बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे हैं जिनकी चमक एक ही गाने से आसमान छू गई, लेकिन किस्मत ने उन्हें उतनी ही तेजी से गुमनामी में धकेल दिया। 1996 में आई फिल्म राजा हिंदुस्तानी का गाना परदेसी परदेसी जाना नहीं आज भी लोगों की जुबान पर है। करिश्मा कपूर और आमिर खान के इस गाने में एक बंजारन डांसर की अदाओं ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। यह डांसर थीं प्रतिभा सिन्हा, जो अपने जमाने की मशहूर एक्ट्रेस माला सिन्हा की बेटी हैं। महज सात मिनट के इस गाने ने प्रतिभा को रातोंरात स्टार बना दिया, लेकिन जिस संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने उन्हें यह शोहरत दिलाई, उसी जोड़ी के नदीम सैफी से जुड़ा एक अफेयर आगे चलकर उनके पूरे करियर पर भारी पड़ गया।
परिवार और शुरुआती करियर
प्रतिभा सिन्हा का जन्म 4 जुलाई 1969 को एक बड़े फिल्मी परिवार में हुआ था। एक्टिंग उन्हें विरासत में मिली थी। मां माला सिन्हा उस दौर की टॉप एक्ट्रेस थीं, वहीं पिता चिदंबर प्रसाद लोहानी नेपाल के जाने-माने एक्टर और जमींदार थे। प्रतिभा ने 1992 में फिल्म महबूब मेरे महबूब से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन प्रतिभा की सादगी भरी अदाकारी ने फिल्ममेकर्स का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने कल की आवाज, दिल है बेताब और तू चोर मैं सिपाही जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि असली पहचान उन्हें परदेसी परदेसी गाने से मिली, जिसकी कामयाबी का अंदाजा शायद खुद प्रतिभा को भी नहीं रहा होगा। साल 2000 में रिलीज हुई ले चल अपने संग उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई।
नदीम सैफी से बढ़ी नजदीकियां, माला सिन्हा ने की नजरबंद
प्रतिभा की जिंदगी का सबसे विवादित दौर तब शुरू हुआ जब फिल्मी करियर के दौरान उनकी करीबी शादीशुदा संगीतकार नदीम सैफी से बढ़ने लगी। दोनों अलग धर्म से ताल्लुक रखते थे, इसलिए माला सिन्हा इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं। बेटी को नदीम से दूर रखने के लिए माला सिन्हा ने उन्हें चेन्नई में नजरबंद तक कर दिया था, फिर भी दोनों कोड वर्ड में एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखते थे। जब दोनों के साथ भाग जाने की अफवाहें फैलीं, तो माला सिन्हा ने मदद के लिए बाल ठाकरे का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद प्रतिभा को वापस मुंबई लाया गया और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कराई गई, जहां भारी दबाव में उन्होंने नदीम पर किडनैपिंग और शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए। नदीम सैफी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे महज एक पब्लिसिटी स्टंट करार दिया था।
गुलशन कुमार हत्याकांड ने खत्म कर दिया करियर
यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अगस्त 1997 में टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में साजिशकर्ता के तौर पर नदीम सैफी का नाम सामने आया, जिसके बाद वे अपनी जान बचाकर लंदन भाग गए। कोर्ट ने आगे चलकर नदीम को इस मामले में बेगुनाह करार दिया, लेकिन तब तक यह पूरा विवाद प्रतिभा सिन्हा के बचे-खुचे फिल्मी करियर पर फुल स्टॉप लगा चुका था।
अब गुमनामी में बिता रही हैं जिंदगी
फिल्मी दुनिया की चकाचौंध, कैमरे की रोशनी और स्टारडम अब प्रतिभा सिन्हा की जिंदगी का हिस्सा नहीं हैं। आज वे मुंबई में अपनी मां माला सिन्हा के साथ शांत और सुकून भरी जिंदगी जी रही हैं, दशकों पहले सुर्खियों में रहने वाला वह नाम अब परदे से पूरी तरह दूर हो चुका है।













