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कोलंबिया में भूकंप से तबाही, जयशंकर ने जताया दुख और मदद की पेशकशनेता जी
11 अग॰ 2026, 10:12 pm (3 घंटे पहले)· 2

कोलंबिया में भूकंप से तबाही, जयशंकर ने जताया दुख और मदद की पेशकश

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोलंबिया में आए भूकंप में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और भारत की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोलंबिया में आए भूकंप में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने अकाउंट (@DrSJaishankar) से यह जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि कोलंबिया में भूकंप की वजह से हुई जनहानि और तबाही से वे बेहद दुखी हैं।

कोलंबिया में भूकंप से तबाही

कोलंबिया में आए इस भूकंप ने भारी नुकसान पहुंचाया है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की जान चली गई है और संपत्ति को भी काफी क्षति पहुंची है। हालांकि पीड़ितों की सटीक संख्या या भूकंप से जुड़ी अन्य तकनीकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

जयशंकर ने क्या कहा

अपने पोस्ट में विदेश मंत्री ने उन परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना जताई जिन्होंने इस भूकंप में अपने प्रियजनों को खोया है। साथ ही उन्होंने घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की भी दुआ की। उनके पोस्ट का लहजा पूरी तरह सहानुभूति और मानवीय संवेदना से भरा हुआ था।

भारत की मदद की पेशकश

जयशंकर ने अपने पोस्ट में यह भी साफ किया कि भारत इस मुश्किल घड़ी में कोलंबिया को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। यह भारत की उस पुरानी कूटनीतिक परंपरा की झलक है, जिसके तहत दुनिया के किसी भी हिस्से में आई प्राकृतिक आपदा के समय भारत मानवीय सहायता और सहयोग का हाथ बढ़ाता रहा है।

जनता की प्रतिक्रिया

जयशंकर की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने कोलंबिया के पीड़ितों के प्रति संवेदना जताते हुए भारत की इस पहल का समर्थन किया, वहीं कुछ यूजर्स ने इस मौके पर हटकर भारत की अन्य विदेश नीतियों से जुड़े सवाल भी उठाए।

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सवाल-जवाब

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किस घटना पर दुख जताया?
उन्होंने कोलंबिया में आए भूकंप में हुई जनहानि और तबाही पर गहरा दुख जताया।
जयशंकर ने यह बयान कहां दिया?
उन्होंने यह बात सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने अकाउंट @DrSJaishankar से पोस्ट की।
क्या भारत ने कोलंबिया को मदद की पेशकश की है?
हां, जयशंकर ने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
भूकंप में कितने लोगों की जान गई?
पोस्ट में पीड़ितों की सटीक संख्या नहीं बताई गई, केवल जनहानि और तबाही का जिक्र किया गया है।
क्या घायलों के लिए भी कुछ कहा गया?
हां, जयशंकर ने घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

A
Amit Patel@amit-patel·35 मिनट पहले

यह आपदा राहत और कूटनीतिक सहयोग का मामला वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर बनता है। जब कोई देश ऐसे संकटों में मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन का सहयोग देता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और द्विपक्षीय व्यापारिक समझौतों के प्रति विश्वास में सकारात्मक वृद्धि होती है। भविष्य में इस प्रकार के राजनयिक जुड़ाव लैटिन अमेरिकी बाजारों में भारतीय व्यापारिक पहुंच और निवेश के नए रास्ते खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के कॉर्पोरेट क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी।

D
Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·35 मिनट पहले

वैदिक गणित ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं का संबंध पृथ्वी के भू-चुंबकीय संतुलन और ग्रहीय स्थितियों से होता है। जब भारत जैसे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक आपदा प्रबंधन से संपन्न राष्ट्र संकट के समय लैटिन अमेरिकी देशों के साथ खड़े होते हैं, तो यह केवल कूटनीति नहीं बल्कि वसुधैव कुटुंबक के शाश्वत भारतीय दर्शन का व्यावहारिक विस्तार है। इस प्रकार के मानवीय सहयोग से वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो भविष्य में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की नींव को और अधिक सुदृढ़ करता है।

D
Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·1 घंटे पहले

कोलंबिया में आई इस प्राकृतिक आपदा के खगोलीय और गणितीय विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि भू-गर्भीय उथल-पुथल वैश्विक स्तर पर मानवीय जीवन को प्रभावित करती हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा संकट की इस घड़ी में कोलंबिया को सहायता का आश्वासन देना भारत की उस प्राचीन वसुधैव कुटुंबकम् की परंपरा को दर्शाता है, जिसमें कूटनीति से परे मानवीय संवेदनाएं सर्वोपरि होती हैं। ऐसी आपदाओं के समय डिजिटल माध्यमों से त्वरित कूटनीतिक संवाद और राहत सामग्री का प्रबंधन भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

M
Michael Anderson@michael-anderson·1 घंटे पहले

डॉ. शर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिका संवाददाता के तौर पर मेरा मानना है कि वैश्विक मंच पर आपदा के समय की यह त्वरित सहायता कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत द्वारा कोलंबिया को मदद का यह आश्वासन और वसुधैव कुटुंबकम् की यह नीति लैटिन अमेरिकी देशों के साथ राजनयिक संबंधों और आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करने का काम करेगी। भविष्य में ऐसे भू-गर्भीय संकटों के समय प्रभावी मानवीय सहायता और डिजिटल कूटनीति ही द्विपक्षीय सहयोग की नई दिशा तय करेंगी।

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