सिनेमा जगत में बाल कलाकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली अभिनेत्री आयशा कपूर ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर कदम रख दिया है। तकरीबन 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने सिनेमाई दुनिया में वापसी की है। अपने बचपन के दिनों में जब उन्होंने दृष्टिहीन और मूक-बधिर बच्ची का बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया था, तब उनके सहज अभिनय ने दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों को भी हैरत में डाल दिया था। अब वह एक परिपक्व कलाकार के तौर पर नई भूमिकाओं के जरिए अपनी पहचान को नए सिरे से स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बचपन की पहचान से आगे बढ़कर नई पारी गढ़ने की तैयारी
आयशा कपूर के सफर में वर्ष 2005 में आई संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई थी। इस परियोजना ने उन्हें महज 11 साल की आयु में प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार दिलवा दिया था। इतनी कम उम्र में मिली जबर्दस्त शोहरत ने उन्हें हर घर में चर्चित चेहरा बना दिया था। इसके चार साल बाद, यानी वर्ष 2009 में वह परजान दस्तूर के साथ 'सिकंदर' नामक फिल्म में नजर आई थीं। हालांकि, उस दौर के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया से एक लंबा विश्राम लेने का फैसला कर लिया।
इतने वर्षों तक कैमरे से दूर रहने के पीछे के कारणों पर चर्चा करते हुए आयशा ने साझा किया कि इस लंबे अंतराल ने उन्हें जीवन और करियर के प्रति एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया है। उनके अनुसार, इतने वर्षों के गैप का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह रहा कि दर्शक अब उन्हें उस नन्हीं बच्ची की छवि के दायरे से बाहर निकालकर एक युवा और स्वतंत्र अदाकारा के रूप में देख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इस बात पर गहरा संतोष भी होता है कि दर्शकों के दिलों में उनके बचपन वाले किरदार का सम्मान आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।
प्रोजेक्ट्स के चुनाव में स्वतंत्रता और अपनी प्राथमिकताओं को अहमियत
बचपन में मिली अचानक और बेपनाह कामयाबी के असर को याद करते हुए आयशा कपूर ने स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में बाहरी लोगों की राय और मशविरे उनके व्यक्तिगत निर्णयों को काफी हद तक प्रभावित करते थे। उस समय कई फिल्म निर्माता और निर्देशक उन्हें नए प्रोजेक्ट्स में शामिल करने के लिए उत्सुक थे, मगर उम्र के उस कच्चे पड़ाव पर वह इंडस्ट्री के तौर-तरीकों और उन प्रस्तावों की गंभीरता को पूरी तरह से नहीं समझ पाती थीं। इस वजह से कई बार आसपास के माहौल और लोगों की बातों का असर उनके कदमों पर पड़ा।
लेकिन अब वक्त के साथ उनके काम करने का फलसफा पूरी तरह बदल चुका है। अभिनेत्री ने साफ किया कि अब वह किसी बाहरी दबाव या सलाह के आधार पर अपनी राह तय नहीं करती हैं। आज वह सिर्फ उन्हीं स्क्रिप्ट्स और किरदारों को स्वीकार करती हैं, जिन्हें निभाने में उन्हें आंतरिक खुशी मिलती है और जिनमें काम करने वाली टीम के साथ उनका रचनात्मक तालमेल बेहतर बैठता है। अपने काम पर अपनी मर्जी और नियंत्रण होना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है।
सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंची नई पारिवारिक कहानी
वर्ष 2009 के बाद से बड़े पर्दे से गायब रहने के दौरान आयशा कपूर एक तमिल वेब सीरीज 'स्वीट कारम कॉफी' में काम करती नजर आई थीं। लेकिन अब हरीश व्यास के निर्देशन में बनी पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'ओम का हरि' के जरिए उनका आधिकारिक सिनेमाई सफर दोबारा शुरू हुआ है। 18 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म उनके करियर की तीसरी मुख्य फीचर फिल्म है।
इस नई रिलीज में उनके साथ अंशुमन झा, रघुवीर यादव और सोनी राजदान जैसे मंझे हुए कलाकारों ने स्क्रीन साझा की है। सेट पर वापसी के रोमांच को बयान करते हुए आयशा ने कहा,
"कैमरे के सामने फिर से लौटना मेरे लिए बेहद शानदार अहसास है."फिलहाल यह फिल्म सिनेमाघरों में चल रही है और दर्शकों की तरफ से इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आयशा को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें अपने हुनर को और अधिक निखारने वाले दिलचस्प मौके लगातार मिलते रहेंगे।



















