धान की खेती करने वाले अन्नदाताओं को खरपतवारों पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष सावधानी बरतनी बेहद जरूरी होती है। धान के खेत से अवांछित पौधों को हटाने के वास्ते अक्सर विभिन्न रसायनों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन पौधों की उम्र 25 दिन से अधिक हो जाने पर बिस्पायरीबैक-सोडियम (Bispyribac-sodium 10% SC) का छिड़काव करना भारी नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने इस संबंध में स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि यह रासायनिक स्प्रे तय समय सीमा के बाद किया जाए, तो यह केवल खरपतवारों तक सीमित नहीं रहता बल्कि धान के मुख्य पौधों को भी गंभीर रूप से क्षति पहुंचाता है। इस गलती के कारण फसल की वृद्धि पूरी तरह बाधित हो जाती है, पौधे पीले पड़ने लगते हैं और रसायन के अत्यधिक दबाव की वजह से अंततः पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान भाई फसल के 25 दिन पूरे होने के पश्चात सही तकनीक और सुरक्षित विकल्पों का ही चयन करें।
बिस्पायरीबैक-सोडियम के प्रयोग का सही समय
कृषि जानकारों के अनुसार बिस्पायरीबैक-सोडियम एक प्रभावी सिस्टमिक खरपतवारनाशी है, जिसका सर्वोत्तम परिणाम खेत में रोपाई या सीधी बुवाई के ठीक 15 से 20 दिन के भीतर ही देखने को मिलता है। यह वह अवधि होती है जब खरपतवार अपनी शुरुआती 2 से 4 पत्तियों की अवस्था में होते हैं। हालांकि, जब फसल 25 दिन का सफर तय कर लेती है, तब तक खरपतवार काफी सख्त और मजबूत हो चुके होते हैं, जबकि धान के पौधे कल्ले फूटने के संवेदनशील चरण में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे समय में इस शक्तिशाली रसायन का छिड़काव करना पौधों की सेहत के लिए हानिकारक होता है। यदि छिड़काव में देरी हो चुकी हो, तो किसानों को रासायनिक विकल्पों के पीछे भागने के बजाय पारंपरिक रूप से हाथ से निराई-गुड़ाई करने या फिर किसी सुरक्षित खरपतवार नाशक को ही आजमाना चाहिए ताकि पौधे स्वस्थ बने रहें।
देरी से रसायन छिड़कने के बड़े नुकसान
निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद बिस्पायरीबैक-सोडियम का उपयोग करने से धान के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। पौधों की लंबाई रुक जाती है, उनकी पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और कल्ले निकलने की नैसर्गिक प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है। इसके अलावा, जो खरपतवार आकार में बड़े और कठोर हो चुके होते हैं, उन पर इस दवा का असर नगण्य या बहुत कम रह जाता है। इस स्थिति में किसानों की मेहनत, समय और पूंजी तीनों व्यर्थ चली जाती है, और कमजोर पड़ चुके पौधे अंततः उपज में भारी कमी का कारण बनते हैं।
25 दिन के बाद खरपतवार नष्ट करने के सुरक्षित तरीके
यदि आपके धान के खेत में फसल की उम्र 25 दिन से अधिक हो चुकी है, तो हाथ से निराई-गुड़ाई करना सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित उपाय माना जाता है। जिन खेतों में धान की रोपाई पंक्तियों में की गई है, वहां कोनो वीडर (Cono Weeder) का इस्तेमाल करना एक बेहतरीन विकल्प है। इसके जरिए खरपतवार मिट्टी के अंदर ही दबकर हरी खाद में तब्दील हो जाते हैं और साथ ही पौधों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भी पहुंचने लगती है। यदि खेत में मजदूरों की कमी महसूस हो, तो कृषि विशेषज्ञों के परामर्श से चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए 2,4-D या फिर मोथा जैसी समस्या के खात्मे के लिए पाइराजोसल्फ्यूरॉन का ही नियंत्रित रूप से छिड़काव करना चाहिए।
फसल को दोबारा हरा-भरा और स्वस्थ बनाने के उपाय
खरपतवारों की समस्या से निजात मिलने के बाद फसल को झटके से उबारना और उसकी खोई हुई ताकत वापस लाना बेहद आवश्यक होता है। इसके वास्ते खेत में पानी की हल्की परत बनाकर रखें और प्रति एकड़ के हिसाब से 15 से 20 किलोग्राम यूरिया के साथ 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट का मिश्रण मिलाकर खेतों में डालें। इसके अतिरिक्त, एनपीके (19:19:19) का छिड़काव करने से पौधों में तेजी से हरियाली लौट आती है। जब फसल कल्ले फूटने के दौर से गुजर रही हो, तब उचित पोषण मिलने से उसका सारा तनाव समाप्त हो जाता है और पौधों की रफ्तार तीव्र हो जाती है।
बेहतरीन और रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन के लिए जरूरी सुझाव
एक शानदार और बंपर फसल हासिल करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि खेत में जल निकासी और सिंचाई का प्रबंधन पूरी तरह संतुलित रहे। समय-समय पर विभिन्न प्रकार के कीटों और बीमारियों की निगरानी करते रहना भी किसानों के लिए अनिवार्य है। विशेष तौर पर जब धान के पौधे कल्ले फूट रहे हों या बालियां तैयार हो रही हों, तब खेत में नमी की कमी बिल्कुल नहीं आनी चाहिए। संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर की गई सही देखभाल के बल पर खरपतवारों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और आपको धान की फसल से असाधारण एवं रिकॉर्ड तोड़ पैदावार प्राप्त होगी।



















