धूम ताना ता धूम ता ता ना ना ना… यह पंक्तियां सुनते ही साल 2007 में रिलीज हुई निर्देशक फराह खान की फिल्म ओम शांति ओम का लोकप्रिय गाना जेहन में ताजा हो जाता है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के साथ ही अपने गानों के जरिए भी दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। हालांकि, इस ब्लॉकबस्टर ट्रैक को तैयार करने के पीछे एक ऐसा दिलचस्प किस्सा छिपा है, जो दिग्गज संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के सदस्य प्यारेलाल की नाराजगी से जुड़ा हुआ था।
फिल्म के इस विशेष गाने को बिल्कुल पुराने दौर के क्लासिक संगीत के अंदाज में पर्दे पर उतारने का फैसला किया गया था। इस मकसद के लिए मेकर्स ने संगीतकार जोड़ी विशाल-शेखर से संपर्क साधा था। गाने की भव्यता बढ़ाने के लिए विशाल-शेखर ने लगभग 200 संगीतकारों को एक साथ लेकर इस धुन को रिकॉर्ड करने की योजना बनाई। पुरानी शैली और उस दौर की बारीकियों को सही ढंग से समझने के लिए उन्हें एक अनुभवी मार्गदर्शक की सख्त आवश्यकता महसूस हुई, जिसके चलते उन्होंने प्यारेलाल से सहायता का आग्रह किया।
प्यारेलाल ने न केवल उनका प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार किया, बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा भी समझाई। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया था कि इस स्तर के काम के लिए तीन से चार दिन की रिहर्सल और इतने ही दिन रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में लगेंगे। उनकी सलाह के अनुसार ही पूरी टीम ने निर्देशों का सख्ती से पालन किया। ढोल, तबला, सितार और गिटार जैसे पारंपरिक और आधुनिक वाद्ययंत्रों के साथ बिना किसी अंतराल के लगातार चौदह घंटे तक कलाकारों ने अभ्यास और रिकॉर्डिंग का सिलसिला जारी रखा, जहां किसी ने भी काम के दौरान विश्राम तक नहीं लिया।
मेकर्स ने इस गाने में वीएफएक्स तकनीक का अनूठा इस्तेमाल करते हुए अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को सुनील दत्त और राजेश खन्ना जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ पुराने जमाने के फ्रेम में बखूबी फिट किया था। गाने की शूटिंग और धुन अपने समय के हिसाब से बेहद शानदार बन पड़ी थी, लेकिन असली विवाद तब खड़ा हुआ जब ट्रैक की फाइनल मिक्सिंग का चरण आया। प्यारेलाल को न तो मिक्सिंग के वक्त स्टूडियो बुलाया गया और न ही बाद में जारी हुई म्यूजिक सीडी और कैसेट पर उनका नाम बतौर क्रेडिट छापा गया।
इस प्रकार की अनदेखी से प्यारेलाल खासे आहत और नाराज हुए। इस पूरे वाकये का विस्तृत विवरण फिल्म के लेखक मुश्ताक शेख द्वारा लिखी गई पुस्तक द मेकिंग ऑफ ओम शांति ओम में मिलता है। पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि प्यारेलाल ने अपनी नाराजगी जताते हुए एक बेहद तीखी और सटीक बात कही थी कि जब लोग इस गाने को सुनेंगे तो वे तुरंत पहचान जाएंगे कि इसमें लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का स्पर्श है, लेकिन बेटा जब बिरयानी बनाते हो तो उसमें गोश्त डालना कभी नहीं भूलते।
जब यह गंभीर बात अभिनेता शाहरुख खान तक पहुँची, तो उन्होंने मामले की नजाकत को समझते हुए बिना किसी देरी के खुद प्यारेलाल से मुलाकात की। उनके साथ-साथ संगीतकार जोड़ी विशाल-शेखर ने भी अपनी इस बड़ी चूक को स्वीकार किया और समय पर उचित श्रेय न देने के लिए उनसे खेद प्रकट करते हुए माफी मांगी। इस तरह से इस अनबन को सुलझाया गया और इस ऐतिहासिक गाने से जुड़ी कड़वाहट दूर की गई।




















