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हिंदी सिनेमा में कैबरे से 'आइटम सॉन्ग' बनने का सफर, फिल्म शूल और शिल्पा शेट्टी से जुड़ा है दिलचस्प इतिहासबॉलीवुड
14 अग॰ 2026, 7:43 pm (3 घंटे पहले)· 2

हिंदी सिनेमा में कैबरे से 'आइटम सॉन्ग' बनने का सफर, फिल्म शूल और शिल्पा शेट्टी से जुड़ा है दिलचस्प इतिहास

बॉलीवुड में दशकों तक 'कैबरे' कहे जाने वाले गानों का नाम बदलकर 'आइटम नंबर' कैसे पड़ा, इसकी कहानी 1999 की ब्लॉकबस्टर फिल्म शूल और शिल्पा शेट्टी के सुपरहिट डांस ट्रैक से जुड़ी हुई है।

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में संगीत और नृत्य का हमेशा से एक विशेष स्थान रहा है। दशकों पहले जब फिल्मों में कोई धमाकेदार डांस सीक्वेंस आता था, तो दर्शक उसे 'कैबरे' या 'वैंप डांस' के नाम से जानते थे। समय बीतने के साथ भारतीय फिल्म उद्योग की शब्दावली में एक नया शब्द शामिल हुआ जिसे 'आइटम सॉन्ग' या 'आइटम नंबर' कहा जाने लगा। आज के समय में यह शब्द बॉलीवुड की पहचान बन चुका है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस शब्द की औपचारिक शुरुआत और लोकप्रियता के पीछे 1990 के दशक की एक सुपरहिट फिल्म और एक लोकप्रिय गाने की मुख्य भूमिका रही है। 'मोनिका, ओ माय डार्लिंग' और 'आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं' जैसे सदाबहार गानों से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक सफर आज एक बेहद संगठित और व्यावसायिक रूप ले चुका है।

1950 से 1990 तक: कैबरे डांस और वैंप संस्कृति का दौर

बॉलीवुड में 1950 के दशक से लेकर 1980 और 1990 के दशक तक फिल्मों में विशेष नृत्य प्रस्तुतियों का एक तय प्रारूप होता था। उस दौर में मुख्य नायिका आमतौर पर ऐसे गानों में डांस नहीं करती थी। इसके लिए कहानी में एक अलग महिला किरदार या वैंप की रचना की जाती थी। इस परंपरा को भारतीय सिनेमा में सबसे ऊंचाई पर पहुंचाने का श्रेय मशहूर नृत्यांगना और अभिनेत्री हेलन को जाता है। हेलन के जरिए फिल्मों में शामिल किए गए कैबरे सीक्वेंस इतने असरदार होते थे कि कई बार दर्शक केवल उनके डांस को देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख करते थे। हेलन के बाद बिंदु और अरुणा ईरानी जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों ने भी इस विधा को आगे बढ़ाया और कई यादगार प्रस्तुतियां दीं।

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इन गानों का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना ही नहीं था, बल्कि यह फिल्म की पटकथा का एक अभिन्न हिस्सा हुआ करते थे। वैंप का किरदार कहानी में मुख्य हीरो और हीरोइन के सिद्धांतों के ठीक विपरीत एक अलग दुनिया को दर्शाता था। ऐसे में उसका कैबरे डांस उसी चरित्र की मानसिकता और माहौल को स्थापित करता था। यही कारण था कि उस समय 'कैबरे' शब्द केवल एक डांस स्टाइल का नाम नहीं था, बल्कि हिंदी सिनेमा की एक खास शैली और किरदार की पहचान बन गया था।

नब्बे के दशक में म्यूजिक मार्केट और स्टार सिस्टम का बदलाव

1990 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी सिनेमा के भीतर बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले। इस दौर में फिल्म संगीत का बाजार बहुत तेजी से बदला और इसके साथ ही स्टार सिस्टम में भी नया मोड़ आया। अब विशेष डांस नंबर केवल वैंप के किरदारों तक सीमित नहीं रहे। फिल्मों की मुख्य अभिनेत्रियों ने भी ऐसे गानों में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी। 'छम्मा छम्मा' जैसे गानों की अपार सफलता के बाद यह बात साफ हो गई कि एक धमाकेदार डांस नंबर पूरी फिल्म के प्रचार और उसकी बॉक्स ऑफिस सफलता का सबसे बड़ा जरिया बन सकता है।

इसी बदलते दौर में मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच 'आइटम नंबर' शब्द का इस्तेमाल अनौपचारिक रूप से शुरू हुआ। फिल्म के कथानक से थोड़ा अलग हटकर केवल मनोरंजन और पब्लिसिटी के लिए बनाए जाने वाले गानों को इस नई शब्दावली के तहत देखा जाने लगा।

