सिनेमा जगत में साल 2000 की चर्चित फिल्मों का जिक्र होता है, तो शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय की मुख्य भूमिका वाली फिल्म जोश का नाम जरूर सामने आता है। इस फिल्म के निर्देशक मंसूर खान थे और इसकी कहानी, गाने तथा कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। इस फिल्म में एक्टर पुनीत वशिष्ठ ने भी अभिनय किया था और वे ईगल गैंग के सदस्य के रूप में नजर आए थे। फिल्म में उनका किरदार शाहरुख खान के पात्र मैक्स के दोस्त का था। हाल ही में पुनीत वशिष्ठ ने इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि कैसे उनके कई बेहतरीन सीन एडिटिंग के दौरान हटा दिए गए थे।
शाहरुख खान को लेकर क्या बोले पुनीत वशिष्ठ
पुनीत वशिष्ठ ने पोन्नम सचदेवा के साथ बातचीत के दौरान शाहरुख खान को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वे शाहरुख खान को एक अभिनेता के बेटे होने के नाते बहुत करीब से समझ सकते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे शाहरुख खान को महान अभिनेता की श्रेणी में नहीं रखते, लेकिन वे उन्हें एक बेहद रचनात्मक और शक्तिशाली सुपरस्टार मानते हैं जो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना अच्छी तरह जानते हैं। उस दौर में भाई-भतीजावाद या नेपोटिज्म का मुद्दा आज की तरह आक्रामक रूप से सामने नहीं आया था, हालांकि इसकी शुरुआत हो चुकी थी और इंडस्ट्री में कुछ समीकरण बनने लगे थे।
जंप वाले सीन कटने और कम उम्र की नासमझी का जिक्र
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए पुनीत वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने शाहरुख खान को डांस की ट्रेनिंग भी दी थी। उन्होंने दावा किया कि फिल्म जोश के दौरान उनके कई दृश्यों को इसलिए छांट दिया गया क्योंकि शाहरुख खान उनकी ऊर्जा से वाकिफ थे। जब निर्देशक मंसूर खान एक्शन शॉट फिल्माते थे, तो शाहरुख खान अपनी ऊर्जा के लिए जाने जाते थे, जहाँ वे 10 फीट की छलांग लगाते थे, वहीं पुनीत वशिष्ठ बिना किसी खास प्रयास के 14 फीट ऊंची छलांग लगा देते थे। उनका कहना था कि जब स्क्रीन पर सारा ध्यान उनकी तरफ जाने लगा, तो उनके हिस्सों को काट दिया गया। पुनीत ने यह भी कहा कि अगर वे उस स्थिति में होते, तो शायद वे भी ऐसा ही कदम उठाते, लेकिन उनका स्वभाव वैसा नहीं है। उस समय उनकी उम्र महज 20 साल थी और उनकी नासमझी यह थी कि वे जो कुछ खो चुके थे, सिर्फ उसी पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, बजाए इसके कि उन्हें उस फिल्म से क्या हासिल हुआ था।
डिप्रेशन और शराब की लत का सामना
पुनीत वशिष्ठ ने खुलकर बताया कि उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री के भीतर सक्रिय कुछ गुटों और कैंप्स की वजह से उनकी प्रतिभा को खुलकर सामने आने का मौका नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया। भरपूर हुनर और आत्मविश्वास होने के बावजूद उन्हें अपने कौशल को साबित करने के उचित अवसर नहीं मिल पाए। इस कड़े संघर्ष और उपेक्षा के कारण वे गहरे मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन और शराब की लत के दलदल में फंसते चले गए। हालांकि, अब इतने साल बीत जाने के बाद वे उस चुनौतीपूर्ण दौर को अपनी जिंदगी की यात्रा का एक अहम हिस्सा मानते हैं और उनका मानना है कि यह सब सीखने की प्रक्रिया का ही एक भाग था।



















