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NEET प्रदर्शन FIR मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची नई अर्जी, निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई की मांगभारत
16 अग॰ 2026, 4:51 pm (1 दिन पहले)· 2

NEET प्रदर्शन FIR मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची नई अर्जी, निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई की मांग

जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर की जांच में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आयोजित छात्र प्रदर्शन के बाद दर्ज प्राथमिकियों (FIR) को लेकर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है, जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जांच में किसी भी तरह के बाहरी या राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से गुहार लगाई है कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से मामले की तहकीकात आगे बढ़ाने दी जाए।

20 जुलाई के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर 'संसद चलो' आंदोलन के तहत छात्र जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। यह प्रदर्शन NEET परीक्षा के पर्चे लीक होने के दावों और देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किया गया था। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के आरोप लगे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कई प्रदर्शनकारियों और छात्रों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थीं।

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सुप्रीम कोर्ट की 3 अगस्त की टिप्पणी और नया मोड़

मामले में नया मोड़ सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई के बाद आया है। 3 अगस्त को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि नियमानुसार और कानून के प्रावधानों के तहत छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को बंद या वापस लिया जा सकता है। अदालत के इस रुख के बाद अब यह नई याचिका सामने आई है, जिसमें जांच की निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें

अदालत के समक्ष दाखिल नई अर्जी में स्पष्ट किया गया है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़ी प्राथमिकियों की जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच जनहित और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए आवश्यक है। इसलिए दिल्ली पुलिस की जांच टीम को बिना किसी दबाव या प्रभाव के कानून के अनुसार साक्ष्य जुटाने और जांच प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट में क्या नई याचिका दायर की गई है?
याचिका में जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद दर्ज प्राथमिकियों की जांच में किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की मांग की गई है।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आयोजन किसने किया था?
यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 'संसद चलो' आह्वान के तहत आयोजित किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकियां क्यों दर्ज की थीं?
प्रदर्शन के दौरान हिंसा होने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के आरोपों के कारण दिल्ली पुलिस ने छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 अगस्त की सुनवाई में क्या कहा था?
सर्वोच्च अदालत ने 3 अगस्त को कहा था कि कानून के नियमानुसार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को बंद या वापस किया जा सकता है।
नई याचिका में दिल्ली पुलिस जांच के संबंध में क्या मुख्य मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि दिल्ली पुलिस को किसी भी बाहरी दबाव के बिना कानून के अनुसार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने दी जाए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी का दाखिल होना यह दर्शाता है कि पुलिस जांच और न्यायपालिका के बीच का संतुलन कितना संवेदनशील हो गया है। 3 अगस्त को अदालत की ओर से एफआईआर वापसी की संभावना जताए जाने के बाद, अब जांच में बाहरी हस्तक्षेप रोकने की मांग ने कानूनी प्रक्रिया को एक नया मोड़ दे दिया है। एक क्राइम रिपोर्टर के तौर पर, यह देखना अहम होगा कि शीर्ष अदालत इस स्वतंत्र जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि इससे भविष्य के छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई के दायरे पर सीधा असर पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला केवल एक विरोध प्रदर्शन की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन प्रणाली, कानून के शासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच के नाजुक समीकरण को परिभाषित करेगा। जब सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही एफआईआर वापसी के संकेत दिए हैं, तब यह नई याचिका इस बात पर बल देती है कि जांच प्रक्रिया कार्यपालिका के अनुचित प्रभाव से मुक्त हो। आने वाले दिनों में शीर्ष अदालत का यह रुख तय करेगा कि नीतिगत असंतोष के मामलों में पुलिस किस प्रकार बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करे।

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