सिनेमाघरों में दर्शकों को आकर्षित करने के बाद तमिल एक्शन थ्रिलर 'डीसी' अब डिजिटल दर्शकों के बीच पहुंच चुकी है। 16 अक्टूबर से इस फिल्म का डिजिटल प्रीमियर सोनीलिव पर शुरू कर दिया गया है। करीब 25 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने टिकट खिड़की पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर साल 2026 की सबसे कामयाब तमिल फिल्मों की कतार में जगह बना ली। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात फिल्म निर्देशक लोकेश कनगराज का अभिनय में उतरना रहा, जिन्होंने मुख्य भूमिका निभाकर हर किसी को हैरत में डाल दिया।
साहित्यिक और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित ताना-बाना
इस कहानी का मूल ढांचा शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के सुप्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' और अमेरिका के चर्चित विद्रोही आपराधिक जोड़े 'बोनी और क्लाइड' के संदर्भों से तैयार किया गया है। फिल्म का शीर्षक 'डीसी' वास्तव में दो केंद्रीय किरदारों दास और चंद्रा के नामों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर रखा गया है। फिल्म का निर्देशन अरुण मथेश्वरन ने संभाला है, जबकि मुख्य किरदारों में लोकेश कनगराज के साथ वामिका गब्बी और संजना कृष्णमूर्ति दिखाई देते हैं। पृष्ठभूमि और गीतों को प्रभावशाली बनाने में अनिरुद्ध रविचंदर के संगीत का बड़ा योगदान रहा है।
थिएटर रिलीज और आलोचकों की प्रतिक्रिया
यह एक्शन ड्रामा 7 अगस्त 2026 को वैश्विक स्तर पर बड़े पर्दे पर उतारा गया था। रिलीज होते ही फिल्म समीक्षकों और दर्शकों दोनों की ओर से इसे सकारात्मक समीक्षाएं हासिल हुईं। विशेष रूप से अरुण मथेश्वरन के विजन, लोकेश कनगराज की अदाकारी, वामिका गब्बी के काम, रोमांचक एक्शन दृश्यों और अनिरुद्ध के बैकग्राउंड स्कोर को खूब सराहा गया। यही कारण रहा कि फिल्म ने अपनी लागत से चार गुना अधिक कमाई दर्ज की।
अन्याय के खिलाफ खड़े बागी दास का सफर
कहानी के केंद्र में देवदास नाम का एक शख्स है, जो एक छोटे आपराधिक गिरोह का संचालन करता है। वह अपने सिद्धांतों पर चलने वाला किरदार है, जो उन बेसहारा और प्रताड़ित लोगों की मदद करता है जिन्हें कानून व्यवस्था से इंसाफ नहीं मिल पाता। देवदास का अपराध की दुनिया में प्रवेश तब हुआ था जब संपत्ति विवाद के चलते उसकी मां की जान ले ली गई थी। मां की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए उसने अपने मामाओं को मौत के घाट उतार दिया। इस हिंसक बदले के बाद उसके पिता 'मोटर मणि' ने उसे घर और परिवार से बेदखल कर दिया था।
भ्रष्ट तंत्र से सीधा टकराव और नई मुसीबतें
घटनाक्रम तब तेज होता है जब देवदास का दल पुलिस विभाग के हथियारों से लदे एक पूरे काफिले को लूट लेता है। उसी दौरान इलाके का एक भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर एक स्थानीय किसान की हत्या कर डालता है ताकि वह उस रकम को हड़प सके जो किसान ने अपने बेटे की उच्च शिक्षा के लिए जमा की थी। जब सरकारी अमला और पुलिस प्रशासन पीड़ित परिवार की फरियाद सुनने से मना कर देते हैं, तब लाचार परिजन मदद की गुहार लेकर दास के ठिकाने पर पहुंचते हैं।
देवदास उस बेईमान इंस्पेक्टर को खोज निकालता है और उसे खत्म कर देता है। इसके साथ ही वह पीड़ित किसान के परिवार को भरोसा दिलाता है कि लूटी गई संपत्ति से वह उनके बेटे की पढ़ाई-लिखाई का पूरा जिम्मा संभालेगा। एक पुलिस अधिकारी की हत्या और हथियारों की बड़ी लूट के बाद पुलिस महकमा हरकत में आ जाता है और दास के पूरे गैंग को खत्म करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स तैनात कर दी जाती है।
प्रेम, विश्वासघात और आगे की राह
इन तमाम संघर्षों के बीच दास का दिल पार्वती नाम की एक गायिका पर आ जाता है। हालांकि, हालात तब बिगड़ते हैं जब एक लॉज के मालिक से दास की अनबन हो जाती है। नाराज लॉज मालिक पुलिस को दास के गुप्त ठिकाने की सूचना दे देता है। इसके बाद पुलिस बल भारी दलबल के साथ वहां छापा मारता है, जिससे चारों तरफ हड़कंप मच जाता है। इस अफरा-तफरी और बगावत की अंतिम परिणति क्या होती है, यह जानने के लिए दर्शक अब इस फिल्म को सोनीलिव पर देख सकते हैं।





















