केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक नवंबर को चंडीगढ़ पुलिस के 60वें स्थापना दिवस पर आयोजित हीरक जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। पुलिस लाइन में संपन्न हुए इस विशेष आयोजन के दौरान उन्होंने औपचारिक पुलिस परेड का बारीकी से निरीक्षण किया और मार्च पास्ट की सलामी स्वीकार की। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने चंडीगढ़ पुलिस बल को भारत के राष्ट्रपति की ओर से स्वीकृत प्रतिष्ठित प्रेसिडेंट्स कलर सम्मान भी औपचारिक रूप से सौंपा।
छह दशकों की सेवा और बलिदान को राष्ट्रीय सम्मान
समारोह में उपस्थित अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति निशान से अलंकृत किया जाना छह दशकों की सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता का सम्मान है।” उन्होंने कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए रेखांकित किया कि देश सेवा में प्राण न्योछावर करना पूरे सुरक्षा बल के लिए गौरव की बात है। वर्ष 1966 में अपनी स्थापना के समय से लेकर वर्तमान दौर तक चंडीगढ़ पुलिस ने अपने सतत प्रयासों की बदौलत भारतीय पुलिस बलों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने का काम किया है।
त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और आधुनिक बेड़ा
आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई के राष्ट्रीय मानकों की समीक्षा करते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि घटनाओं पर तुरंत एक्शन लेने और प्रभावी रिस्पॉन्स टाइम के मामले में चंडीगढ़ पुलिस पूरे देश में दूसरे पायदान पर काबिज है। इस क्षमता को और अधिक उन्नत बनाने के उद्देश्य से बल के आधिकारिक बेड़े में 141 नए वाहन औपचारिक रूप से शामिल किए गए हैं। इन अत्याधुनिक संसाधनों के जुड़ने से सुरक्षा बल की दैनिक कार्यक्षमता के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं को नया तकनीकी बल मिलेगा। इसके सहारे चंडीगढ़ पुलिस आने वाले समय में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिस्पॉन्स टाइम के मामले में शीर्ष स्थान हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।
आतंकवाद के दौर से डिजिटल समाधान तक का सफर
शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित चंडीगढ़ को देश के सबसे सुनियोजित और व्यवस्थित शहरों में गिना जाता है। अपने संबोधन में अमित शाह ने उल्लेख किया कि जब पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में आतंकवाद का कठिन दौर आया था, तब चंडीगढ़ भी उन चुनौतियों से अछूता नहीं रहा था। उस जटिल समय में चंडीगढ़ पुलिस के जवानों ने अभूतपूर्व शौर्य, साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए शहर और सीमावर्ती इलाकों में कानून व्यवस्था एवं शांति स्थापित रखी। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पुलिस का मुख्य उद्देश्य आम जनता को पारदर्शी और सुलभ नागरिक सुविधाएं मुहैया कराना है। विभिन्न डिजिटल मोबाइल ऐप्स और तकनीकी पहलों के जरिए चंडीगढ़ पुलिस ने ऐसी कार्यप्रणाली तैयार की है जिससे आम नागरिकों को जरूरी सेवाओं के लिए थानों के चक्कर न काटने पड़ें।
प्रति व्यक्ति सर्वाधिक गाड़ियां, फिर भी निर्बाध यातायात और 85 फीसदी दोषसिद्धि
चंडीगढ़ पूरे देश में प्रति व्यक्ति सबसे अधिक निजी वाहनों वाले प्रमुख शहरों में शुमार है, लेकिन इसके बावजूद यहां की समग्र यातायात व्यवस्था लगातार सुचारू और व्यवस्थित बनी रहती है। गृह मंत्री ने अपने निजी दौरों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री बनने से पहले और बाद के वर्षों में भी कभी यहां गंभीर ट्रैफिक जाम का सामना नहीं किया। शहर में क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) का सक्रिय रिस्पॉन्स टाइम मात्र 10 मिनट दर्ज है, जबकि सामान्य पुलिस का किसी भी आपात घटनास्थल पर पहुंचने का समय महज 4 मिनट है। यह त्वरित परिचालन मॉडल देश के बाकी राज्यों की पुलिस व्यवस्था के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
इसके साथ ही आपराधिक न्याय प्रक्रिया में चंडीगढ़ ने महज 140 दिनों की समयावधि के भीतर 85 फीसदी दोषसिद्धि दर हासिल करने में उल्लेखनीय सफलता पाई है। यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि यदि भारतीय न्याय संहिताओं को सही और योजनाबद्ध तरीके से जमीन पर लागू किया जाए, तो आम जनता को त्वरित न्याय मिल सकता है और अदालती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब समाप्त हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपनिवेशिक दौर के तीन पुराने कानूनों को समाप्त कर नई न्याय संहिताओं की औपचारिक शुरुआत भी चंडीगढ़ से ही की थी। इसके साथ ही प्रशासन का अगला बड़ा संकल्प चंडीगढ़ को पूरी तरह नशा मुक्त शहर बनाना है।
























