सिनेमा जगत के प्रख्यात अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका परिवार इस गहरे आघात से उबरने का प्रयास कर रहा है। इसी बीच अभिनेता के पुत्र मल्हार पाटेकर ने सार्वजनिक पटल पर आकर उन सभी चर्चाओं और दावों पर अपनी बात रखी है जो बीते कुछ समय से उनके पिता और परिवार को लेकर तैर रही थीं। मल्हार ने स्पष्ट किया कि जिस पुराने विवाद को एक बार फिर से तूल देने की कोशिश की जा रही है, वह कानूनी और न्यायिक व्यवस्था के तहत पहले ही समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने माता-पिता के निजी रिश्ते तथा नाना पाटेकर के अंतिम समय को लेकर फैलाई जा रही तमाम बातों की वास्तविकता सामने रखी। मल्हार के अनुसार उनके पिता जीवन के अंतिम समय तक अपनों के बीच थे और परिवार ने हर कदम पर उनका ध्यान रखा। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने पिता के परोपकारी कार्यों और कलात्मक दृष्टिकोण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्मृतियों को भी साझा किया।
पुराने आरोपों और विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया का हवाला
एक विस्तृत बातचीत के दौरान मल्हार पाटेकर ने अभिनेत्री तनुश्री दत्ता का नाम लिए बिना उस बहुचर्चित विवाद पर सीधा दृष्टिकोण पेश किया। मल्हार ने कहा कि जिस मसले को दोबारा हवा देने की कोशिश की जा रही है, उसका समाधान पहले ही हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रकरण पूरी न्यायिक प्रक्रिया से गुजर चुका है और ऐसे में उसी बात को बार-बार दोहराने का कोई औचित्य नहीं बनता। मल्हार ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह ऐसे लोगों के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि सच वही रहेगा जो सच है, और भगवान उनका भला करे।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि वर्ष 2018 में बनी थी, जब तनुश्री दत्ता ने फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' के सेट पर नाना पाटेकर और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। भारत में चले मीटू अभियान के दौरान इस मामले ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके बाद 8 अक्टूबर को नाना पाटेकर के देहांत के पश्चात तनुश्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें अभिनेता के संदर्भ में कटु भाषा का प्रयोग किया गया था। बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि वह उस दौर में घटी कथित घटना और व्यवहार को कभी भुला नहीं सकतीं।
माता-पिता के रिश्ते और पारिवारिक समझ पर मल्हार का स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया पर नाना पाटेकर और उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर के रिश्ते को लेकर चल रही अटकलों पर भी मल्हार ने विस्तार से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि डिजिटल मंचों पर जो कुछ प्रसारित किया जाता है, वह अक्सर वास्तविकता से कोसों दूर होता है। मल्हार का कहना था कि यदि कोई परिवार इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर एक साथ तस्वीरें पोस्ट नहीं करता, तो इसका अर्थ यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके बीच भावनात्मक जुड़ाव समाप्त हो चुका है।
मल्हार ने अपने पालन-पोषण का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें एक बेहद स्नेहपूर्ण पारिवारिक माहौल मिला और उनके माता-पिता ने उन्हें एक बेहतरीन बचपन प्रदान किया। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि लंबे वैवाहिक सफर में समय के साथ रिश्तों का स्वरूप बदलता है, लेकिन नाना और नीलकांति के बीच परस्पर आदर हमेशा बना रहा। उन्होंने रेखांकित किया कि उनके माता-पिता का साथ लगभग 38 से 39 वर्षों का रहा है, और किसी भी परिवार की अंदरूनी समझ और सच्चाई को बाहर से केवल देखकर आंकना संभव नहीं है। मल्हार का यह बयान उन निराधार दावों का उत्तर था जिनमें दंपती के अलगाव को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रही थीं।
अंतिम समय की सक्रियता और शारीरिक फिटनेस
नाना पाटेकर के जाने के बाद कुछ हल्कों में यह चर्चा भी चलने लगी थी कि अभिनेता अपने अंतिम दिनों में एकाकी जीवन बिता रहे थे या गंभीर रूप से अस्वस्थ थे। मल्हार ने इन दोनों ही बातों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि उनके पिता कभी अकेले नहीं रहे, बल्कि परिवार का कोई न कोई सदस्य निरंतर उनके साथ उपस्थित रहता था और उनकी सभी जरूरतों का ध्यान रखता था।
मल्हार ने अपने पिता की दिनचर्या और शारीरिक क्षमता का वर्णन करते हुए बताया कि नाना पाटेकर अपने अंतिम दिनों तक बेहद फुर्तीले और सक्रिय बने रहे। वह प्रतिदिन नियमित तौर पर जिम जाते थे और लगभग ढाई घंटे तक पसीना बहाते थे। मल्हार ने कहा कि उनके पिता का फिटनेस स्तर इतना उच्च था कि आज की पीढ़ी के कई नौजवान भी उतनी देर तक लगातार व्यायाम करने की क्षमता नहीं रखते। उन्होंने दोहराया कि परिजनों ने कभी अपने पिता का साथ नहीं छोड़ा और स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे तरह-तरह के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
किसानों की सहायता और सामाजिक सरोकार
अभिनय से परे नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों पर बात करते हुए मल्हार ने बताया कि उनके पिता के जीवन में जनसेवा का स्थान दिनों-दिन बहुत बड़ा होता गया था। वह महाराष्ट्र के संकटग्रस्त किसानों की मदद करने और कश्मीर के बच्चों के लिए स्कूल स्थापित करने जैसी मानवीय पहलों में गहराई से समर्पित थे।
मल्हार के मुताबिक इन कल्याणकारी कार्यों से नाना पाटेकर को आत्मिक शांति और वास्तविक प्रसन्नता हासिल होती थी। पिछले कई वर्षों के दौरान यह सामाजिक अभियान उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा बन चुके थे। मल्हार ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि पिता के इस दुनिया से चले जाने के बाद उनके शुरू किए गए सामाजिक कार्यों और संस्थागत प्रयासों को निरंतर आगे ले जाना अब उनके परिवार और उनकी स्वयं की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
सिनेमाई चयन और किरदारों में नयापन
नाना पाटेकर के सिनेमाई सफर पर रोशनी डालते हुए मल्हार ने बताया कि उनके पिता फिल्मों में कभी एक ही तरह के सांचे में ढलने को तैयार नहीं होते थे। वह अपनी निजी समझ से कहानियां गढ़ने और एक कलाकार के रूप में नए आयाम तलाशने में यकीन रखते थे। नाना अक्सर अपने बेटे से कहा करते थे कि काम में एकरूपता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें निरंतर विविधता दिखनी चाहिए।
मल्हार ने इस संदर्भ में फिल्म 'खामोशी: द म्यूजिकल' का उदाहरण दिया, जिसमें नाना ने अपने अभिनय का एक बेहद अनूठा और संवेदनशील पहलू दर्शकों के सामने रखा था। पांच दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार करियर में नाना पाटेकर ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'अब तक छप्पन', 'अपहरण', 'वेलकम' और 'राजनीति' जैसी कालजयी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उल्लेखनीय है कि 8 अक्टूबर को गोवा में अचानक सीने में तेज दर्द उठने के बाद दिल का दौरा पड़ने से नाना पाटेकर का निधन हो गया था। इसके उपरांत पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम विदाई संपन्न हुई थी।




















