बॉलीवुड में 'ड्रीम गर्ल' के नाम से मशहूर दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी की जिंदगी धर्मेंद्र के निधन के बाद काफी बदल चुकी है। भले ही वे लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन दर्शक आज भी उनके अभिनय और फिल्मों को बेहद याद करते हैं। वर्तमान समय में हेमा मालिनी सिनेमाई चकाचौंध से इतर अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों और सामाजिक दायित्वों को पूरी मुस्तैदी के साथ संभाल रही हैं। वर्ष 2020 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'शिमला मिर्च' उनके करियर की अंतिम बॉलीवुड रिलीज थी। धर्मेंद्र से विवाह के पश्चात उन्होंने फिल्मों में अपनी सक्रियता धीरे-धीरे कम कर ली थी। नीतू कपूर जैसे समकालीन कलाकारों की वापसी के बीच जब उनसे सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही सहजता से अपनी वर्तमान प्राथमिकताओं और जीवन के इस पड़ाव को सामने रखा।
सिल्वर स्क्रीन पर वापसी और नीतू कपूर की तरह कमबैक पर हेमा मालिनी का रुख
फिल्मी पर्दे पर दोबारा लौटने की संभावनाओं को खारिज करते हुए हेमा मालिनी ने स्पष्ट किया कि वे अब अभिनय में वापसी के बारे में विचार नहीं करती हैं। वे अपने मौजूदा जीवन, संसदीय क्षेत्र के लोगों की सेवा और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय से पूरी तरह संतुष्ट हैं। अपने निर्णयों की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि अपने निर्वाचन क्षेत्र की जिम्मेदारी निभाने के बाद बचा हुआ समय वे अपने बच्चों तथा पोते-पोतियों के साथ व्यतीत करती हैं। इसके साथ ही वे धर्मेंद्र की यादों के संबल के साथ अपनी दिनचर्या बिता रही हैं। उनके अनुसार, यह पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव ही उनके जीवन को पूर्णता प्रदान करता है, इसलिए उन्हें दोबारा फिल्मों में अभिनय करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती।
अभिनय छोड़ने के बाद निर्देशन और छोटे पर्दे का सफर
विवाह और मातृत्व के दायित्वों को स्वीकार करने के बाद हेमा मालिनी ने फिल्मों की संख्या जरूर सीमित कर दी थी, परंतु उन्होंने अपने रचनात्मक कार्यों को कभी विराम नहीं दिया। मुख्यधारा की अभिनय कला से दूरी बनाने के बाद उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक 'नूपुर' का निर्माण व निर्देशन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके पश्चात उन्होंने फीचर फिल्म 'दिल आशना है' का निर्देशन किया और 'वुमन ऑफ इंडिया' जैसे महत्वपूर्ण दूरदर्शन प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इस प्रकार वे बड़े पर्दे से दूर रहकर भी मनोरंजन और कला जगत में लगातार सक्रिय बनी रहीं।
स्टेज पर शास्त्रीय नृत्य की निष्ठा और आर्थिक समझौते
हेमा मालिनी की पहचान हमेशा एक उत्कृष्ट शास्त्रीय नृत्यांगना की भी रही है। उन्होंने खुद को भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य नाटिकाओं में पूरी तरह समर्पित कर दिया। उन्होंने 'दुर्गा', 'महालक्ष्मी', 'राधा-कृष्ण' और 'द्रौपदी' जैसी भव्य शास्त्रीय बैले प्रस्तुतियों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह दृढ़ संकल्प लिया था कि वे मंच पर कभी भी बॉलीवुड के व्यावसायिक गानों पर नृत्य नहीं करेंगी। इस सिद्धांत पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि यदि वे स्टेज शो में फिल्मी गानों पर प्रस्तुति देतीं, तो वे बहुत अधिक धन अर्जित कर सकती थीं। शास्त्रीय नृत्य से उतनी भारी कमाई नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद वे अपने सिद्धांत और शास्त्रीय कला के प्रति निष्ठा पर हमेशा कायम रहीं।
राज कपूर की फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम को न कहने का किस्सा
अपने शुरुआती दौर की फिल्म 'सपनों का सौदागर' के बाद हेमा मालिनी हमेशा राज कपूर के निर्देशन में दोबारा काम करने की इच्छुक थीं। कुछ वर्षों बाद जब राज कपूर ने अपनी बहुचर्चित फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' के लिए उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने हेमा मालिनी से पहले ही कह दिया था कि वे जानते हैं कि वे इस भूमिका को स्वीकार नहीं करेंगी। हेमा मालिनी ने राज कपूर के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि यद्यपि वे उनके कुशल निर्देशन में काम करना बेहद पसंद करतीं, परंतु फिल्म की विषय-वस्तु और अपनी सीमाओं के कारण वे उस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने में असमर्थ थीं। इस प्रकार उन्होंने एक महान निर्देशक का प्रस्ताव भी बहुत विनम्रता के साथ ठुकरा दिया था।


















