सिनेमा जगत में आगामी पौराणिक फिल्म रामायण को लेकर चर्चा का माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस बहुचर्चित फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे और यश प्रमुख किरदारों में नजर आने वाले हैं। यह व्यापक सिनेमाई परियोजना दो अलग-अलग भागों में वैश्विक स्तर पर दर्शकों के सामने पेश की जाएगी। योजना के अनुसार, इस महागाथा का पहला भाग अक्टूबर 2026 में दिवाली के पावन पर्व से पूर्व दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देगा, जबकि कहानी का दूसरा हिस्सा दिवाली 2027 के अवसर पर बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होगा। लगभग दो महीने पहले जब इस भव्य फिल्म की पहली झलक दुनिया के सामने आई, तो उसके वीएफएक्स और दृश्यों के फिल्मांकन ने पूरे देश में बहस छेड़ दी। जहां कुछ सिनेप्रेमियों ने तकनीक और भव्यता की खुलकर सराहना की, वहीं कई दर्शकों ने इसकी प्रस्तुति में कमियां भी रेखांकित कीं। इसी बीच जाने-माने अभिनेता मुकेश खन्ना ने फिल्म में दिखाए गए एक्शन सीन्स और अत्यधिक स्पेशल इफेक्ट्स के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भगवान राम के शांत और मर्यादित स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप
मुकेश खन्ना ने बॉलीवुड नाउ के एक चैट शो के दौरान फिल्म के एक्शन डिजाइन पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका मानना है कि निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी पूरी टीम ने भगवान राम को एक पारंपरिक एक्शन सुपरस्टार के सांचे में ढालने की चेष्टा की है। उनका तर्क है कि इस तरह के सिनेमाई प्रयोगों से प्रभु श्रीराम के उस गरिमामयी और शांत 'मर्यादा पुरुषोत्तम' स्वरूप को ठेस पहुंचती है, जिसकी छवि सदियों से भारतीय जनमानस के हृदय में बसी हुई है। अभिनेता का कहना है कि स्पेशल इफेक्ट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल किसी भी धार्मिक या पौराणिक रचना को तमाशे में तब्दील नहीं कर सकता, क्योंकि भारतीय संस्कृति और परंपरा में श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक या काल्पनिक पात्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की गहरी आस्था और आत्मीयता का केंद्र हैं।
अपनी बात को विस्तार देते हुए मुकेश खन्ना ने रामायण और रामलीला के पारंपरिक संदर्भों का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रीराम निश्चित रूप से एक महान धनुर्धर और भगवान के अवतार थे, लेकिन पर्दे पर दिखाए गए फाइट सीक्वेंस भारतीय मान्यताओं के बिल्कुल विपरीत प्रतीत होते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि श्री राम को सलमान खान, अमिताभ बच्चन या रजनीकांत जैसा एक्शन नायक बना दिया गया है। उनके मुताबिक, मर्यादा पुरुषोत्तम पेड़ की शाखाओं पर कूद-कूदकर बाण नहीं चलाते थे, और ऐसी कल्पनाएं हमारी सांस्कृतिक समझ से कतई मेल नहीं खाती हैं।
हॉलीवुड शैली के प्रभाव और वैश्विक दर्शकों की समझ पर टिप्पणी
चैट शो में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने यह भी कहा कि रामजी को मैन ऑफ एक्शन और हॉलीवुड अभिनेता क्लिंट ईस्टवुड जैसा रूप देने की कोशिश की गई है। उन्होंने फिल्म निर्माण में स्पेशल इफेक्ट्स के अत्यधिक और गैर-जरूरी इस्तेमाल को अनुचित ठहराया। मुकेश खन्ना ने फिल्म की वैश्विक रिलीज योजना पर विचार रखते हुए रेखांकित किया कि विदेशी दर्शकों के मानस पटल पर भगवान राम की वह भावनात्मक या आध्यात्मिक छवि मौजूद नहीं है जो एक भारतीय नागरिक के मन में होती है।
अभिनेता के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने वाले लोग संभवतः इस फिल्म की तुलना स्टार वार्स जैसी काल्पनिक साइंस-फिक्शन फिल्मों से करेंगे। ऐसे में यदि आप भारत में भगवान राम की कथा प्रस्तुत कर रहे हैं, तो उसमें श्रद्धा और आस्था का सर्वोच्च स्थान होना अनिवार्य है। विदेशी बाजार की सोच चाहे जो भी हो, घरेलू दर्शकों के सम्मुख भगवान राम की उपस्थिति में पूर्ण सम्मान, मर्यादा और गरिमा झलकनी चाहिए।
4,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट पर बन रहा सिनेमाई प्रोजेक्ट
दूसरी तरफ, रामायण के निर्माण पक्ष की बात करें तो यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने एक बातचीत के दौरान इस भव्य प्रोजेक्ट के पैमाने और वित्तीय लागत पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने साझा किया कि जब लगभग छह या सात वर्ष पहले इस परियोजना की नींव रखी जा रही थी, तब इस अभूतपूर्व स्तर के कारण कई लोगों को उनका विचार असंभव और पागलपन भरा लगा था, क्योंकि भारत में इससे पहले कभी किसी फिल्म का कैनवास इतना विस्तृत नहीं रहा था।
लागत का ब्योरा साझा करते हुए नमित मल्होत्रा ने बताया कि दोनों हिस्सों को मिलाकर इस फिल्म का कुल बजट लगभग 500 मिलियन डॉलर यानी 4,000 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठेगा। निर्माता का मानना है कि वे दुनिया की सबसे महान महागाथा पर आधारित अब तक की सबसे विशाल फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, जिसे वैश्विक पटल पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि पूरी टीम इस प्रोजेक्ट को हॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक कुशल और व्यवस्थित तरीके से अंजाम दे रही है। उनका जोर इस बात पर रहा कि निर्माण दल बड़े सपने देखने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जमीन और वास्तविक दायित्वों से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।

















