बिट्टर क्रिसमस रिव्यू (Bitter Christmas review) के माध्यम से दर्शक सिनेमा के एक बेहद जटिल और कलात्मक पहलू से रूबरू होते हैं। कहानी की शुरुआत साल 2004 से होती है, जहाँ मुख्य किरदार एल्सा (बारबरा लेनी) को दिखाया गया है। एल्सा एक विज्ञापन निर्देशक और कभी-कभार फिल्में बनाने वाली निर्देशक हैं, जो क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान गंभीर माइग्रेन के दर्द से परेशान रहती हैं। इस कठिन समय में उनके मददगार बॉयफ्रेंड बोनिफेसियो (पैट्रिक क्रियाडो), जो एक फायरफाइटर और स्ट्रिपर के रूप में काम करते हैं, उनकी देखभाल करते हैं। बीमारी से कुछ हद तक उबरने के बाद एल्सा अपनी सहेलियों से संपर्क साधती हैं। इनमें पेट्रीशिया (विक्टोरिया लुएंगो) शामिल हैं जो अपने धोखेबाज पति के कारण पारिवारिक संकट झेल रही हैं, और नतालिया (मिलेना स्मिट) जो अपने बेटे को खोने के गम में डूबी एक दुखी मां हैं।
काल्पनिक और वास्तविक दुनिया का मेल
कहानी में जल्द ही एक मुख्य मोड़ आता है, जब यह सामने आता है कि एल्सा और उनके आसपास के लोग वास्तव में स्वतंत्र किरदार नहीं हैं। वे सभी राउल (लियोनार्डो स्बारालिया) नाम के एक फिल्ममेकर की नई स्क्रिप्ट की रचना हैं। राउल अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की उलझनों और समस्याओं को इस पटकथा में ढाल रहे हैं। जब उनकी सहायक मोनिका (ऐताना सांचेज़-गिजोन) निजी कारणों से काम छोड़कर चली जाती हैं, तो राउल अपने बॉयफ्रेंड सांटी (किम गुतिएरेज़) पर निर्भर हो जाते हैं। अपनी काल्पनिक दुनिया के रचयिता के रूप में राउल अपनी असली जिंदगी की परिस्थितियों के अनुसार एल्सा की कहानी का रुख बदलते हैं। जब भी राउल को अपने करीबियों के बारे में कोई नई बात पता चलती है, तो एल्सा और उसकी सहेलियों की किस्मत भी अचानक बदल जाती है।
कलाकार की नैतिक कमियों पर रोशनी
कहानी के भीतर कहानी की यह मेटाफिक्शनल संरचना अलमोदोवार के निर्देशन की पहचान रही है। राउल के किरदार के जरिए फिल्म यह दिखाती है कि एक रचनाकार एक आकर्षक कहानी गढ़ने के लिए किस तरह अपने दोस्तों और परिजनों के निजी अनुभवों का इस्तेमाल करता है। राउल अपने किरदारों के साथ खिलवाड़ करते हैं और अपनों की भावनाओं को अपनी स्क्रिप्ट का हिस्सा बनाते हैं। फिल्म खूबसूरत अपार्टमेंट्स में रहने वाले आकर्षक लोगों की दिलचस्प बातचीत को उजागर करती है, जो किसी ठोस नतीजे तक पहुंचे बिना आगे बढ़ती रहती है।
बेहतरीन संवाद लेकिन कमजोर अंत
फिल्म का सबसे मजबूत पहलू इसके तीखे और सधे हुए संवाद हैं। बेहतरीन अदाकारी और किरदारों के बीच की बातचीत दर्शकों को बांधे रखती है। हालांकि, फिल्म किसी ठोस और संतोषजनक क्लाइमेक्स तक पहुंचने में असफल रहती है। एक कलाकार के समझौतों को पेश करना और जिंदगी व कला के बीच के अंतर को धुंधला करना अपनी जगह सही है, लेकिन कहानी का खुला अंत दर्शकों को थोड़ा निराश कर सकता है। इसके बावजूद संवाद शैली और किरदारों की गहराई इस फिल्म को खास बनाती है।


















