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पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार आफत के बीच बदरीनाथ मार्ग ठप, देहरादून और नैनीताल सहित सभी जिलों के लिए मौसम चेतावनी जारीउत्तराखंड
28 अग॰ 2026, 5:25 am (2 घंटे पहले)· 3

पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार आफत के बीच बदरीनाथ मार्ग ठप, देहरादून और नैनीताल सहित सभी जिलों के लिए मौसम चेतावनी जारी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे अलकनंदा नदी के कटाव से जोशीमठ के पास बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा बह गया और चमोली में चट्टानें गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में राज्य के सभी 13 जिलों में तेज बौछारों तथा अत्यंत भारी वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।

उत्तराखंड के पहाड़ी भूभाग में मानसून के आक्रामक होते ही जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम तेजी से बढ़ चुका है। सीमांत जिले चमोली में लगातार जारी बारिश के कारण नंदनगर और बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते सैकड़ों तीर्थयात्रियों का आवागमन ठप पड़ गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों के लिए अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और अधिक तीव्र होंगी, जिससे पर्वतीय ढलानों और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और भूस्खलन की स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

चमोली में भूस्खलन का कहर और बदरीनाथ हाईवे पर कटाव से यातायात प्रभावित

सीमांत जनपद चमोली में मानसूनी आफत की सबसे तीव्र मार देखने को मिली है, जहां नंदनगर क्षेत्र में भारी मूसलाधार बारिश के चलते अचानक स्थिति बिगड़ गई। नंदनगर बाजार के ठीक ऊपरी हिस्से में स्थित नंदनगर-सुतोल सड़क मार्ग पर पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया और विशालकाय पत्थर तथा भारी मलबा सड़क पर गिर पड़े। जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त मार्ग से कई वाहन गुजर रहे थे, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई और चीख-पुकार सुनाई देने लगी। पहाड़ी से गिरे मलबे और पत्थरों की चपेट में आकर सड़क किनारे खड़े अनेक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि दर्ज नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र के निवासियों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

इसके साथ ही, बीआरओ और नेशनल हाईवे की टीमों के समक्ष उस समय बड़ी चुनौती खड़ी हो गई जब तीर्थयात्रियों की प्रमुख जीवनरेखा कहे जाने वाले बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का संपर्क टूट गया। जोशीमठ से आगे हाथी पहाड़ के समीप बुधवार देर रात लगभग 12 बजे एक भीषण लैंडस्लाइड हुआ। इस दौरान अलकनंदा नदी का प्रवाह बेहद तेज था, जिसके कारण नदी के उफान और तीव्र कटाव की वजह से मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा भाग पूरी तरह से बह गया। इस वॉशआउट के कारण बदरीनाथ धाम तथा हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा से लौटने वाले और जाने वाले सैकड़ों श्रद्धालु कई घंटों तक मार्ग में फंसे रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीमों ने भारी पोकलेन मशीनों के साथ तत्काल मोर्चा संभाला। कड़ी मशक्कत के बाद बृहस्पतिवार सुबह तक मार्ग को आंशिक रूप से खोलने में सफलता प्राप्त की गई, लेकिन ऊपरी ढलानों से लगातार गिरते पत्थरों और मलबे के कारण यातायात बार-बार बाधित हो रहा है।

मौसम विभाग की चेतावनी और 13 जिलों के लिए आगामी 5 दिनों का पूर्वानुमान

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, राज्य भर में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से अधिक सक्रिय बनी हुई हैं। 28 अगस्त को पर्वतीय जिलों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के साथ-साथ गरज-चमक की संभावना व्यक्त की गई है। विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए संवेदनशील बस्तियों तथा यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके विपरीत, मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार और उधम सिंह नगर में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है। आगामी दिनों में बारिश का यह दायरा और व्यापक होने की आशंका है, विशेष रूप से 30 अगस्त से 2 सितंबर तक का समय पूरे राज्य के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

मौसम विभाग ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक के लिए विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके अनुसार राज्य में वर्षा का क्रम इस प्रकार रहेगा

  • 29 अगस्त 2026: पर्वतीय भूभाग और उधम सिंह नगर के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने और अचानक तेज बौछारें पड़ने का अलर्ट रहेगा, जबकि हरिद्वार में भी कुछ स्थानों पर वर्षा की संभावना है।
  • 30 अगस्त 2026: इस दिन मानसूनी सक्रियता में भारी वृद्धि होगी और राज्य के सभी 13 जिलों में व्यापक बारिश देखने को मिलेगी। मौसम केंद्र ने देहरादून, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, उधम सिंह नगर और बागेश्वर जिलों में भारी वर्षा का विशेष अलर्ट जारी किया है।
  • 31 अगस्त 2026: यह दिन मानसूनी चक्र का सबसे संवेदनशील और सक्रिय दिन साबित हो सकता है। इस दौरान देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली और रुद्रप्रयाग में मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है।
  • 01 और 02 सितंबर 2026: राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना रहेगा।

देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार: मैदानी व तराई क्षेत्रों की स्थिति

राज्य की राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। ऋषिकेश तथा समीपवर्ती तराई इलाकों में देर रात से ही रुक-रुक कर रिमझिम तथा मध्यम वर्षा दर्ज की जा रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण पवित्र गंगा नदी के जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने नदी के तटीय और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को अलर्ट जारी कर दिया है। देहरादून के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दिनभर काले बादलों का पहरा बना रहेगा और दोपहर के बाद तीव्र गरज-चमक के साथ तेज बौछारें गिरने का अनुमान है।

उधर, मैदानी जिलों हरिद्वार और उधम सिंह नगर में उमस भरी गर्मी का असर देखा जा रहा है, जहां बीच-बीच में मध्यम वर्षा की बौछारों से स्थानीय निवासियों को थोड़ी राहत प्राप्त हो रही है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि 30 अगस्त से देहरादून और उधम सिंह नगर के मैदानी भागों में भी बारिश की तीव्रता काफी अधिक हो जाएगी। इसके चलते शहरी क्षेत्रों में जलजमाव, नालियों के उफान और निचले इलाकों में पानी भरने की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिसके लिए स्थानीय निकायों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

कुमाऊं मंडल में नदियों का बढ़ा प्रवाह और संवेदनशील मार्गों पर सतर्कता

कुमाऊं मंडल के पर्वतीय जनपदों में भी मानसूनी तंत्र पूरी तरह प्रभावी हो चुका है। बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक सहित विभिन्न ऊंचाई वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही लगातार बारिश का दौर जारी है। बागेश्वर शहर के आसमान में घने काले बादलों का जमावड़ा है, जिससे किसी भी समय मूसलाधार बारिश शुरू होने की पूरी संभावना है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सरयू और गोमती नदियों के जलस्तर तथा प्रवाह पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

इसी प्रकार, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले के पहाड़ी इलाकों में भी आकाशीय बिजली कड़कने और बादलों की तीव्र गड़गड़ाहट के साथ भारी वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। मौसम विभाग ने पर्वतीय मार्गों पर वाहन चलाने वाले चालकों और यात्रियों को विशेष रूप से सावधान रहने की हिदायत दी है। पहाड़ी ढलानों से अचानक बोल्डर और मलबे के गिरने से सड़कें अवरुद्ध होने का जोखिम बहुत अधिक बढ़ गया है। आगामी 30 और 31 अगस्त को बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ दोनों जनपदों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की विशेष चेतावनी जारी की गई है, जिससे आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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सवाल-जवाब

चमोली और बदरीनाथ हाईवे पर क्या घटना हुई है?
जोशीमठ के पास हाथी पहाड़ पर अलकनंदा नदी के कटाव से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का बड़ा हिस्सा बह गया, जबकि नंदनगर में भूस्खलन से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
क्या इस आपदा में किसी जनहानि की सूचना है?
नहीं, नंदनगर में बोल्डर गिरने और बदरीनाथ मार्ग बंद होने की घटनाओं में कोई जनहानि दर्ज नहीं हुई है।
उत्तराखंड में किन जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है?
मौसम विभाग ने 30 और 31 अगस्त को देहरादून, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।
क्या ऋषिकेश और हरिद्वार में नदियां उफान पर हैं?
हां, लगातार बारिश के कारण ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और तटीय इलाकों में चेतावनी जारी की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

यह आपदा केवल प्राकृतिक नहीं बल्कि तटीय कटाव और अनियंत्रित जलप्रवाह का गंभीर मामला है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और आवागमन पूरी तरह चरमरा गए हैं। ऐसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी के कटाव से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और निगरानी को और अधिक मजबूत करना होगा, अन्यथा यात्रियों की सुरक्षा पर लगातार बड़ा जोखिम बना रहेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·26 मिनट पहले

यह घटना पर्वतीय क्षेत्रों में ढांचागत विकास और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के बीच गहरे संघर्ष को उजागर करती है। अलकनंदा के तीव्र कटाव से मुख्य राजमार्ग का बहना यह दर्शाता है कि पारंपरिक इंजीनियरिंग पद्धतियां अब इस स्तर के मानसूनी दबाव को झेलने में असमर्थ हैं। भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए संवेदनशील ढलानों पर वैज्ञानिक तरीके से भू-सुदृढ़ीकरण और समय रहते वैकल्पिक मार्गों का विकास करना अनिवार्य होगा, ताकि चारधाम यात्रा के दौरान हजारों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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