महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर दुर्गा पंचमी के दिन मुखर्जी घराने की ऐतिहासिक धार्मिक रवायत एक नए उल्लास के साथ शुरू हुई। बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल अपनी वरिष्ठ अभिनेत्री माता तनुजा एवं अनुजा तनीषा मुखर्जी के संग पंडाल में शीश नवाने पहुंचीं। तीनों ने पूरे भक्तिभाव से पूजा पंडाल के कपाट खोले और जगतजननी मां दुर्गा की आराधना कर आशीष मांगा। यह साल इस भव्य आयोजन के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक पड़ाव साबित हो रहा है, क्योंकि नॉर्थ बॉम्बे सार्वजनिक दुर्गा पूजा अपने गौरवमयी 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। आठ दशकों से अनवरत चल रही इस धार्मिक परिपाटी को परिवार की नई पीढ़ियां पूरी निष्ठा के साथ आगे ले जा रही हैं।
मातृशक्ति के विभिन्न स्वरूपों को अभिनेत्री ने किया नमन
इस पावन उत्सव में सम्मिलित होने के उपरांत काजोल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इस मांगलिक अवसर के कई यादगार क्षण साझा किए। उन्होंने देवी के ममतालु, पुत्री, संरक्षिका और ईश्वरीय रूपों का भावपूर्ण शब्दों में उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि यह पावन अवसर मां के प्रत्येक स्वरूप को समर्पित रहा, चाहे बात एक मां की हो, लाडली बेटी की हो, रक्षा करने वाली शक्ति की हो अथवा देवी स्वरूपा की हो। अपने भक्ति संदेश में उन्होंने 'जय मां दुर्गा' लिखकर उत्सव के आरंभ का हर्ष व्यक्त किया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी पंडाल में उनकी सक्रिय उपस्थिति ने तमाम श्रद्धालुओं और प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
तनीषा मुखर्जी और अन्य पारिवारिक सदस्यों का समागम
उत्सव की खुशियां बांटते हुए तनीषा मुखर्जी ने भी इंटरनेट पर पूजा प्रांगण की मनमोहक तस्वीरें जारी कीं। इस वार्षिक पर्व को वर्ष का अपना सर्वाधिक प्रिय कालखंड करार देते हुए उन्होंने लिखा, 'मां आछे!' और मां जगदंबा के जयकारे लगाए। इस प्रतिष्ठित आयोजन में परिवार के अन्य जाने-माने चेहरे भी एकजुट हुए। इनमें जाने-माने फिल्म निर्देशक अयान मुखर्जी और 'बॉर्डर' फिल्म की लोकप्रिय अदाकारा शरबानी मुखर्जी प्रमुख रूप से शामिल रहीं। एक छत के नीचे सगे-संबंधियों का यह मिलन दुर्गा पूजा के माहौल को और भी जीवंत व आत्मीय बना देता है, जहां सभी सदस्य धार्मिक विधियों में हाथ बंटाते हैं।
फिल्मालय स्टूडियो के संस्थापक ने 1948 में रखी थी आधारशिला
नॉर्थ बॉम्बे सार्वजनिक दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आठ दशक पुरानी है। वर्ष 1948 में फिल्मालय स्टूडियो के संस्थापक एवं प्रख्यात फिल्म निर्माता सशाधर मुखर्जी ने इस सार्वजनिक पूजा की नींव रखी थी। इस पावन संकल्प में उनकी अर्धांगिनी सतीरानी मुखर्जी के साथ जेएम भद्रा एवं 26 अन्य गणमान्य व्यक्ति संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल रहे थे। उस दौर में पूजा का सर्वप्रथम उत्सव सांताक्रूज स्थित श्री मंडल हॉल में आयोजित किया गया था, जिसे पोद्दार स्कूल के नाम से भी जाना जाता था। जैसे-जैसे साल बीतते गए, भक्तों की संख्या बढ़ती गई और आयोजन स्थल भी बदलते रहे। एक लंबे अरसे तक यह पूजा जुहू स्थित ट्यूलिप स्टार होटल के परिसर में संपन्न होती रही। वर्तमान समय में इस भव्य पंडाल का निर्माण जुहू क्षेत्र में ही एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय के समीपवर्ती मैदान में किया जाता है।
पीढ़ियों की विरासत और परिजनों की स्मृतियां
मुखर्जी खानदान का इस पूजा के प्रबंधन और संचालन से अत्यंत आत्मीय नाता रहा है। अयान मुखर्जी के पिता एवं दिग्गज अभिनेता देब मुखर्जी लंबे अरसे तक इस पूजा समिति के मुख्य आधार स्तंभ रहे थे। वर्ष 2025 में उनके देहावसान के बाद से परिवार इस अनुष्ठान को उनकी पावन स्मृतियों से जोड़कर भी देखता है। आम तौर पर विख्यात अदाकारा रानी मुखर्जी भी हर साल इस पूजा में पूरे उत्साह से भाग लेती रही हैं। हालांकि इस मर्तबा उनके आगमन को लेकर संशय बना हुआ है, क्योंकि 22 सितंबर को उनकी माता कृष्णा मुखर्जी का निधन हो गया था। इस पारिवारिक शोक के चलते अभी यह तय नहीं हो सका है कि वह इस वर्ष के समारोह में उपस्थित हो पाएंगी या नहीं।

















