सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ा देने वाले प्रोजेक्ट के रूप में 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर मंगलवार को सामने आ चुका है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के जरिए सनी देओल और प्रीति जिंटा की लोकप्रिय जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है। फिल्म की मूल कहानी देश के विभाजन के दौर की पीड़ा और अपनों से बिछड़ने के दर्द पर बुनी गई है। ट्रेलर ने दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है और फिल्म के तेवर देखकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं।
आमिर खान फिल्म्स के बैनर तले तैयार हुई इस मूवी का निर्देशन जाने-माने निर्देशक राजकुमार संतोषी ने संभाला है। फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा के साथ-साथ करण देओल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा कलाकारों की लंबी फेहरिस्त में शबाना आजमी, अभिमन्यु सिंह और अली फजल जैसे मंझे हुए नाम भी शामिल हैं। पटकथा और संवादों पर विशेष काम किया गया है, जिन्हें राजकुमार संतोषी ने असगर वजाहत के साथ मिलकर लिखा है।
ट्रेलर में आए कुछ चुनिंदा संवादों ने सोशल मीडिया पर पहले ही हलचल मचा दी है। ऐसे ही एक संवाद में धर्म और इंसानियत पर गहरी चोट की गई है, जहां मां के दर्जे को सबसे ऊपर रखा गया है। फिल्म के एक दृश्य में सनी देओल और प्रीति जिंटा पति-पत्नी की भूमिका में पाकिस्तान जाते हैं, जहां उन्हें आवंटन में मिले मकान में शबाना आजमी द्वारा निभाया गया बुजुर्ग महिला का किरदार पहले से रहता है। स्थानीय लोग उस हिंदू महिला को वहां से भगाना चाहते हैं, लेकिन सिकंदर मिर्जा का किरदार निभा रहे सनी देओल इस अन्याय के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और समाज के ठेकेदारों को करारा जवाब देते हैं।
फिल्म के अन्य संवाद भी काफी वजनदार हैं जो किरदारों के तेवर साफ जाहिर करते हैं। एक अन्य दृश्य में नैतिकता और उसूलों की बात करते हुए कहा गया है कि जान बचाने के लिए अपने ईमान का सौदा नहीं किया जा सकता। इसी तरह इंसानों की नीयत पर सवाल उठाते हुए यह संदेश दिया गया है कि कोई भी मजहब बुरा नहीं होता, बल्कि बुराई इंसान की सोच में होती है। एक्शन और तेवर से भरपूर दृश्यों में चुनौती देते हुए एक और दमदार पंक्ति सुनाई देती है जो दर्शकों का उत्साह बढ़ा देती है।
करण देओल ने इस फिल्म में अपने वास्तविक जीवन के पिता सनी देओल के बेटे जावेद मिर्जा की भूमिका निभाई है। ट्रेलर के एक हिस्से में वे अपने पिता की ताकत और हौसले का जिक्र करते हुए नजर आते हैं। इस संवाद के जरिए वे विरोधियों को चेतावनी देते हैं कि उनके पिता सरहद की परवाह किए बिना सीधा मुकाबला करने की ताकत रखते हैं। पिता और पुत्र की यह ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री फिल्म के मुख्य आकर्षणों में से एक रहने वाली है।
निर्देशक राजकुमार संतोषी अपने शानदार इतिहास के लिए जाने जाते हैं जिन्होंने अपने करियर में घायल, दामिनी, बरसात, घातक, लज्जा और अंदाज अपना अपना जैसी кульट फिल्में दी हैं। इस नई पेशकश में भी उनका वही पुराना और दमदार अंदाज दिखाई दे रहा है जो तीव्र भावनाओं और एक्शन का बेहतरीन मेल है। फिल्म के तकनीकी पक्ष को भी बेहद मजबूत रखा गया है, जिसमें संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। इस बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण की कमान आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने संभाली है।



















