भारतीय खानपान में देसी घी का उपयोग सदियों से प्रमुखता से किया जाता रहा है, लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि इसे खाने में ऊपर से कच्चा डालकर खाना चाहिए या फिर गर्म करके पकाना बेहतर होता है। पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों ही तरीकों को अपनाया जा सकता है, क्योंकि घी से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ केवल इस बात पर निर्भर नहीं करते कि उसे कैसे परोसा गया है। वास्तव में घी के फायदे इस बात से तय होते हैं कि उसे कितनी आंच पर और कितनी देर पकाया गया है, प्रतिदिन उसकी कितनी मात्रा खाई जा रही है, और क्या उसे किसी अन्य वसा के विकल्प के रूप में लिया जा रहा है या अतिरिक्त रूप से जोड़ा जा रहा है।
पोषण तत्वों का अवशोषण और घी की भूमिका
वैज्ञानिक शोधों में ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि घी को अलग से तेज गर्म करने पर उसके पोषक तत्व अपने आप बढ़ जाते हैं। ऐसे में ताजा बनी गर्म रोटी पर थोड़ा सा घी चुपड़ना या फिर पकी हुई दाल, खिचड़ी अथवा तैयार सब्जी में ऊपर से एक चम्मच घी डालना बेहद गुणकारी विकल्प माना जाता है। भोजन में मौजूद वसा में घुलनशील विटामिन, जिनमें विटामिन ए, डी, ई और के शामिल हैं, उनके साथ-साथ कैरोटीनॉयड के अवशोषण के लिए शरीर को स्वस्थ वसा की जरूरत होती है। घी में मौजूद फैट इन जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में ठीक से समाहित कराने में अहम भूमिका निभाता है।
पकाने की विधि और पोषक तत्वों की सुरक्षा
सेहतमंद भोजन केवल इस बात से तय नहीं होता कि खाना पकाने के लिए कौन सा तेल या घी चुना गया है, बल्कि उसे पकाने की तकनीक भी पोषक तत्वों पर गहरा असर डालती है। जब सब्जियों को बहुत ज्यादा पानी में लंबे समय तक उबाला जाता है, तो पानी में घुलनशील पोषक तत्व, विशेष रूप से विटामिन सी और कई प्रकार के बी विटामिन्स, पानी और भाप के जरिए नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि सब्जियों को भाप में पकाना यानी स्टीमिंग करना या बहुत हल्की आंच पर कम समय के लिए पकाना एक बेहतर तरीका माना जाता है, जिससे उनके प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित बने रहते हैं।
कैलोरी संतुलन और संतुलित उपयोग
दैनिक आहार में घी जोड़ते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह देखना है कि इसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। यदि आप रोटी पर घी लगाकर किसी अन्य तेल या मक्खन की जगह इसका सेवन कर रहे हैं, तो यह एक संतुलित चुनाव हो सकता है। इसके विपरीत, यदि भोजन में पहले से ही पर्याप्त तेल और मक्खन मौजूद है और उसके ऊपर से भी अतिरिक्त घी मिलाया जा रहा है, तो इससे शरीर में कुल कैलोरी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अनावश्यक रूप से बढ़ जाती है। अंततः घी खाने का कोई एक तय नियम नहीं है। चाहे इसे तैयार खाने में अंत में थोड़ी मात्रा में डाला जाए या भोजन पकाने में इस्तेमाल किया जाए, दोनों ही तरीके सही हैं। सबसे बेहतर तरीका वही है जिसमें घी को अत्यधिक तेज तापमान पर बेवजह न जलाया जाए और उसकी दैनिक मात्रा पूरी तरह संतुलित रखी जाए।



















