सिनेमा जगत के जाने-माने फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक गंभीर कानूनी विवाद में घिर गए हैं। एक्लाटेंट फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड नाम के प्रोडक्शन हाउस ने निर्देशक को कानूनी नोटिस भेजकर 29.67 करोड़ रुपये के भुगतान की मांग रखी है। यह पूरा मामला दोनों पक्षों के बीच लगभग 16 साल पहले हुए एक वित्तीय और व्यावसायिक समझौते से जुड़ा हुआ है। प्रोडक्शन हाउस ने इस नोटिस के जरिए न केवल निर्देशक पर दबाव बनाया है, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के अन्य निर्माताओं, वितरकों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को भी उनके साथ किसी भी तरह का नया प्रोजेक्ट शुरू न करने की चेतावनी जारी की है।
भुगतान के लिए 30 अक्टूबर तक की समयसीमा
एक्लाटेंट फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड ने 15 अक्टूबर को यह कानूनी नोटिस जारी किया था। प्रोडक्शन हाउस ने राम गोपाल वर्मा को बकाया रकम चुकाने के लिए 30 अक्टूबर तक की अंतिम मोहलत दी थी। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मांगी गई 29.67 करोड़ रुपये की कुल राशि में मूल रकम के साथ-साथ पिछले वर्षों का संचित ब्याज भी शामिल है। निर्धारित तारीख तक भुगतान न होने की स्थिति में मामले के अदालत में आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
साल 2010 के समझौते और NOC की अनिवार्यता
इस कानूनी टकराव की जड़ें वर्ष 2010 में हुए एक औपचारिक अनुबंध में हैं। बाद में साल 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस समझौते को कानूनी रूप से वैध और प्रभावी ठहराया था। प्रोडक्शन हाउस के मुताबिक, इस समझौते की मुख्य शर्त यह थी कि राम गोपाल वर्मा जब भी कोई नई फिल्म या रचनात्मक प्रोजेक्ट शुरू करेंगे, तो उन्हें पहले एक्लाटेंट फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, बिना अनुमति कोई भी प्रोजेक्ट बनाना सीधे तौर पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।
इंडस्ट्री और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए चेतावनी
प्रोडक्शन हाउस का सीधा आरोप है कि निर्देशक ने इस अहम शर्त का पालन नहीं किया और बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के काम जारी रखा। इसी उल्लंघन को आधार बनाकर अब 29.67 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया गया है। इसके साथ ही एक्लाटेंट फिल्म्स ने मनोरंजन जगत के अन्य निर्माताओं, फिल्म खरीदारों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने आगाह किया है कि निर्देशक के साथ किसी भी तरह के निर्देशन कार्य, फिल्मों की खरीद-फरोख्त, स्ट्रीमिंग राइट्स हासिल करने या उनके प्रोजेक्ट्स से व्यावसायिक लाभ उठाने से पहले इस कानूनी विवाद को ध्यान में रखा जाए।



















