नई दिल्ली में 12वीं (पीसीबी) की परीक्षा पास करने वाले कई छात्रों को जब एमबीबीएस में प्रवेश नहीं मिल पाता है, तो वे हताश हो जाते हैं। हालांकि, मेडिकल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए कई अन्य बेहतरीन मार्ग भी खुले हैं। भारत में आयुष सेक्टर का बाजार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें बीएएमएस यानी आयुर्वेद और बीएचएमएस यानी होम्योपैथी सबसे लोकप्रिय और मांग वाले डॉक्टर कोर्स के रूप में सामने आए हैं। इन दोनों डिग्रिायों को पूरा करने के बाद छात्रों को अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखने और मरीजों का इलाज करने का पूर्ण कानूनी अधिकार मिल जाता है।
छात्र अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उनके भविष्य के लिए कौन सा कोर्स चुनना अधिक फायदेमंद रहेगा। दोनों ही प्रोफेशनल कोर्सेस की कुल अवधि 5.5 साल निर्धारित की गई है और दोनों में ही प्रवेश नीट यूजी स्कोर के माध्यम से ही कराया जाता है। इसके बावजूद, दोनों की पठन-पाठन शैली, चिकित्सा के मूल सिद्धांत, सरकारी नौकरियों के अवसर और निजी क्लिनिक स्थापित करने के मौकों में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है। मेडिकल की दुनिया में कदम रखने से पहले इन दोनों पाठ्यक्रमों की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है।
कोर्स का पाठ्यक्रम: किस पढ़ाई में क्या सिखाया जाता है
बीएएमएस पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के साथ-साथ आधुनिक जीव विज्ञान, शरीर रचना विज्ञान और हर्बल दवाओं का अध्ययन कराया जाता है। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बुनियादी सर्जरी की ट्रेनिंग भी दी जाती है। दूसरी ओर, बीएचएमएस होम्योपैथी के मुख्य सिद्धांत पर आधारित होता है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके बीमारियों को जड़ से समाप्त करने के तौर-तरीकों और सूक्ष्म दवाओं यानी डाइल्यूशंस का गहन अध्ययन करवाया जाता है।
करियर और सरकारी नौकरियों के विकल्प
बीएएमएस की डिग्री पूरी होने के बाद रोजगार के कई विस्तृत द्वार खुल जाते हैं। चिकित्सक अपना खुद का आयुर्वेदिक क्लिनिक या अस्पताल शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर और वेलनेस सेंटर्स में भी इनकी भारी मांग है। पतंजलि, डाबर और हिमालय जैसी नामी कंपनियों में अनुसंधान के अवसर भी मिलते हैं। वहीं, बीएचएमएस के बाद भी निजी क्लिनिक चलाने का विकल्प खुला रहता है। आयुष अस्पतालों, होम्योपैथिक रिसर्च काउंसिल और फार्मास्यूटिकल कंपनियों में होम्योपैथिक कंसलटेंट के रूप में भी बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है।
शीर्ष शिक्षण संस्थान और कॉलेज
देशभर में इन दोनों कोर्सेस की पढ़ाई के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हो रहे हैं। आयुर्वेद के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, नई दिल्ली, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद, बीएचयू वाराणसी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर प्रमुख हैं। होम्योपैथी के क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी, कोलकाता, नेहरू होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली और राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, लखनऊ का नाम शीर्ष पर आता है।
वेतन और कमाई की संभावनाएं
वेतन के मामले में शुरुआती स्तर पर बीएएमएस फ्रेशर्स को निजी या सरकारी क्षेत्रों में आसानी से 35,000 से 50,000 रुपये प्रति माह मिल जाते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है या खुद का क्लिनिक सफल होता है, यह आय 1 लाख रुपये प्रतिमाह से भी अधिक हो जाती है। इसके मुकाबले, बीएचएमएस स्नातकों का शुरुआती वेतन 30,000 से 45,000 रुपये महीने के दायरे में रहता है। होम्योपैथी में आय काफी हद तक निजी क्लिनिक की सफलता और मरीजों के विश्वास पर टिकी होती है।
आपके लिए कौन सा कोर्स है सही
यदि आपकी रुचि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के उपचार और मामूली सर्जरी में है, तो बीएएमएस का चुनाव करना सबसे सही फैसला रहेगा। इसके विपरीत, यदि आप सूक्ष्म दवाओं, दुष्प्रभावों से मुक्त चिकित्सा पद्धति और रिसर्च के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हैं, तो बीएचएमएस कोर्स आपके लिए अधिक उपयुक्त साबित होगा।



















