बंगाली सिनेमा के जाने-माने निर्देशक और तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित राजा सेन का रविवार को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। हाल ही में स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से बंगाली फिल्म उद्योग, टेलीविजन जगत और वृत्तचित्र निर्माण के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और शल्य चिकित्सा
राजा सेन की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं कई वर्ष पूर्व आरंभ हुई थीं। उनकी फिल्म 'माया मृदंग' के फिल्मांकन के दौरान सेट पर अचानक गिरने से उनकी पीठ में गंभीर चोट आ गई थी। यद्यपि प्रारंभिक चरण में यह चोट अत्यंत गंभीर प्रतीत नहीं हुई थी, किंतु समय बीतने के साथ इसका नकारात्मक प्रभाव उनके शारीरिक संचालन और चलने-फिरने की क्षमता पर पड़ने लगा। इस वर्ष के प्रारंभ में उनके शरीर के निचले भाग में अत्यधिक कमजोरी आ गई थी। चिकित्सकों द्वारा की गई गहन जांच में एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार का पता चला, जिसके उपचार हेतु फरवरी माह में उनकी एक बड़ी सर्जरी की गई। शल्य चिकित्सा के पश्चात कुछ समय के लिए उनकी सेहत में आंशिक सुधार देखा गया था, परंतु हाल के सप्ताहों में उनका स्वास्थ्य पुन: अत्यधिक बिगड़ गया और उन्हें आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
दूरदर्शन से फीचर फिल्मों तक का शानदार सफर
10 नवंबर 1955 को कोलकाता में जन्मे राजा सेन ने अपने करियर की शुरुआत बंगाली टेलीविजन उद्योग से की थी। दूरदर्शन धारावाहिकों के माध्यम से पहचान बनाने के बाद उन्होंने मुख्यधारा की फीचर फिल्मों का निर्देशन आरंभ किया। उन्होंने 'आदर्श हिंदू होटल', 'आरोग्य निकेतन' और 'ताराशंकरर छोटो गल्पो' जैसे अत्यंत लोकप्रिय और प्रशंसित धारावाहिकों का सफल निर्देशन किया, जिन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से मिला सम्मान
राजा सेन को अपने उत्कृष्ट सिनेमाई योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीन बार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया। वर्ष 1996 में प्रदर्शित उनकी पहली फीचर फिल्म 'दामु' ने सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। इस फिल्म में रघुवीर यादव, सत्य बनर्जी और सब्यसाची चक्रवर्ती जैसे दिग्गज कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके उपरांत उनकी फिल्म 'आत्मीय स्वजन' को पारिवारिक कल्याण विषय पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, विख्यात रवींद्र संगीत गायिका सुचित्रा मित्रा के जीवन एवं कला पर आधारित उनकी वृत्तचित्र फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ कला एवं सांस्कृतिक फिल्म श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया।
फिल्मों का विषय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
राजा सेन के लंबे और समृद्ध करियर में कई यादगार फीचर फिल्में शामिल हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'चक्रव्यूह', 'देश', 'देबीपक्ष', 'कृष्णकांतर विल', 'तिनमूर्ति', 'लैबोरेटरी', 'मौबोने आज', 'कर्नल' और 'माया मृदंग' सम्मिलित हैं। उनकी सिनेमैटिक शैली मुख्य रूप से जटिल मानवीय संबंधों, सामाजिक यथार्थ और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के ताने-बाने पर आधारित होती थी। वे अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी पापिया सेन तथा दो बेटियों सुभाश्री सेन और श्रेयोशी सेन का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।



















