बॉलीवुड में अक्सर यह माना जाता है कि कलात्मक सिनेमा या सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्में व्यावसायिक स्तर पर बड़ी कमाई करने में विफल रहती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि समीक्षकों द्वारा सराही जाने वाली कृतियां बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों में पिछड़ जाती हैं। हालांकि, भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक मधुर भंडारकर ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया। उन्होंने ग्लैमर की दुनिया और समाज के स्याह पहलुओं को मिलाकर एक ऐसा प्रभावी फॉर्मूला तैयार किया, जिसने समालोचकों की प्रशंसा के साथ-साथ दर्शकों का दिल भी जीता। उनकी बनाई फिल्मों ने सिनेमाघरों से निकलने के बाद भी लोगों के दिलोंदिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
1980 और 90 के दशक के मुंबई अंडर underworld पर आधारित थी 'चांदनी बार'
साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'चांदनी बार' मधुर भंडारकर के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में अभिनेत्री तब्बू ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनके जीवंत और मार्मिक अभिनय की चौतरफा सराहना हुई। फिल्म की पटकथा 1980 और 1990 के दशक के मुंबई शहर की उस पृष्ठभूमि पर रची गई थी, जब पूरे महानगर पर अंडरवर्ल्ड का खौफनाक साया मंडराता था। उस दौर में बड़े उद्योगपतियों से लेकर फिल्म निर्माताओं तक हर कोई आपराधिक गिरोहों के दबाव में जीने को मजबूर था। ऐसी कठिन परिस्थितियों में बार डांसर्स के दैनिक जीवन, उनके संघर्षों और अंडरवर्ल्ड से पैदा होने वाले डर को फिल्म में बेहद संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया था। तब्बू के साथ अतुल कुलकर्णी और राजपाल यादव जैसे मंझे हुए कलाकारों ने फिल्म में मुख्य किरदार निभाए। एक असहाय महिला के जीवन की कठिनाइयों और संघर्ष को निर्देशक ने इस तरह पर्दे पर उकेरा कि देखने वाले दंग रह गए। इस फिल्म ने अपनी छाप छोड़ते हुए कुल 4 राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए। इसमें तब्बू को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि अतुल कुलकर्णी को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा फिल्म को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और सामाजिक मुद्दों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। गौरतलब है कि इस चर्चित फिल्म का सीक्वल भी जल्द ही आने वाला है।
'पेज 3' के जरिए उजागर हुई हाई सोसाइटी की चमक-दमक के पीछे की कड़वी हकीकत
'चांदनी बार' की सफलता के बाद मधुर भंडारकर ने मुंबई की उच्च वर्ग की जीवनशैली पर केंद्रित फिल्म 'पेज 3' बनाई। इस फिल्म में अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा ने एक युवा और महत्वाकांक्षी पत्रकार माधवी शर्मा का किरदार निभाया था। उनके साथ अतुल कुलकर्णी, संध्या मृदुल, बोमन ईरानी और तारा शर्मा ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं अदा कीं। फिल्म की कहानी एक ऐसी पत्रकार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे शहर के रईस और प्रभावशाली लोगों की भव्य पार्टियों को कवर करने का काम सौंपा जाता है। शुरुआत में माधवी इस ग्लैमरस और चकाचौंध से भरी दुनिया की ओर आकर्षित होती है, लेकिन जैसे-जैसे वह गहराई में जाती है, उसे इस चमक के पीछे छिपे रिश्तों की बनावट, स्वार्थ, अंधी महत्वाकांक्षाओं, मानसिक शोषण और पाखंड का असली चेहरा दिखने लगता है। मधुर भंडारकर ने बेहद बेबाकी से अभिजात वर्ग के दोहरे मापदंडों को पर्दे पर प्रस्तुत किया। इस फिल्म को भी समीक्षकों ने खूब सराहा और इसने 3 राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए। 'पेज 3' को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ पटकथा और सर्वश्रेष्ठ संपादन की श्रेणियों में राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
ग्लैमर वर्ल्ड की काली सच्चाई दिखाती फिल्म 'फैशन' और अभिनेत्रियों का प्रदर्शन
अपनी तीसरी प्रमुख अवॉर्ड विनिंग फिल्म 'फैशन' में मधुर भंडारकर ने एक बार फिर ग्लैमर इंडस्ट्री के पर्दे के पीछे की कड़वी सच्चाई को दर्शकों के सामने रखा। प्रियंका चोपड़ा और कंगना रनौत के अभिनय से सजी इस फिल्म ने रिलीज होते ही दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। फिल्म में मॉडल बनने के सपने, सफलता के शिखर तक पहुंचने की होड़ और उसके बाद आने वाले अवसाद व पतन की कहानी को बहुत ही यथार्थवादी ढंग से दिखाया गया। मधुर भंडारकर के प्रभावशाली निर्देशन में बनी इस फिल्म ने प्रियंका चोपड़ा और कंगना रनौत के अभिनय करियर की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया। दोनों अभिनेत्रियों के अभिनय में नजर आई गहराई को देखते हुए इस फिल्म को 2 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। प्रियंका चोपड़ा और कंगना रनौत दोनों को ही उनके शानदार अभिनय प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
7 साल के भीतर 9 राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर रचा इतिहास
निर्देशक मधुर भंडारकर ने महज 7 साल की अवधि के भीतर इन 3 बेमिसाल फिल्मों का निर्माण किया। सामाजिक सरोकारों, इंसानी जज्बातों और यथार्थवादी ताने-बाने से बुनी गई इन तीनों फिल्मों ने मिलकर कुल 9 राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर भारतीय सिनेमा में एक नया इतिहास रच दिया। जहां 'चांदनी बार' ने बार डांसर्स की बेबसी दिखाई, वहीं 'पेज 3' ने हाई सोसाइटी का नकाब उतारा और 'फैशन' ने मॉडलिंग वर्ल्ड के स्याह सच को उजागर किया। इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि यदि कहानी में दम हो और विषय को पूरी ईमानदारी से पेश किया जाए, तो सामाजिक कड़वी सच्चाई पर आधारित फिल्में भी सिनेमाघरों में अपार सफलता प्राप्त कर सकती हैं।



