1999 की फिल्म 'शूल' और 'यूपी-बिहार' गाने की ऐतिहासिक सफलता

साल 1999 में आई फिल्म 'शूल' ने इस पूरी बहस और शब्दावली को एक नया मोड़ दिया। इस फिल्म में एक विशेष गाना शामिल किया गया था, जिसके बोल थे 'दिल वालों के दिल का करार लूटने, मैं आई हूं यूपी-बिहार लूटने'। इस गाने में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने मुख्य डांसर के रूप में शिरकत की थी। गाने को सपना अवस्थी और चेतन शशिताल ने अपनी बेहतरीन आवाज दी थी, जबकि इसका संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर-एहसान-लॉय ने तैयार किया था और इसके बोल जाने-माने गीतकार समीर ने लिखे थे।

शिल्पा शेट्टी के देसी अंदाज और उनके शानदार डांस स्टेप्स ने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह गाना रिलीज होते ही चार्टबस्टर साबित हुआ और हर शादी-समारोह में बजने लगा। 1999 में इस गाने की जबरदस्त सफलता के बाद ही मुख्यधारा के मीडिया ने पहली बार 'आइटम नंबर' और इसे पेश करने वाली अभिनेत्री के लिए 'आइटम गर्ल' जैसे शब्दों का औपचारिक रूप से इस्तेमाल करना शुरू किया। इसके बाद से ही बॉलीवुड में ऐसे गानों को कैबरे के बजाय आइटम सॉन्ग कहा जाने लगा।

बिना किसी कोरियोग्राफी के गढ़ा गया था यह ऐतिहासिक डांस

इस सुपरहिट गाने से जुड़ा एक बेहद मजेदार और हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इसकी कोई पूर्व-निर्धारित कोरियोग्राफी नहीं की गई थी। गाने के कोरियोग्राफर अहमद खान ने सेट पर शिल्पा शेट्टी को पूरी आजादी दी थी। उन्होंने शिल्पा शेट्टी से कहा था कि वह गाने की तेज रिदम को खुद महसूस करें और संगीत के हिसाब से अपने स्वाभाविक लटके-झटके और एक्सप्रेशन्स दें। शिल्पा शेट्टी ने अपनी प्रतिभा के बल पर इस गाने को सदाबहार बना दिया।

इसके अलावा गाने की पार्श्व गायिका सपना अवस्थी को भी रिकॉर्डिंग के समय यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस गाने पर शिल्पा शेट्टी जैसी बड़ी स्टार डांस करने वाली हैं। सपना अवस्थी ने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि अपनी लोक संगीत वाली आवाज के कारण उन्हें लगा था कि यह गाना किसी बैकग्राउंड डांसर या साइड आर्टिस्ट पर फिल्माया जाएगा। इससे पहले सपना अवस्थी ने सुपरहिट गाना 'छैंया-छैंया' गाया था, जिस पर अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने ट्रेन की छत पर ऐतिहासिक डांस प्रस्तुत किया था।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'शूल' की मुख्य कहानी

जिस फिल्म 'शूल' के गाने ने बॉलीवुड की शब्दावली बदली, वह खुद में भारतीय सिनेमा की एक मील का पत्थर मानी जाती है। 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'शूल' की कहानी एक ईमानदार और अपने उसूलों पर जीने वाले पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इस दमदार किरदार को अभिनेता मनोज बाजपेयी ने पर्दे पर जीवंत किया था। फिल्म का निर्देशन ईश्वर निवास ने किया था, जबकि इसके लेखक और निर्माता रामगोपाल वर्मा थे।

सिस्टम के भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ लड़ाई को दर्शाती इस फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद असरदार, इमोशनल और दर्शकों को झकझोर देने वाला है। अपनी उत्कृष्ट पटकथा और अभिनय के दम पर फिल्म 'शूल' ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम किया था। इस तरह कैबरे से शुरू हुआ डांस गानों का सफर और 'शूल' फिल्म का योगदान आज भी बॉलीवुड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

सवाल-जवाब

बॉलीवुड में गानों को 'कैबरे' से 'आइटम सॉन्ग' कब कहा जाने लगा?
साल 1999 में फिल्म शूल के गाने 'मैं आई हूं यूपी-बिहार लूटने' की अपार सफलता के बाद मीडिया ने 'आइटम नंबर' और 'आइटम गर्ल' जैसे शब्द गढ़े।
फिल्म शूल के मशहूर गाने में किसने डांस किया था?
इस सुपरहिट गाने में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने मुख्य डांस परफॉरमेंस दी थी।
1950 से 1980 के दशक में कैबरे डांस के लिए कौन सी अभिनेत्री सबसे प्रसिद्ध थीं?
उस दौर में मशहूर नृत्यांगना और अभिनेत्री हेलन कैबरे डांस सीक्वेंस के लिए सबसे लोकप्रिय नाम थीं।
फिल्म शूल के 'यूपी-बिहार' गाने के गायक और संगीतकार कौन थे?
इस गाने को सपना अवस्थी और चेतन शशिताल ने गाया था, संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने दिया था और बोल समीर ने लिखे थे।
क्या फिल्म शूल के इस डांस गाने की पहले से कोरियोग्राफी की गई थी?
नहीं, कोरियोग्राफर अहमद खान ने शिल्पा शेट्टी से बिना किसी तय स्टेप्स के संगीत की रिदम पर अपने हिसाब से डांस करने को कहा था।
फिल्म शूल को कौन सा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था?
फिल्म शूल को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।
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