आम का मौसम धीरे-धीरे विदाई ले रहा है और बाजार में भी फलों की उपलब्धता कम होती जा रही है। सामान्यतः लोग यही मानते हैं कि आम का सीजन समाप्त हो गया है और अब अगले साल का इंतजार करना होगा। हालांकि, बागवानी के शौकीनों के लिए एक अच्छी खबर है कि आम की कुछ विशेष प्रजातियां ऐसी भी हैं जो केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रहतीं। बारहमासी आम एक ऐसी अद्भुत किस्म है, जो एक साल में दो बार फल देने की क्षमता रखती है। यह विशेष रूप से तब फल देता है जब आम का मुख्य सीजन शुरू हो रहा होता है या फिर खत्म हो रहा होता है। बिहार के जहानाबाद जिले के घोसी क्षेत्र में रहने वाले किसान अभिषेक शर्मा ने अपने घर के परिसर में इसी खास वैरायटी को उगाया है, जिसमें इस समय फल यानी टिकोला आने शुरू हो गए हैं।
खेती में नवाचार का कमाल
अभिषेक शर्मा एक युवा किसान हैं, जिनकी सोच पारंपरिक खेती से कुछ अलग करने की रही है। उन्होंने अपने एक बीघा खेत में आम की कई किस्में लगा रखी हैं, लेकिन घर के आंगन में उन्होंने विशेष रूप से आम्रपाली, बीजू और बारहमासी किस्मों को जगह दी है। वर्तमान में उनके पास बारहमासी आम के एक दर्जन पेड़ लगे हैं, जिनमें फल लगना शुरू हो गए हैं। अभिषेक का मानना है कि केवल सीजन के अनुसार आम उगाने से ज्यादा लाभ नहीं मिलता, लेकिन यदि कुछ हटकर प्रयोग किया जाए तो बाजार में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उनकी इसी सोच ने उन्हें अपने बाग में बारहमासी आम लगाने के लिए प्रेरित किया।
रखरखाव और लागत
इस प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अन्य आम के पेड़ों की तुलना में बहुत अधिक देखभाल या विशेष संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती है। अभिषेक शर्मा बताते हैं कि इस किस्म पर उन्हें बहुत कम खर्च करना पड़ता है। आम के पेड़ में मंजर आने से ठीक पहले और फिर फल यानी टिकोला लग जाने के बाद, कुल दो बार स्प्रे करने की जरूरत होती है। यदि किसान इन दो चरणों में सही से ध्यान रखे, तो फसल को नुकसान होने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके अलावा, नियमित रूप से पेड़ों के आसपास की मिट्टी की खुदाई करना भी पौधों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
ऑफ-सीजन में आम का स्वाद
इस आम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब बाजार में आम पूरी तरह खत्म हो जाते हैं, तब यह पेड़ फल प्रदान करता है। जो लोग आम की चटनी के बेहद शौकीन हैं, उनके लिए यह किस्म वरदान की तरह है, क्योंकि उन्हें अब चटनी के लिए पूरे साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आम के अन्य पेड़ों की भांति, इस प्रजाति में भी फल तैयार होने में करीब 2 महीने का समय लगता है। हालांकि, इसका स्वाद दूधिया मालदा जैसे लोकप्रिय आमों की तरह बहुत मीठा न भी हो, लेकिन इसका स्वाद काफी बेहतर और संतोषजनक होता है। इस किस्म को लगाकर कोई भी व्यक्ति जाड़े के दिनों से लेकर बरसात के मौसम तक ताजे आम का स्वाद ले सकता है, जिससे साल भर घर में आम की उपलब्धता बनी रहती है।










