भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी बहुत कम फिल्में रही हैं, जिन्होंने अलग-अलग भाषाओं में बनकर एक जैसा इतिहास रचा हो। साल 2005 में जब निर्देशक एआर मुरुगादॉस ने साउथ के मशहूर अभिनेता सूर्या और अभिनेत्री असिन के साथ तमिल फिल्म ‘गजनी’ पेश की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदलकर रख देगी। शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस की बीमारी से जूझ रहे एक ऐसे सिरफिरे प्रेमी की कहानी, जो अपनी प्रेमिका की नृशंस हत्या का बदला लेने के लिए अपने पूरे शरीर पर टैटू बनवा लेता है, सिनेमा प्रेमियों के लिए एकदम नया और बेहद रोमांचक अनुभव था। सूर्या ने संजय रामासामी के किरदार के लिए शारीरिक और मानसिक स्तर पर जो जबरदस्त बदलाव किया, उसने दर्शकों को हैरान कर दिया था। महज 7 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस तमिल फिल्म ने उस दौर में 50 करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक ग्रॉस कलेक्शन किया। इस शानदार कामयाबी ने न केवल दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफलता के नए मानदंड स्थापित किए, बल्कि सूर्या को भी रातोंरात एक बहुत बड़े स्टार के रूप में स्थापित कर दिया।
2008 का हिंदी रीमेक और 100 करोड़ का ऐतिहासिक कीर्तिमान
तमिल सिनेमा में तहलका मचाने के तीन साल बाद, 25 दिसंबर 2008 को इस फिल्म का हिंदी रीमेक भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हुआ। हिंदी संस्करण में आमिर खान के साथ असिन और जिया खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। इस फिल्म में संजय सिंघानिया का किरदार निभाने के लिए आमिर खान ने अपने शरीर पर अभूतपूर्व काम किया। उनका 8 पैक एब्स वाला मस्कुलर लुक और खास गजनी हेयरकट उस समय पूरे देश के युवाओं के बीच एक बड़ा फैशन ट्रेंड बन गया था। लगभग 52 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस हिंदी फिल्म ने भारतीय सिनेमा के इतिहास को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। हिंदी 'गजनी' भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन पार करने वाली पहली बॉलीवुड फिल्म बनी। दुनिया भर में 232 करोड़ रुपये से अधिक की कुल कमाई करके इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा के लिए कमाई के नए आयाम खोल दिए।
प्रदीप रावत का खौफनाक किरदार और अनोखा रिकॉर्ड
दोनों भाषाओं की इन दो महा-सफल फिल्मों के बीच सबसे दिलचस्प और अनूठा संबंध इनका मुख्य विलेन था। खास बात यह है कि दोनों ही फिल्मों का शीर्षक किसी नायक के नाम पर नहीं, बल्कि मुख्य खलनायक के नाम पर रखा गया था। सबसे अनोखा रिकॉर्ड यह रहा कि 2005 की तमिल फिल्म हो या 2008 का हिंदी रीमेक, दोनों में ही खतरनाक विलेन 'गजनी धर्मात्मा' की भूमिका एक ही कलाकार प्रदीप रावत ने निभाई थी। प्रदीप रावत के खौफनाक अभिनय, शारीरिक हाव-भाव और उनकी गूंजती भारी आवाज ने दोनों भाषाओं के दर्शकों को थिएटर्स में थर्राने पर मजबूर कर दिया था। भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह एक दुर्लभ रिकॉर्ड माना जाता है, जहां एक ही अभिनेता ने दो अलग-अलग भाषाओं की ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों में एक ही नकारात्मक किरदार निभाकर सफलता हासिल की हो।
असिन का बॉलीवुड डेब्यू और 'कल्पना' के किरदार का जादू
तमिल और हिंदी दोनों 'गजनी' की अभूतपूर्व सफलता में अभिनेत्री असिन का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने दोनों ही संस्करणों में मुख्य अभिनेत्री 'कल्पना' की भूमिका निभाई। असिन ने एक चुलबुली, मासूम और निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने वाली लड़की के किरदार को इतने जीवंत और समर्पित ढंग से पर्दे पर उतारा कि दर्शक खुद को उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने से नहीं रोक पाए। साल 2008 में जब असिन ने आमिर खान के साथ बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा, तो हिंदी भाषी दर्शक भी उनके अभिनय के दीवाने हो गए। पर्दे पर जब असिन के किरदार की हत्या का दृश्य आता है, तो वह दोनों ही बार दर्शकों को भावुक कर जाता है। दो अलग भाषाओं में एक ही किरदार को दोहराना और दोनों बार ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म देना असिन के अभिनय सफर का सबसे बड़ा माइलस्टोन साबित हुआ।
'मेमेंटो' से प्रेरणा और भारतीय भावनाओं का संतुलन
यह जगजाहिर है कि फिल्म 'गजनी' का मूल विचार हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'मेमेंटो' से प्रेरित था। हालांकि, निर्देशक एआर मुरुगादॉस ने इस विदेशी विचार को भारतीय संवेदनाओं, एक दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी और रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्शन के साथ इस तरह पिरोया कि हर वर्ग का दर्शक सिनेमाघरों की ओर खिंचा चला आया। चाहे 2005 में सूर्या का दमदार और भावुक अभिनय हो या फिर 2008 में आमिर खान का अद्वितीय समर्पण, दोनों ही फिल्मों की आत्मा एक समान थी। यही वजह है कि अलग-अलग दौर और भाषाओं में बनने के बावजूद दोनों ही फिल्में भारतीय सिनेमा की अमर गाथाओं में दर्ज हो गईं।



















