, शशि थरूर ने उठाया सवालनेता जी
11 अग॰ 2026, 11:20 pm (2 घंटे पहले)· 0

बीमा भरोसा पोर्टल की आधी शिकायतें अटकीं, शशि थरूर ने उठाया सवाल

शशि थरूर ने इरडा के बीमा भरोसा पोर्टल पर लंबित शिकायतों को लेकर सवाल उठाया, जहां आधे से ज्यादा मामले आपस में जुड़े हुए बताए गए हैं।

बीमा से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में हो रही देरी को लेकर शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बीमा भरोसा पोर्टल को लेकर जानकारी मांगी थी, और इस दौरान सामने आया कि पोर्टल पर लंबित शिकायतों में से आधे से ज्यादा शिकायतें आपस में जुड़ी हुई हैं, यानी एक जैसी वजहों से अटकी पड़ी हैं। यह जानकारी बीमा क्षेत्र में शिकायत निपटारे की रफ्तार पर सवाल खड़े करती है।

बीमा भरोसा पोर्टल क्या है

बीमा भरोसा पोर्टल भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, यानी इरडा की ओर से शुरू की गई एक ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था है। इसका मकसद यह है कि बीमा पॉलिसीधारकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसके निपटारे की स्थिति जानने के लिए एक ही जगह पर सुविधा मिल सके। कोई भी पॉलिसीधारक इस पोर्टल के जरिए अपनी बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत डाल सकता है, और अगर कंपनी के स्तर पर समाधान नहीं होता, तो मामला बीमा लोकपाल यानी ऑम्बड्समैन तक भी ले जाया जा सकता है।

शशि थरूर ने क्या लिखा

थरूर ने बताया कि उनका सवाल खासतौर पर बीमा भरोसा पोर्टल को लेकर जानकारी हासिल करने के लिए था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह चिंता की बात है कि पोर्टल पर लंबित शिकायतों में से आधे से ज्यादा शिकायतें आपस में जुड़ी हुई निकलीं, जो पूरी व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है। उन्होंने इस पोस्ट में इरडा के आधिकारिक हैंडल को भी टैग किया।

शिकायतों का अटका ढेर और सिस्टम पर सवाल

बीमा क्षेत्र में शिकायत निपटारे को लेकर यह मुद्दा नया नहीं है। खबरों के मुताबिक, बीमा भरोसा पोर्टल के आंकड़ों में कई खामियां पहले भी सामने आती रही हैं, और शिकायतों के निपटारे की रफ्तार धीमी रहने की बात लगातार उठती रही है। पॉलिसीधारकों के लिए बीमा भरोसा पोर्टल और लोकपाल व्यवस्था को शिकायत सुलझाने के प्रभावी जरिए के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में लंबित और आपस में जुड़ी शिकायतें इस व्यवस्था की क्षमता पर सवाल खड़े करती हैं। खासकर स्वास्थ्य बीमा के दावों को खारिज किए जाने से जुड़ी शिकायतें इस पोर्टल पर एक बड़ा हिस्सा बनाती रही हैं, और पॉलिसीधारकों को न्याय के लिए अक्सर लोकपाल या उपभोक्ता अदालत तक का रुख करना पड़ता है।

जनता की प्रतिक्रिया

शशि थरूर के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने उनके इस कदम की सराहना की और कहा कि बीमा शिकायतों के निपटारे में देरी का मुद्दा लंबे समय से उठाया जाना चाहिए था। वहीं कुछ यूजर्स ने इरडा की कार्यप्रणाली और बीमा कंपनियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए तेज कार्रवाई और सख्त निगरानी की मांग की। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आम पॉलिसीधारकों को समय पर न्याय कैसे मिले, जबकि कुछ ने पूरे मसले पर सरकार और नियामक से सीधा जवाब मांगा।

