सिनेमा जगत के बेजोड़ अभिनेता नाना पाटेकर के असमय चले जाने से फिल्म उद्योग गहरे शोक में डूब गया है। सहकर्मियों और प्रशंसकों के लिए इस सच को स्वीकार कर पाना बेहद कठिन हो रहा है। जाने-माने फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने अपने इस पुराने सहयोगी के जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर अपने दिल की बात रखते हुए साफ किया कि वह अब भी यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि नाना जैसे मजबूत और जीवंत कलाकार अब इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर झलका दर्द और बेबसी
नाना पाटेकर के निधन की खबर मिलते ही राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हालांकि हर कोई भली-भांति जानता है कि संसार में कोई भी मनुष्य अमर नहीं है, फिर भी नाना जैसे फौलादी इंसान का अचानक यूं रुखसत हो जाना भीतर तक झकझोर देता है। इस पोस्ट के जरिए निर्देशक का तीव्र आक्रोश और बेबसी खुलकर सामने आई। उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया कि उन्हें नाना के हृदय की विफलता से नफरत महसूस हो रही है। अपनी व्यथा जाहिर करते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनका मन उस ईश्वर को खत्म कर देने का कर रहा है, जिसने उनसे अभिनय के भगवान नाना पाटेकर को सदा के लिए छीन लिया।
अभिनय के भगवान को दी भावभीनी विदाई
निर्देशक के इस संदेश से स्पष्ट होता है कि वह नाना पाटेकर की अभिनय क्षमता का कितना सम्मान करते थे। भारतीय सिनेमा में नाना अपनी कड़क आवाज, अनूठे संवाद अदायगी के लहजे और किरदारों की रूह में उतर जाने के लिए जाने जाते थे। अपने विस्तृत फिल्मी सफर के दौरान उन्होंने गंभीर भूमिकाओं, क्रूर खलनायकों, जांबाज पुलिस अधिकारियों से लेकर हास्य किरदारों तक हर रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। दोनों का संपर्क केवल कैमरे के आगे और पीछे तक सीमित नहीं था, बल्कि साथ काम करने के दौरान उनके बीच एक गहरा पेशेवर तालमेल भी स्थापित हो चुका था।
वर्ष 2003 की फिल्म भूत से शुरू हुआ था रचनात्मक सफर
दोनों कलाकारों के साथ काम करने की शुरुआत वर्ष 2003 में रिलीज हुई चर्चित हॉरर फिल्म भूत के जरिए हुई थी। इस थ्रिलर फिल्म में नाना के सधे हुए अभिनय ने कहानी के रहस्य, तनाव और गंभीरता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। इसके बाद दोनों का जुड़ाव फिल्म डरना मना है से भी रहा, जिसका निर्माण राम गोपाल वर्मा ने किया था। वर्ष 2004 में दोनों का यह तालमेल क्राइम ड्रामा फिल्म अब तक छप्पन में दिखाई दिया। यह सिनेमा नाना के करियर की सबसे चर्चित और सराही गई फिल्मों में शुमार की जाती है। इसमें उन्होंने मुंबई पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु आगाशे की सशक्त भूमिका निभाई थी, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने भरपूर प्यार दिया था।
द अटैक्स ऑफ 26/11 में एक दशक बाद दोबारा हुआ संगम
लगभग दस वर्षों के अंतराल के बाद यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ आई। वर्ष 2013 में प्रदर्शित हुई फिल्म द अटैक्स ऑफ 26/11 का निर्देशन राम गोपाल वर्मा ने किया था। मुंबई पर हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर तैयार इस फिल्म में नाना पाटेकर ने संयुक्त पुलिस आयुक्त राकेश मारिया का संजीदा किरदार निभाया था। इस फिल्म में भी नाना के गहन अभिनय ने पूरी कहानी को एक यथार्थवादी और गंभीर आयाम प्रदान किया था।


















