सिनेमा जगत में कुछ ऐसी चुनिंदा फिल्में बनती हैं जो रिलीज के साथ ही दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं और समय बीतने के बाद भी उनकी चमक फीकी नहीं पड़ती। साल 2001 में रिलीज हुई दिल चाहता है भी इसी श्रेणी की एक ऐसी कलाकृति है जिसने सिनेमा प्रेमियों के बीच गहरी पैठ बनाई। आज यानी 10 अगस्त 2001 को रिलीज हुई इस बहुचर्चित फिल्म ने बड़े पर्दे पर दोस्ती, प्यार और आपसी रिश्तों की परिभाषा को बिल्कुल नए और अनूठे ढंग से गढ़ा था, जो उस दौर के हिसाब से काफी अलग अनुभव था।
डायरेक्शन में डेब्यू और मेकिंग का सफर
इस पूरी फिल्म का सबसे दिलचस्प और खास पहलू यह रहा कि यह फरहान अख्तर के करियर की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी। उन्होंने इसी प्रोजेक्ट के जरिए फिल्म इंडस्ट्री में बतौर डायरेक्टर अपने कदम मजबूती से रखे थे। अपनी जिंदगी की इस पहली ही डायरेक्टोरियल फिल्म के साथ ही वह देश भर के दर्शकों के चहीते निर्देशकों की सूची में शामिल हो गए। फरहान अख्तर के निर्देशन में तैयार हुई इस फिल्म को रितेश सिधवानी ने प्रड्यूस किया था, जिनकी सूझबूझ से इस शानदार प्रोजेक्ट को एक ठोस रूप मिला। फिल्म की स्टार कास्ट काफी मजबूत थी जिसमें आमिर खान, सैफ अली खान, अक्षय खन्ना, प्रीति जिंटा, सोनाली कुलकर्णी और डिंपल कपाड़िया जैसे दिग्गज कलाकारों ने मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिकाएं अदा की थीं।
युवाओं की सोच और कॉलेज के दिनों से परे अनूठी कहानी
जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई थी, उस दौर में कॉलेज के जीवन और छात्र जीवन पर आधारित कई अन्य फिल्में पहले ही आ चुकी थीं। इसके बावजूद इस फिल्म का पूरा ट्रीटमेंट और अंदाज एकदम जुदा था। इसने तीन पक्के दोस्तों के दैनिक जीवन, उनके बदलते हुए रिश्तों के समीकरण और प्रेम संबंधों को बेहद आधुनिक और रियलिस्टिक तरीके से प्रस्तुत किया। चूंकि यह एक डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी, इसलिए इसकी कहानी भी खुद फरहान अख्तर ने ही लिखी थी। फिल्म के भीतर युवा पीढ़ी की सोच, उनके आपसी समीकरण और उनके सपनों को बहुत ही खूबसूरती और सहजता के साथ पर्दे पर उतारा गया था। यह फिल्म केवल हल्के-फुल्के हास्य और कॉमिक अंदाज तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें जीवन के गहरे पहलुओं को भी जगह मिली थी।
आकाश, समीर और सिद्धार्थ की यारी
पूरी फिल्म की पटकथा मुख्य तौर पर तीन किरदारों आकाश, समीर और सिद्धार्थ यानी सिद्धू के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। ये तीनों युवा कॉलेज के दिनों से ही बहुत गहरे और पक्के दोस्त हुआ करते थे। अपनी औपचारिक पढ़ाई पूरी होने के बाद ये सब मिलकर एक यादगार गोवा ट्रिप पर निकलते हैं, जहां वे अपनी भविष्य की जिंदगी को लेकर अपने-अपने सपनों और विचारों पर खुलकर चर्चा करते हैं। इन तीनों दोस्तों की सोच एक-दूसरे से काफी अलग थी और हर एक का जीवन को देखने का नजरिया भी बिल्कुल जुदा था। यही वैचारिक भिन्नता और अलग दृष्टिकोण आगे चलकर इनकी गहरी दोस्ती में कुछ अनबन और दरार की वजह भी बनता है, जिसे फिल्म में बहुत गहराई से दिखाया गया है।
अनोखा रोमांस और चर्चा का मुख्य केंद्र
इस फिल्म के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने और सुर्खियों में छाए रहने की एक बहुत बड़ी और खास वजह इसमें दिखाया गया अक्षय खन्ना और डिंपल कपाड़िया का अनोखा रोमांस था। फिल्म के भीतर यह दिखाया गया था कि कैसे एक अधेड़ उम्र की महिला एक युवा लड़के के प्यार में पड़ जाती है और दोनों के बीच किस तरह का भावनात्मक लगाव पैदा होता है। इस बेहद खास और उस समय के हिसाब से बोल्ड कॉन्सेप्ट की वजह से ही इस फिल्म को लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं और यह सिनेप्रेमियों के जेहन में आज भी ताजा बनी हुई है।



















