सिनेमा जगत में अक्सर यह माना जाता है कि किसी भी फिल्म की सफलता के लिए बड़े बजट और नामचीन कलाकारों का होना बेहद जरूरी है। यदि किसी प्रोजेक्ट में ये दोनों ही बातें न हों, तो सामान्य तौर पर यह मान लिया जाता है कि उसका बॉक्स ऑफिस पर बहुत बुरा हाल होगा। हालांकि, कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो इन सभी पुरानी धारणाओं को पूरी तरह से गलत साबित कर देती हैं। करीब तीन साल पहले रिलीज हुई एक ऐसी ही फिल्म ने सिनेमाघरों में अपनी अनोखी छाप छोड़ी थी, जिसमें न तो कोई बहुत बड़ा सुपरस्टार था और न ही करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट। इसके बावजूद इस फिल्म ने केवल अपनी मजबूत कहानी के दम पर ऐसा करिश्मा कर दिखाया कि देखने वाले दंग रह गए।
कम बजट और सीमित संसाधनों में बनी खास फिल्म
यहाँ जिस फिल्म की चर्चा हो रही है, उसने न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों में भी दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी थी। इस भारतीय फिल्म का जादू पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोला। बिना किसी भारी-भरकम प्रचार, बड़े बजट और किसी बड़े चेहरे के ‘लापता लेडीज’ सीधे दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही। साल 2024 में रिलीज हुई यह फिल्म पहली नजर में भले ही एक बेहद हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म जैसी महसूस होती हो, लेकिन जैसे-जैसे इसकी कहानी आगे बढ़ती है, यह समाज, महिलाओं की पहचान, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और पितृसत्ता जैसी गंभीर व्यवस्थाओं पर बहुत ही सहजता से सवाल खड़े करती है।
समाज की कड़वी सच्चाइयों को पेश करती अनूठी कहानी
हंसाते-हंसाते निर्देशक किरण राव ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से समाज की कई कड़वी सच्चाइयों को परदे पर कुछ इस शालीनता से पेश किया कि कोई भी दर्शक चाहकर भी इससे नजरें नहीं फेर सका। ‘लापता लेडीज’ केवल मनोरंजन नहीं करती बल्कि दर्शकों को हंसते-हंसाते हुए भी सोचने पर मजबूर कर देती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म का कुल बजट लगभग 4 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है। इतने सीमित और सामान्य बजट में किसी फिल्म का निर्माण करना और फिर बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये की कमाई कर लेना अपने आप में एक बहुत बड़ी और खास उपलब्धि मानी जाती है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
हालांकि, इस फिल्म की असली सफलता केवल सिनेमाघरों से हुई टिकट खिड़की की कमाई तक ही सीमित नहीं रही। जब यह फिल्म थिएटर्स के बाद ओटीटी पर आई, तो यहाँ भी इसे दर्शकों का भरपूर और जबरदस्त प्यार मिला। छोटे-छोटे शहरों और गाँवों की पृष्ठभूमि पर बुनी गई इस कहानी ने उन तमाम दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के बड़े पर्दे की कहानियों में अपनी असल जिंदगी बहुत कम दिखाई देती है। सबसे दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि इस फिल्म को सिनेमाघरों से भी ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पसंद किया गया, जहाँ इसने सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए।
मजबूत अभिनय और नए कलाकारों की टोली
‘लापता लेडीज’ में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, स्पर्श श्रीवास्तव और रवि किशन जैसे बेहतरीन कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। रवि किशन को छोड़कर उस समय इनमें से किसी भी कलाकार का ऐसा नाम नहीं था जिसके बलबूते पर इस प्रोजेक्ट को किसी स्टार पावर वाली फिल्म की श्रेणी में रखा जा सके। लेकिन किरण राव की इस फिल्म को इस तरह के किसी सहारे की कोई आवश्यकता भी नहीं थी, क्योंकि यहाँ पर असली स्टार तो केवल इसकी कहानी ही थी जिसने पर्दे पर अपना जादू बिखेरा।
ऑस्कर के मंच तक पहुँचने का गौरव
इस फिल्म की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक इसका ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ तक पहुँचना रहा। यह फिल्म भारत की तरफ से 97वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर अवॉर्ड्स के तहत सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में आधिकारिक एंट्री के रूप में भेजी गई थी। भले ही यह फिल्म ऑस्कर के आखिरी नॉमिनेशन तक पहुँचने में कामयाब नहीं हो पाई, लेकिन देश की तरफ से इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेस में शामिल होना ही इसके लिए बहुत बड़ा गौरव था।
निर्देशक किरण राव की शानदार वापसी
‘लापता लेडीज’ के जरिए निर्देशक किरण राव ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि वह अपने काम में कितनी माहिर हैं। किरण ने इसी फिल्म के माध्यम से बतौर निर्देशक एक लंबे अरसे के बाद वापसी की थी। उन्होंने साल 2010 में आई फिल्म ‘धोबी घाट’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में अपना पदार्पण किया था। लगभग 13 साल के एक लंबे और महत्वपूर्ण अंतराल के बाद जब उन्होंने निर्देशन की दुनिया में वापसी की, तो देश और दुनिया के तमाम लोग उनके इस अद्भुत हुनर को एक बार फिर से सलाम करने के लिए मजबूर हो गए।



