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सवाल-जवाब

शशि थरूर ने क्या पोस्ट किया?
उन्होंने एक्स पर लिखा कि उनके सवाल के जवाब में सामने आया कि बीमा भरोसा पोर्टल पर लंबित शिकायतों में से आधे से ज्यादा शिकायतें आपस में जुड़ी हुई हैं।
बीमा भरोसा पोर्टल क्या है?
यह इरडा द्वारा बनाई गई ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था है, जहां पॉलिसीधारक अपनी बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
पोर्टल पर लंबित शिकायतों को लेकर क्या सामने आया?
थरूर के मुताबिक आधे से ज्यादा लंबित शिकायतें आपस में जुड़ी हुई पाई गई हैं, जो सिस्टम में खामी की ओर इशारा करता है।
शिकायत का समाधान न होने पर पॉलिसीधारक क्या कर सकते हैं?
पॉलिसीधारक बीमा लोकपाल यानी ऑम्बड्समैन या उपभोक्ता अदालत का रुख कर सकते हैं।
थरूर के पोस्ट पर सोशल मीडिया पर कैसी प्रतिक्रिया रही?
प्रतिक्रिया मिलीजुली रही, कुछ ने उनके कदम की सराहना की तो कुछ ने इरडा और बीमा कंपनियों के रवैये पर नाराजगी जताई।
थरूर ने अपने पोस्ट में किसे टैग किया?
उन्होंने अपने पोस्ट में इरडा के आधिकारिक हैंडल को टैग किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

C
Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 मिनट पहले

शशि थरूर द्वारा बीमा भरोसा पोर्टल के लंबित मामलों को उजागर करना यह दिखाता है कि डिजिटल शिकायत निवारण तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना कितना आवश्यक है। अमेरिकी राजनीति और सरकारी नीतियों को कवर करने के अपने अनुभव से कहूँ तो, नियामकों और उपभोक्ताओं के बीच ऐसा संवाद लोकतंत्र में सुधार की दिशा तय करता है। जब आधे से अधिक मामले एक जैसी वजहों से अटके हों, तो यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि नीतिगत समीक्षा की माँग करता है, ताकि आम नागरिकों को त्वरित राहत मिल सके।

O
Omar AL Mansoori@omar-mansoori·18 मिनट पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि जब वित्तीय नियामक ऐसे तकनीकी और प्रणालीगत गतिरोधों को समय पर नहीं सुलझाते हैं, तो इसका सीधा असर बाजार के विश्वास और उपभोक्ता संरक्षण पर पड़ता है। बीमा क्षेत्र में यदि बड़ी संख्या में शिकायतें एक जैसी वजहों से अटकी रहें, तो यह निवेशकों और पॉलिसीधारकों दोनों के लिए एक बड़ा नीतिगत जोखिम बन जाता है। इस तरह के मामलों में नियामकों को केवल आंतरिक समीक्षा तक सीमित न रहकर सख्त अनुपालन और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए, अन्यथा यह डिजिटल बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

N
Neha Verma@neha-verma·54 मिनट पहले

शशि थरूर द्वारा बीमा भरोसा पोर्टल पर उठाई गई यह चिंता वित्तीय सुरक्षा के मोर्चे पर ग्राहकों के भरोसे को सीधा प्रभावित करती है। जिस प्रकार स्वास्थ्य बीमा दावों और लंबित शिकायतों का ग्राफ बढ़ रहा है, वह स्पष्ट करता है कि सेवा गुणवत्ता में सुधार की सख्त जरूरत है। जब नीतिधारक मानसिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता से जूझते हैं, तो इस तरह की प्रशासनिक सुस्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है। नियामक को अब अपनी निगरानी और शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व त्वरित बनाना होगा।

R
Riya Menon@riya-menon·54 मिनट पहले

यह प्रशासनिक सुस्ती न केवल वित्तीय मोर्चे पर बल्कि उपभोक्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है। जब स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी होती है, तो यह स्थिति ठीक वैसी ही निराशा पैदा करती है जैसी किसी खराब या दूषित खाद्य उत्पाद के सेवन से होती है जहाँ उपभोक्ता खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस करता है। बीमा नियामक और कंपनियों को यह समझना होगा कि पारदर्शिता और त्वरित सेवा ही किसी भी भरोसेमंद तंत्र की असली बुनियाद है।

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