हिंदी सिनेमा में खलनायक के किरदारों को एक नया आयाम देने वाले गुलशन ग्रोवर की पहचान 'बैड मैन' के रूप में की जाती है. दिल्ली में जन्मे इस मंझे हुए कलाकार ने पर्दे पर अपने खौफनाक और अनूठे अंदाज से करोड़ों दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है. वर्तमान में वे भले ही बेहद भव्य और लग्जरी जिंदगी जी रहे हों, लेकिन इस मुकाम को हासिल करने से पहले उन्होंने गरीबी और मुश्किलों का एक लंबा दौर देखा है. उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन हालात भी मजबूत इरादों के सामने टिक नहीं पाते हैं.
घर-घर जाकर सामान बेचना और पढ़ाई का खर्च उठाना
गुलशन ग्रोवर का जन्म 21 सितंबर 1955 को दिल्ली में हुआ था. उनके बचपन के दिन बेहद मुफलिसी और कड़े संघर्ष के बीच गुजरे. आर्थिक तंगी का आलम यह था कि परिवार के पास स्कूल की फीस भरने तक के पैसे नहीं जुट पाते थे. अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खुद घर-घर जाकर डिटर्जेंट पाउडर और दूसरा घरेलू सामान बेचना शुरू कर दिया. कई मौकों पर स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि उन्हें रात में भूखे पेट ही सोना पड़ता था. इसके बावजूद उन्होंने अपनी स्कूली और आगे की शिक्षा दिल्ली में पूरी की. पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने अपने अभिनय के सपने को सच करने के लिए मुंबई जाने का फैसला किया. वहां एक एक्टिंग स्कूल में दाखिला लेने के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेता अनिल कपूर से हुई, जिसके बाद दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई.
रंगमंच से फिल्मों तक का सफर और राष्ट्रीय सम्मान
अभिनय की दुनिया में गुलशन ग्रोवर ने अपनी शुरुआत थिएटर यानी रंगमंच के जरिए की थी. मंच पर अपने हुनर को तराशने के बाद उन्हें साल 1980 में रिलीज हुई फिल्म 'हम पांच' से बॉलीवुड में पहला मौका मिला. इस डेब्यू के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने विस्तृत फिल्मी सफर में 400 से अधिक फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं. 'राम लखन', 'सौदागर', 'मोहरा', 'हेरा फेरी', 'अवतार', 'क्रिमिनल' और 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' जैसी लोकप्रिय फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों को आज भी दर्शक बेहद चाव से याद करते हैं. सिनेमा में केवल विलेन ही नहीं, बल्कि संवेदनशील किरदारों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की. फिल्म 'आई एम कलाम' में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
निजी जिंदगी में उतार-चढ़ाव और अकेलापन
पर्दे पर लगातार बड़ी सफलताएं हासिल करने के बावजूद गुलशन ग्रोवर का निजी जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा. उन्होंने अपने जीवन में दो बार शादी की, लेकिन दोनों ही शादियां लंबे समय तक नहीं चल सकीं. उनकी पहली शादी साल 1998 में फिलोमिना के साथ हुई थी, जिसका अंत साल 2001 में तलाक के रूप में हुआ. इसके कुछ समय बाद, साल 2003 में उन्होंने कशिश से दूसरा विवाह किया, लेकिन यह रिश्ता भी महज एक साल के भीतर खत्म हो गया. रिश्तों में मिले इन दो बड़े झटकों के बाद वे आज अपने जीवन के इस पड़ाव पर अकेले ही जिंदगी बसर कर रहे हैं.


















