अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने अपने फिल्मी करियर और मनोरंजन उद्योग में बिताए लंबे सफर को लेकर कई खुलासे किए हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा यानी तेलुगु और तमिल फिल्मों से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाली ईशा ने 'कंपनी' और 'एक विवाह ऐसा भी' जैसी हिंदी फिल्मों में भी अपनी खास पहचान बनाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक कलाकार के रूप में इंडस्ट्री में टिके रहने और खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समय के साथ खुद में बदलाव करना बहुत जरूरी है। इस बीच उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में एक बड़ा प्रोजेक्ट ठुकराने का उन्हें आज भी मलाल है।
वक्त के साथ खुद को बदलना है जरूरी
अपने अभिनय सफर के बारे में बात करते हुए ईशा कोप्पिकर ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ कलाकारों को अपनी अभिनय शैली में विविधता लानी चाहिए। उनका मानना है कि कलाकारों को अक्सर ऐसा भ्रम रहता है कि वे हमेशा एक जैसे युवा बने रहेंगे, लेकिन इस सोच से बाहर निकलकर अलग तरह के किरदार चुनना बेहद आवश्यक है। एक ही तरह के रोल करने से दर्शकों में बोरियत होने लगती है और ठहराव आ जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह शुरुआत में ऐसे बदलाव के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं क्योंकि उन्होंने ज्यादातर सीधी-सादी लड़कियों के किरदार निभाए थे, लेकिन उनके निर्देशकों ने उनकी छवि से हटकर उन्हें अलग भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित किया।
आर्थिक स्थिति और क्रिएटिव समझौते
सिनेमा जगत में फिल्मों के चयन को लेकर ईशा ने काफी सावधानी बरती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कलाकार पूरी तरह से आर्थिक रूप से अपनी अभिनय आय पर निर्भर रहता है, तो उसे अक्सर अपनी कलात्मक स्वतंत्रता से समझौता करना पड़ता है। उनका मानना है कि अभिनय के प्रति सच्चा जुनून रखने वाले कलाकारों के लिए जरूरी है कि वे रचनात्मक स्तर पर कोई समझौता न करें। ईशा ने बताया कि उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में इस क्षेत्र में कदम रख दिया था और इस इंडस्ट्री में उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड या गॉडफादर नहीं था जो उनका मार्गदर्शन कर सके।
क्यों ठुकराई थी 'दिल चाहता है'
अपने करियर के फैसलों पर बात करते हुए ईशा कोप्पिकर ने उस फिल्म का भी जिक्र किया जिसे उन्होंने किसी अन्य व्यस्तता के चलते छोड़ दिया था। उन्होंने बताया कि सैफ अली खान के विपरीत जिस भूमिका में बाद में सोनाली कुलकर्णी नजर आई थीं, वह पहले उन्हें ऑफर हुई थी। लेकिन पहले से तय अन्य प्रतिबद्धताओं के कारण उन्हें इस फिल्म से पीछे हटना पड़ा था। ईशा ने खुलकर माना कि उस प्रोजेक्ट को न कर पाने का उन्हें अब गहरा पछतावा होता है।
सोनू सूद के साथ काम करने का अनुभव
राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म 'एक विवाह ऐसा भी' ईशा के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में निभाए गए 'चांदनी' के किरदार के बारे में उनका कहना है कि उस पात्र की सादगी से वह वास्तविक जीवन में भी खुद को बहुत करीब पाती हैं क्योंकि वह असल जिंदगी में भी काफी सरल स्वभाव की हैं। उन्होंने फिल्मकार सूरज बड़जात्या के साथ काम करने के अनुभव को अद्भुत बताया और अपने सह-कलाकार सोनू सूद की जमकर सराहना की। भोपाल में लगभग एक महीने तक चली शूटिंग के दौरान बिताए पलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सोनू एक बेहतरीन इंसान हैं और वह अनुभव उनके दिल के बेहद करीब है।
फिल्मी करियर की शुरुआत
ईशा कोप्पिकर ने साल 1997 में तेलुगु फिल्म 'W/o V. वारा प्रसाद' के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने साल 1998 में तमिल फिल्म 'कादल कविताई' के माध्यम से तमिल सिनेमा का रुख किया और फिर साल 2000 में आई फिल्म 'फिजा' के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी आधिकारिक शुरुआत की थी।
























