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1975 के एक पंजाबी लोकगीत का सफर, मंदाकिनी के रोमांटिक ट्रैक से लेकर दीपिका पादुकोण के 2014 के हिट आइटम नंबर तकबॉलीवुड
6 अग॰ 2026, 8:01 pm (3 घंटे पहले)· 0

1975 के एक पंजाबी लोकगीत का सफर, मंदाकिनी के रोमांटिक ट्रैक से लेकर दीपिका पादुकोण के 2014 के हिट आइटम नंबर तक

1975 में रिकॉर्ड हुए आशिक हुसैन जट्ट के लोकगीत 'मैनूं पार लंगा दे' की धुन का इस्तेमाल 1990 की फिल्म 'शेषनाग' और 2014 की 'हैप्पी न्यू ईयर' में किया गया था। जानिए कैसे 39 सालों के दौरान इस एक ही धुन ने बॉलीवुड के गानों को सजाया।

भारतीय संगीत जगत में पुरानी धुनों का नया रूप प्रस्तुत करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी एक ही लोकगीत की धुन का चार दशकों के अंतराल में अलग-अलग शैलियों में इस्तेमाल होना वाकई दिलचस्प है। वर्ष 1975 में रिकॉर्ड किए गए एक प्रसिद्ध पंजाबी लोकगीत ने बॉलीवुड में ऐसा ही एक लंबा और यादगार सफर तय किया। यह सुरीली धुन पहले 1990 की एक चर्चित बॉलीवुड फिल्म के रोमांटिक गाने में ढली और फिर 39 वर्षों बाद 2014 में एक हाई-एनर्जी क्लब आइटम नंबर के रूप में उभरी।

1975 की मूल रचना: आशिक हुसैन जट्ट का लोकगीत

इस पूरे संगीतमय सफर की शुरुआत 1975 में हुई थी, जब गायक आशिक हुसैन जट्ट ने अपना पंजाबी लोकगीत 'मैनूं पार लंगा दे' रिकॉर्ड किया था। इस पंजाबी पंक्ति का शाब्दिक अर्थ होता है "मुझे पार लगा दो"। अपनी सादगी, गहराई और भावनात्मक धुन के कारण यह रचना पंजाबी लोक संगीत प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। इस गाने की धुन में ऐसी मिठास और आकर्षण था कि समय-समय पर संगीतकारों ने इसे नए अंदाज में रीक्रिएट और सैंपल किया।

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1990 में शेषनाग का रोमांटिक गीत: मंदाकिनी और ऋषि कपूर

वर्ष 1990 में आई फिल्म 'शेषनाग' के जरिए इस धुन ने पहली बार हिंदी सिनेमा के बड़े पर्दे पर दस्तक दी। फिल्म के मशहूर गीत 'तेरा हाथ ना छोड़ूंगी' में आशिक हुसैन जट्ट के इसी पंजाबी लोकगीत का सैंपल इस्तेमाल किया गया था। इस गाने को मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक ने अपनी सुरीली आवाज दी थी, जबकि इसके भावुक बोल गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे। प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस धुन को बेहद खूबसूरती से अरेंज किया था। पर्दे पर यह गाना अभिनेता ऋषि कपूर और अभिनेत्री मंदाकिनी पर फिल्माया गया था, जहां दर्शकों ने दोनों गानों की संगीतमय समानता को साफ तौर पर महसूस किया।

सफरी बॉयज और नया संगीतमय रंग

बॉलीवुड के अलावा इस अमर धुन का आकर्षण स्वतंत्र पंजाबी संगीत जगत में भी बना रहा। सफरी बॉयज बैंड के गायक बलविंदर सफरी ने 1975 की इस मूल रचना को अपने आधुनिक और नए अंदाज में पेश किया। उनके इस नए रूपांतरण ने नई पीढ़ी के बीच लोकगीत की धुन को जीवित रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संगीत प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

2014 में 'लवली': दीपिका पादुकोण का धमाकेदार आइटम नंबर

वर्ष 1975 की मूल रिकॉर्डिंग के ठीक 39 साल बाद, 2014 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' में इसी धुन ने एक बार फिर वापसी की। फिल्म के सुपरहिट गाने 'लवली' में इस धुन को रीक्रिएट और सैंपल किया गया। गायिका कनिका कपूर की आवाज में सजे इस गाने पर अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने एक ऊर्जावान आइटम नंबर किया, जिसमें उनके साथ अभिनेता शाहरुख खान भी नजर आए थे। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की शुरुआत दर्शकों के "मोहिनी मोहिनी" चिल्लाने की आवाज से होती है, जो माधुरी दीक्षित के 1988 के मशहूर सुपरहिट गाने 'एक दो तीन' की याद दिलाती है। इस तरह एक आध्यात्मिक और भावनात्मक पंजाबी लोकगीत 39 साल बाद बॉलीवुड का एक विशाल आइटम डांस नंबर बन गया।

सवाल-जवाब

फिल्म हैप्पी न्यू ईयर का गाना 'लवली' किस मूल लोकगीत की धुन पर आधारित है?
साल 2014 का गाना 'लवली' आशिक हुसैन जट्ट द्वारा 1975 में रिकॉर्ड किए गए प्रसिद्ध पंजाबी लोकगीत 'मैनूं पार लंगा दे' की धुन पर आधारित है।
1990 की किस फिल्म में इस लोकगीत की धुन का इस्तेमाल किया गया था?
1990 में रिलीज हुई फिल्म 'शेषनाग' के गाने 'तेरा हाथ ना छोड़ूंगी' में इसी धुन का इस्तेमाल हुआ था, जिसे ऋषि कपूर और मंदाकिनी पर फिल्माया गया था।
1990 और 2014 के इन दोनों गानों के गायक कौन-कौन हैं?
1990 के गाने 'तेरा हाथ ना छोड़ूंगी' को अलका याज्ञनिक ने गाया था, जबकि 2014 के गाने 'लवली' को कनिका कपूर ने गाया था।
गाने 'लवली' की शुरुआत में माधुरी दीक्षित का क्या संदर्भ है?
गाने 'लवली' की शुरुआत में दर्शक "मोहिनी मोहिनी" चिल्लाते हैं, जो 1988 की फिल्म तेज़ाब में माधुरी दीक्षित के सुपरहिट गाने 'एक दो तीन' की याद दिलाता है।
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