आशीष विद्यार्थी का सफर: राष्ट्रीय पुरस्कार से सोशल मीडिया स्टार बनने तकबॉलीवुड
2 घंटे पहले· 4

आशीष विद्यार्थी का सफर: राष्ट्रीय पुरस्कार से सोशल मीडिया स्टार बनने तक

अपने जन्मदिन पर, अनुभवी अभिनेता आशीष विद्यार्थी के प्रेरक सफर को याद किया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बावजूद कभी किराए के लिए संघर्ष किया था और अब एक लोकप्रिय व्लॉगर व सोशल मीडिया स्टार के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी आशीष विद्यार्थी

बड़े पर्दे पर अपनी दमदार आवाज और खलनायक के खूंखार किरदारों से दर्शकों को प्रभावित करने वाले आशीष विद्यार्थी 19 जून को अपना जन्मदिन मनाते हैं। केरल में 1962 में जन्मे आशीष असल जिंदगी में बेहद जीवंत और सरल व्यक्तित्व के धनी हैं। वह सोशल मीडिया की दुनिया में भी एक बड़े सितारे के रूप में उभरे हैं। वे अक्सर अपने पॉडकास्ट में यह कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और यह आपकी सोच को कभी बूढ़ा नहीं कर सकती। आशीष की यह गहरी और सुलझी हुई सोच उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिली है।

शुरुआती जीवन और कला के प्रति रुझान

आशीष के पिता, गोविंद विद्यार्थी, एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने देश के लिए अपना उपनाम तक बदल दिया था। उनकी मां, रेबा विद्यार्थी, एक प्रसिद्ध कथक गुरु थीं। ऐसे कलात्मक माहौल में पले-बढ़े आशीष के मन में बचपन से ही कला के लिए एक विशेष स्थान बन गया था।

संघर्ष से मिली राष्ट्रीय पहचान

दिल्ली के हिंदू कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, आशीष ने अभिनय सीखने के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का रुख किया। वहां उन्होंने मनोज बाजपेयी जैसे कलाकारों के साथ थिएटर में खूब मेहनत की। उनके जीवन में सबसे बड़ा मोड़ साल 1994 में आई फिल्म ‘द्रोहकाल’ थी। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो किसी भी अभिनेता के लिए बहुत गर्व की बात होती है। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस समय उन्हें यह बड़ा सम्मान मिला था, उस दौर में वे मुंबई में रहने के लिए कमरे का किराया भी नहीं चुका पा रहे थे और भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे।

बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफलता

आर्थिक परेशानियों से जूझने के बावजूद आशीष ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने ‘वास्तव’ और ‘इस रात की सुबह नहीं’ जैसी फिल्मों में खलनायक के रूप में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों की ओर रुख किया। तमिल फिल्म ‘दिल’ और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘घिल्ली’ में उनके निभाए गए किरदारों ने उन्हें रातों-रात पूरे दक्षिण भारत में मशहूर कर दिया। उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और बंगाली सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम करके यह साबित कर दिया कि एक सच्चे कलाकार के लिए भाषा कभी बाधा नहीं बन सकती।

डिजिटल दुनिया में नई पहचान

जब कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया थम सी गई थी, तब आशीष विद्यार्थी ने खुद को एक नए रूप में ढाल लिया। उन्होंने नवंबर 2021 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। आज वे एक जाने-माने व्लॉगर हैं, जो देश के कोने-कोने में जाकर वहां के खाने, गलियों और आम लोगों की कहानियों को अपने कैमरे में कैद करते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी और मनोरंजक कहानियां सुनाकर युवाओं के बीच अपनी एक बिल्कुल अलग और ‘कूल’ छवि बना ली है।

हालिया काम और निजी जीवन

हाल ही में आई फिल्म ‘किल’ में उन्होंने एक डाकू और एक भावुक पिता का शानदार किरदार निभाया। वहीं साल 2025 में वे करण जौहर के शो ‘द ट्रेटर्स इंडिया’ में भी नजर आए, जहां युवा पीढ़ी के साथ उनकी बॉन्डिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया। निजी जिंदगी की बात करें, तो 2022 में अपनी पहली पत्नी से अलग होने के बाद उन्होंने 2023 में रूपाली बरुआ से दूसरी शादी की। इस फैसले के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल भी किया गया, लेकिन आशीष ने हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना सही समझा।

सवाल-जवाब

आशीष विद्यार्थी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
आशीष विद्यार्थी का जन्म 19 जून 1962 को केरल में हुआ था।
आशीष विद्यार्थी को किस फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था?
उन्हें 1994 की फिल्म 'द्रोहकाल' में अपने अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
कोरोना महामारी के दौरान आशीष विद्यार्थी ने क्या नया काम शुरू किया?
उन्होंने नवंबर 2021 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया और एक लोकप्रिय व्लॉगर बन गए, जो देश भर में घूमकर खाने और कहानियों को साझा करते हैं। उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी में भी हाथ आजमाया।
आशीष विद्यार्थी के निजी जीवन में हाल ही में क्या बड़ा बदलाव आया?
अपनी पहली पत्नी से 2022 में अलग होने के बाद, उन्होंने 2023 में रूपाली बरुआ से दूसरी शादी की।
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