हिंदी सिनेमा के 1990 के दशक में अभिनेता दीपक तिजोरी ने अपनी बेमिसाल अदाकारी से एक खास पहचान बनाई थी। अपनी शानदार फिल्मों के अलावा, उनके करियर से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा भी है जिसने बॉलीवुड के इतिहास को बदल दिया। सुपरहिट थ्रिलर फिल्म बाजीगर का शुरुआती विचार दीपक तिजोरी ने ही निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान के सामने रखा था। उन्होंने एक हॉलीवुड फिल्म देखने के बाद इस कहानी की योजना बनाई थी। हालांकि यह फिल्म बाद में शाहरुख खान के पास चली गई और उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, लेकिन दीपक तिजोरी के मन में इस बदलाव को लेकर कभी कोई कड़वाहट या शिकवा नहीं रहा।
हॉलीवुड फिल्म से मिली थी बाजीगर की प्रेरणा
बाजीगर फिल्म बनने का यह अनोखा किस्सा तब शुरू हुआ जब दीपक तिजोरी ने हॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म अ किस बिफोर डाइंग देखी। इस थ्रिलर फिल्म की कहानी दीपक तिजोरी को बेहद पसंद आई और उन्हें लगा कि इसका हिंदी रूपांतरण भारतीय दर्शकों के लिए शानदार रहेगा। वह खुद इस कहानी में मुख्य और अहम किरदार निभाना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने निर्देशक अब्बास-मस्तान से मुलाकात की और उनके सामने पूरी कहानी का खाका प्रस्तुत किया। अब्बास-मस्तान को यह आइडिया बहुत पसंद आया और शुरुआती बातचीत के बाद ऐसा लग रहा था कि फिल्म दीपक तिजोरी को लेकर ही बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने प्रसिद्ध निर्माता पहलाज निहलानी से भी चर्चा की थी और फिल्म पर बात काफी आगे बढ़ चुकी थी।
दीपक तिजोरी की जगह शाहरुख खान का चयन और दोस्ती
प्रोजेक्ट की शुरुआती तैयारियों के बीच दीपक तिजोरी को अचानक पता चला कि अब्बास-मस्तान इस विषय को लेकर कुछ अन्य निर्माताओं के साथ भी विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसी दौरान फिल्म के मुख्य किरदार के लिए शाहरुख खान का नाम सामने आया। उस समय शाहरुख खान और दीपक तिजोरी आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। अपने खुद के दिए गए विचार पर किसी और अभिनेता के नाम की चर्चा सुनकर दीपक तिजोरी हैरान जरूर हुए, लेकिन उन्होंने इस बात पर कोई विवाद खड़ा नहीं किया।
शाहरुख खान ने भी अपनी दोस्ती और नैतिकता का परिचय देते हुए तब तक फिल्म के लिए सहमति नहीं दी, जब तक कि दीपक तिजोरी के साथ स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो गई। इसके बाद दीपक तिजोरी ने खुद अपने दोस्त शाहरुख खान को बाजीगर में काम करने की सलाह दी। दीपक तिजोरी का मानना था कि शायद किस्मत को यही मंजूर था और बाजीगर की सफलता शाहरुख खान के नसीब में ही लिखी थी। यह फिल्म आगे चलकर शाहरुख खान के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई, और दीपक तिजोरी ने पूरे मामले को बहुत ही बड़प्पन और सकारात्मकता के साथ स्वीकार किया।
रंगमंच से सिनेमा तक दीपक तिजोरी का शुरुआती सफर
दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिनय के प्रति उनका रुझान बढ़ा और उन्होंने थिएटर के माध्यम से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की। उस दौर में बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड या पारिवारिक गॉडफादर के हिंदी फिल्म उद्योग में जगह बनाना बेहद कठिन माना जाता था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते रहे। उन्होंने शुरुआती दौर में छोटे-छोटे रोल स्वीकार किए और अपनी मेहनत के बल पर धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
साल 1990 में रिलीज हुई संगीतमय फिल्म आशिकी दीपक तिजोरी के करियर के लिए सबसे बड़ी पहचान लेकर आई। इस फिल्म की अपार सफलता ने उन्हें दर्शकों के बीच मशहूर कर दिया। इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मों में काम किया। दिल है कि मानता नहीं, जो जीता वही सिकंदर, खिलाड़ी और कभी हां कभी ना जैसी यादगार फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। 1990 का दशक उनके पूरे अभिनय करियर का सबसे सफल और सुनहरा दौर माना जाता है।
1990 के दशक की यादगार फिल्में और निर्देशन का रुख
अभिनय के क्षेत्र में अपनी मजबूत छाप छोड़ने के बाद दीपक तिजोरी ने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने सिर्फ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। निर्देशक के रूप में उन्होंने ओप्स!, टॉम, डिक एंड हैरी और दो लफ्जों की कहानी जैसी अलग-अलग जॉनर की फिल्मों का निर्देशन किया। अभिनय और निर्देशन दोनों ही विधाओं में सक्रिय रहते हुए दीपक तिजोरी ने भारतीय सिनेमा में अपना एक विशिष्ट और सम्मानित स्थान बनाया।



















