राजस्थान के अजमेर जिले में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में वीआईपी ट्रेड कंपनी से जुड़े दो डायरेक्टरों को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है, जिससे इस अवैध कारोबार की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। पुलिस महकमा इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रहा है ताकि ठगी गई रकम और इसमें शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग और मुनाफे का लालच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कंपनी फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग के जरिए आम जनता को अपने जाल में फंसाती थी। निवेशकों को भारी भरकम मुनाफे का सब्जबाग दिखाया जाता था, जिसमें हर महीने 8 से 12 प्रतिशत तक रिटर्न देने का दावा किया जाता था। इस लुभावने वादे और भरोसे के झांसे में आकर कई सामान्य नागरिकों ने अपनी गाढ़ी कमाई इस कंपनी में निवेश कर दी। अब पुलिस इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि आखिर यह सारा पैसा किन खातों में ट्रांसफर हुआ और इस अवैध कारोबार को फैलाने में कुल कितने लोग सक्रिय रूप से शामिल थे।
सेमिनार और ऑनलाइन माध्यमों से फैलाया जाल
जांच में यह बात सामने आई है कि वीआईपी ट्रेड कंपनी लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए सुनियोजित तरीके से बड़े-बड़े सेमिनार आयोजित करती थी। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को निवेश के प्रति आकर्षित किया जाता था और उन्हें वित्तीय लाभ के झूठे सपने दिखाए जाते थे। सेमिनार के अलावा कंपनी अपनी वेबसाइट का इस्तेमाल करके भी निवेशकों को ऑनलाइन पैसे लगाने के लिए प्रेरित करती थी। पुलिस अब उन तमाम तरीकों और माध्यमों की पड़ताल कर रही है जिनके जरिए कंपनी ने लोगों तक अपनी पहुंच बनाई थी। हालांकि अभी तक इस बात का पुख्ता आंकड़ा सामने नहीं आया है कि कुल कितने निवेशकों ने इस कंपनी में अपनी कितनी पूंजी गंवाई है।
कई जिलों में दर्ज हैं मुकदमे
इस धोखाधड़ी का दायरा सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल दूर-दूर तक फैला हुआ है। अकेले अजमेर जिले में ही इस कंपनी के खिलाफ लगभग 40 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा राजस्थान के अन्य जिलों में भी इस ठग गिरोह के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इन तमाम अलग-अलग जगहों पर दर्ज मामलों को एक साथ जोड़कर पुलिस यह समझने का प्रयास कर रही है कि इस संगठित गिरोह का संचालन किस तरह किया जाता था और इसमें किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।
मुख्य आरोपियों समेत गिरफ्तारी का सिलसिला
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने वीआईपी ट्रेड कंपनी के डायरेक्टर लोकेश चौधरी और धीरज गुड़ानी को प्रोडक्शन वारंट पर अपनी हिरासत में लिया है। इनसे पहले इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी माने जा रहे अब्दुल समद और हनुमान छंगाणी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब पुलिस इन सभी आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर या अलग-अलग गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस बात का खुलासा हो सके कि इस कथित ठगी के नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इस पूरे षड्यंत्र में परदे के पीछे कौन-कौन लोग काम कर रहे थे।
















