बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला बाप-बेटों का जादू, 7 फिल्में हुईं फ्लॉप, एक का बजट था 85 करोड़ रुपयेबॉलीवुड
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बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला बाप-बेटों का जादू, 7 फिल्में हुईं फ्लॉप, एक का बजट था 85 करोड़ रुपये

बॉलीवुड के कई पिता-निर्देशकों ने अपने बेटों को स्थापित करने के लिए भारी बजट की फिल्में बनाईं, लेकिन दर्शकों ने इन सात फिल्मों को सिरे से खारिज कर दिया और सभी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रहीं।

बॉलीवुड में कई निर्देशकों और कलाकारों ने अपने बेटों के करियर को संवारने या उन्हें बड़े पर्दे पर मजबूती से खड़ा करने के मकसद से फिल्में बनाई हैं। कुछ फिल्मों में तो पिता और बेटे की जोड़ी एक साथ नजर भी आई। इस लेख में हम आपको पिता-पुत्र की ऐसी सात फिल्मों की कहानी बता रहे हैं, जो मोटे बजट और सितारों की चमक के बावजूद दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं और एक के बाद एक सभी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गईं।

जानी दुश्मन

निर्देशक राजकुमार कोहली ने अपने बेटे अरमान कोहली की बॉलीवुड में दोबारा वापसी कराने के इरादे से साल 2002 में यह मल्टीस्टारर फिल्म तैयार की थी। अक्षय कुमार, सनी देओल और सुनील शेट्टी जैसे दिग्गज सितारों से सजी इस फिल्म पर करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। घटिया स्पेशल इफेक्ट्स, ढीली कहानी और अरमान कोहली के इच्छाधारी नाग वाले किरदार की वजह से दर्शकों ने फिल्म का खूब मजाक बनाया, और नतीजा यह रहा कि यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई।

लव स्टोरी 2050

साल 2008 में रिलीज हुई इस साइंस-फिक्शन फिल्म के जरिए हैरी बावेजा ने अपने बेटे हरमन बावेजा को बतौर मुख्य अभिनेता पेश किया था। प्रियंका चोपड़ा जैसी बड़ी अभिनेत्री और हॉलीवुड स्तर के स्पेशल इफेक्ट्स के दावे वाली इस फिल्म पर बेहिसाब पैसा खर्च किया गया। करीब 40 करोड़ रुपये के भारी बजट में बनी यह भविष्य की कहानी दर्शकों की समझ से परे साबित हुई। कमजोर पटकथा ने हरमन के डेब्यू को पूरी तरह नाकाम कर दिया।

काइट्स

फिल्ममेकर राकेश रोशन ने अपने बेटे ऋतिक रोशन के साथ मिलकर साल 2010 में 'काइट्स' बनाई। अनुराग बसु के निर्देशन में बनी यह उस दौर की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी, जिसका बजट 80 करोड़ रुपये था। मैक्सिकन अभिनेत्री बारबरा मोरी के साथ ऋतिक की केमिस्ट्री और शानदार विजुअल्स के बावजूद फिल्म का आधे से ज्यादा हिस्सा अंग्रेजी और स्पैनिश भाषा में होने के कारण भारतीय दर्शक इससे जुड़ नहीं पाए, और यह बड़ी असफलता बनकर रह गई।

बेशरम

अभिनव कश्यप के निर्देशन में साल 2013 में आई 'बेशरम' में पहली बार रणबीर कपूर अपने माता-पिता ऋषि कपूर और नीतू कपूर के साथ पर्दा साझा करते दिखे थे। करीब 85 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म से पिता-पुत्र की जोड़ी का जादू चलने की पूरी उम्मीद थी। मगर रणबीर का मवाली अंदाज वाला किरदार और फिल्म का लाउड कॉमेडी अंदाज दर्शकों को रास नहीं आया। अच्छी शुरुआती ओपनिंग के बाद खराब माउथ पब्लिसिटी के चलते फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम हो गई।

मौसम

पंकज कपूर के निर्देशन में बनी साल 2011 की यह रोमांटिक-ड्रामा फिल्म थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे शाहिद कपूर को मुख्य अभिनेता के रूप में कास्ट किया था। फिल्म में शाहिद के अपोजिट सोनम कपूर नजर आई थीं। करीब 40 करोड़ रुपये के बड़े बजट में बनी इस फिल्म की कहानी कश्मीर के दंगों से लेकर कारगिल युद्ध जैसी वास्तविक घटनाओं के बीच पनपती एक अधूरी प्रेम कहानी को दर्शाती है। बेहतरीन संगीत और शाहिद के एयरफोर्स पायलट वाले लुक की सराहना तो हुई, लेकिन बेहद धीमी रफ्तार और खिंची हुई पटकथा के कारण दर्शकों ने इसे ठुकरा दिया और यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई।

जीनियस

'गदर' जैसी ब्लॉकबस्टर देने वाले निर्देशक अनिल शर्मा ने साल 2018 में अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को मुख्य हीरो के रूप में लॉन्च करने के लिए 'जीनियस' बनाई थी। उत्कर्ष बचपन में 'गदर' में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके थे। 'जीनियस' में रॉ एजेंट की कहानी के साथ सस्पेंस, एक्शन और रोमांस का तड़का लगाया गया था, लेकिन बेहद कमजोर कथानक के कारण फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह विफल रही।

पल पल दिल के पास

साल 2019 में आई इस रोमांटिक ड्रामा के जरिए सनी देओल ने अपने बेटे करण देओल को बॉलीवुड में लॉन्च किया था। खुद सनी देओल ने इसका निर्देशन किया और अपने बेटे की भव्य शुरुआत के लिए दिल खोलकर पैसा खर्च किया। खूबसूरत लोकेशंस और अच्छे गानों के बावजूद करण देओल की कमजोर अदाकारी और फीकी प्रेम कहानी के चलते फिल्म सिनेमाघरों में कोई कमाल नहीं दिखा पाई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही।

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