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इमरजेंसी में जब किशोर कुमार की एक दो-टूक बात पर भड़क उठी थी सरकार, गानों पर ठोक दिया था रेडियो बैनबॉलीवुड
20 सित॰ 2026, 3:24 pm (1 घंटे पहले)· 0

इमरजेंसी में जब किशोर कुमार की एक दो-टूक बात पर भड़क उठी थी सरकार, गानों पर ठोक दिया था रेडियो बैन

इमरजेंसी के दौरान मंत्रालय के फरमान को ठुकराने के बाद मशहूर गायक किशोर कुमार के गीतों के प्रसारण पर ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने रोक लगा दी थी। उनके बेटे अमित कुमार ने एक टेलीविजन शो में इस टकराव की पूरी कहानी साझा की थी।

भारतीय संगीत जगत में अपनी अनूठी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाले महान फनकार किशोर कुमार ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने के लिए भी खास पहचान बनाई। सत्तर के दशक में जब देश भर में आपातकाल की बंदिशें लागू थीं, उस दौर में सत्ता के सामने झुकने से इनकार करने का एक चर्चित वाकया उनके जीवन से जुड़ा है। सरकार के एक तुगलकी फरमान को मानने से इनकार करने पर उस समय के प्रमुख सरकारी प्रसारण माध्यमों ने उनकी आवाज पर पूरी तरह पहरा बैठा दिया था। यह पूरा वाकया दर्शाता है कि किशोर कुमार अपने आत्मसम्मान और उसूलों से कभी समझौता नहीं करते थे।

टेलीविजन मंच पर जब बेटे ने साझा की पुरानी याद

इस ऐतिहासिक और तनावपूर्ण घटनाक्रम की परतें गायक के बेटे अमित कुमार ने एक हास्य कार्यक्रम 'द कपिल शर्मा शो' के दौरान खोली थीं। अमित कुमार ने बताया कि वर्ष 1975 से 1977 के मध्य जब देश आपातकाल के साए में था, तब उनके पिता हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और लोकप्रिय पार्श्व गायक के रूप में शीर्ष मुकाम पर थे। हर बड़ा निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों में उनकी आवाज शामिल करने के लिए कतार में खड़ा रहता था। ठीक उसी दौर में हुकूमत की ओर से उन पर अपनी मर्जी थोपने का प्रयास किया गया था।

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दिल्ली से आए फोन कॉल पर हुआ था तीखा विवाद

अमित कुमार के अनुसार, राजधानी दिल्ली स्थित एक मंत्रालय के अधिकारी ने सीधे फोन करके उन्हें तत्काल दिल्ली तलब किया था। अधिकारी का कहना था कि सरकार उनके लिए हवाई टिकट का बंदोबस्त कर रही है और उन्हें अगली सुबह की उड़ान पकड़कर दिल्ली पहुंचना होगा। इसके पीछे की मंशा यह थी कि अगले ही दिन उनके एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन तय कर दिया गया था। गायक को पूर्व सूचना दिए बिना सीधे आदेश सुना दिया गया था, जो उनके मिजाज के बिल्कुल विपरीत था।

किशोर कुमार ने बिना सोचे-समझे सरकारी फरमान पर हामी भरने के बजाय साफ कह दिया कि अगर सरकार को कोई बातचीत करनी है, तो अधिकारी अपना कोई प्रतिनिधि उनके पास भेजे। इसके बाद ही वह इस यात्रा पर विचार करेंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने बेहद दो-टूक अंदाज में कहा कि स्वयं ईश्वर भी आकर कहेंगे तब भी वह इस तरह नहीं आ सकते। गायक का यह बेबाक और निडर जवाब सुनते ही फोन पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी बुरी तरह तिलमिला गया।

दो घंटे के भीतर सरकारी माध्यमों पर लग गई थी पाबंदी

सत्ता के नुमाइंदे से हुई इस तीखी बहस का नतीजा बहुत जल्द सामने आ गया। अमित कुमार ने बताया कि इस फोन कॉल के महज दो घंटे के अंदर ही सरकार की ओर से आदेश जारी हो गया और गायक के गानों के प्रसारण पर तत्काल रोक लगा दी गई। इसके चलते आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके तमाम लोकप्रिय गीतों को बजाना पूरी तरह बंद कर दिया गया।

सरकारी तंत्र की इस कड़ी पाबंदी के बावजूद आम जनता के बीच गायक का जादू रत्ती भर भी कम नहीं हुआ। श्रोताओं के दिलों पर उनका राज पहले की तरह बना रहा और सिनेमाघरों में उनकी आवाज गूंजती रही। बाद में जब आपातकाल समाप्त हुआ, तब जाकर रेडियो और टेलीविजन पर उनके गानों से यह प्रतिबंध हटाया गया और वे पुनः प्रसारित होने लगे। इस कड़े इम्तिहान ने उनकी एक निडर और स्वाभिमानी कलाकार की छवि को हमेशा के लिए पुख्ता कर दिया।

'जिद्दी' से शुरू हुआ सुरीला सफर और सदाबहार नगमे

किशोर कुमार के संगीत करियर की नींव भी काफी रोचक अंदाज में पड़ी थी। जाने-माने संगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए वर्ष 1948 में आई फिल्म 'जिद्दी' के जरिए उन्हें गायकी का पहला मौका दिया था। इसके बाद उन्होंने दशकों तक भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक यादगार गीतों का तोहफा दिया।

उनके गाए सदाबहार नगमों में 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे सपनों की रानी', 'ये शाम मस्तानी' और 'ओ मेरे दिल के चैन' जैसे गाने शामिल हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं। इसके अलावा 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'पल पल दिल के पास' तथा 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे गीतों ने उन्हें हर पीढ़ी के दिलों में हमेशा के लिए अमर कर दिया।

सवाल-जवाब

किशोर कुमार पर सरकारी प्रसारण माध्यमों ने कब प्रतिबंध लगाया था?
यह प्रतिबंध वर्ष 1975 से 1977 के मध्य देश में लागू आपातकाल के समय लगाया गया था।
किशोर कुमार के गानों पर किन माध्यमों में पाबंदी लगाई गई थी?
आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो और सरकारी टेलीविजन चैनल दूरदर्शन पर उनके गीतों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई थी।
किशोर कुमार के साथ हुए इस घटनाक्रम का खुलासा किसने किया था?
इस पूरे प्रसंग की जानकारी उनके बेटे अमित कुमार ने 'द कपिल शर्मा शो' में बातचीत के दौरान दी थी।
मंत्रालय के अधिकारी ने किशोर कुमार को क्या निर्देश दिया था?
अधिकारी ने गायक को तत्काल अगली सुबह की फ्लाइट से दिल्ली आकर अगले दिन आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का निर्देश दिया था।
किशोर कुमार ने सरकारी अधिकारी को क्या जवाब दिया था?
उन्होंने कहा था कि पहले कोई प्रतिनिधि आकर उनसे बात करे और वे भगवान के कहने पर भी इस तरह बिना बात किए नहीं जा सकते।
बहस होने के कितनी देर बाद प्रतिबंध का आदेश लागू हुआ था?
टेलीफोन पर हुई तीखी बातचीत के करीब दो घंटे के भीतर ही उनके गानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
किशोर कुमार को फिल्मों में गायकी का पहला मौका किस फिल्म से मिला था?
संगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उन्हें वर्ष 1948 में रिलीज हुई फिल्म 'जिद्दी' के जरिए गाने का पहला अवसर दिया था।
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